लखीमपुर खीरी: किसानों की पहचान, कृषि भूमि और खेती से जुड़ी जानकारी को एक डिजिटल रिकॉर्ड में जोड़ने के लिए शुरू की गई फार्मर रजिस्ट्री (Farmer Registry) का अभियान लखीमपुर खीरी जिले में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस पहल के तहत किसानों की Farmer ID तैयार की जा रही है, जिसे भविष्य में कृषि योजनाओं और विभिन्न सरकारी सेवाओं का लाभ लेने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जिला प्रशासन और कृषि विभाग के संयुक्त प्रयास से गांव-गांव किसानों को फार्मर रजिस्ट्री के प्रति जागरूक किया जा रहा है। क्षेत्रीय लेखपालों के अलावा किसान खुद भी मोबाइल फोन या नजदीकी जनसेवा केंद्र (CSC) के माध्यम से पंजीकरण करा सकते हैं।
7.18 लाख से ज्यादा किसान पंजीकृत
कृषि उपनिदेशक गिरीश चंद्र के मुताबिक, जिले में कुल 7,18,932 किसान पंजीकृत हैं। इनमें से 6,39,809 किसानों की Farmer ID तैयार हो चुकी है। यानी जिले में फार्मर आईडी तैयार करने का काम करीब 89 फीसदी तक पूरा हो चुका है।अभी करीब 79,123 किसानों की Farmer ID बनना बाकी है। प्रशासन की ओर से इन किसानों तक पहुंचने और उन्हें जल्द रजिस्ट्रेशन कराने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
क्या है Farmer Registry?
फार्मर रजिस्ट्री के जरिए किसान की पहचान और उसकी कृषि भूमि से संबंधित जानकारी को एक डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। इसमें किसान की पहचान के साथ उसकी जमीन, खसरा-खतौनी और खेती से संबंधित विवरण डिजिटल रूप से उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।
इसका उद्देश्य किसानों को भविष्य में सरकारी कृषि योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से अलग-अलग सेवाओं के लिए बार-बार दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता कम हो सकती है।
मोबाइल से भी बना सकते हैं Farmer ID
किसान मोबाइल फोन के जरिए खुद भी Farmer Registry में पंजीकरण कर सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी CSC यानी जनसेवा केंद्र पर जाकर भी आवेदन किया जा सकता है। ग्रामीण इलाकों में लेखपाल और संबंधित अधिकारी किसानों को पंजीकरण की प्रक्रिया की जानकारी दे रहे हैं।पंजीकरण के लिए किसान के पास आधार कार्ड, समग्र आईडी और मोबाइल नंबर होना जरूरी बताया गया है। मोबाइल नंबर पर OTP के जरिए सत्यापन किया जाता है। इसके साथ खसरा और खतौनी से जुड़े दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं।
Agristack से जुड़ी है प्रक्रिया
फार्मर रजिस्ट्री का क्रियान्वयन Agristack से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र से जुड़े अलग-अलग डेटा को डिजिटल सिस्टम में व्यवस्थित करना है, ताकि किसान और उसकी कृषि भूमि की जानकारी एक ही रिकॉर्ड में उपलब्ध हो सके।
Farmer ID क्यों है जरूरी?
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में Farmer ID कई कृषि योजनाओं और सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में जिन किसानों की अभी तक Farmer ID नहीं बनी है, उन्हें जल्द पंजीकरण कराने की सलाह दी गई है।लखीमपुर खीरी में करीब 89 फीसदी Farmer ID तैयार होने के बाद अब प्रशासन का फोकस बचे हुए 79 हजार से अधिक किसानों को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ने पर है। अगर अभियान निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचता है, तो जिले के किसानों का एक बड़ा हिस्सा कृषि सेवाओं के डिजिटल सिस्टम से जुड़ जाएगा।