-भाकियू राष्ट्रीय प्रवक्ता बोले- बढ़ी लागत के बीच किसानों को नहीं मिल रहा फसल का उचित मूल्य, सरकारी स्कूलों की बदहाली पर भी जताई चिंता
मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने चीनी के बढ़ते दामों का हवाला देते हुए सरकार से गन्ने का मूल्य बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बाजार में चीनी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन इसका फायदा गन्ना किसानों को नहीं मिल रहा। खाद, बीज, सिंचाई, डीजल और मजदूरी की लागत बढ़ने के बावजूद किसान अपनी उपज का अपेक्षित मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
राकेश टिकैत ने कहा कि चीनी के दाम करीब दोगुने स्तर तक पहुंच गए हैं। ऐसे में सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बाजार में चीनी के बढ़े दाम का लाभ गन्ना किसानों तक भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि गन्ने का मूल्य तय करते समय किसानों की बढ़ती लागत और उनकी आय को ध्यान में रखा जाना चाहिए। किसानों को उनकी मेहनत का उचित पारिश्रमिक मिलना जरूरी है। भाकियू नेता ने ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि शहरों में निजी स्कूलों की ओर अभिभावकों का रुझान लगातार बढ़ रहा है, जबकि गांवों में सरकारी विद्यालय विद्यार्थियों की घटती संख्या और संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई गांवों में सरकारी स्कूल बंद होने की स्थिति में पहुंच रहे हैं और कुछ स्थानों पर विद्यालय भवनों का उपयोग दूसरे कामों में किए जाने की बातें सामने आती हैं। सरकार को सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए गंभीर प्रयास करने चाहिए। विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक, बेहतर शैक्षिक माहौल और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि ग्रामीण बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। राकेश टिकैत ने कहा कि शिक्षा समाज और देश की बुनियाद है। सरकारी स्कूलों की व्यवस्था कमजोर होने का सबसे अधिक असर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के बच्चों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों को इतना बेहतर बनाया जाना चाहिए कि अभिभावकों को महंगे निजी स्कूलों का रुख करने की मजबूरी न हो। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ शिक्षा, रोजगार और ग्रामीण क्षेत्रों की मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार को गंभीरता से काम करना चाहिए। राकेश टिकैत ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी समस्याओं और अधिकारों को लेकर आवाज उठाने का अधिकार है। किसानों, मजदूरों, विद्यार्थियों और आम लोगों को अपने हक के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आंदोलनों के माध्यम से ही कई समस्याएं सरकार और व्यवस्था के सामने प्रभावी ढंग से पहुंचती हैं। जमीनी समस्याओं को समझकर नीतियां बनाई जाएंगी, तभी किसानों और आम लोगों की समस्याओं का स्थायी समाधान संभव होगा।