- लकड़ी की डंडियों से रिले, टूटा हैमर थ्रो जाल, खुराक भत्ते को लेकर भी गंभीर आरोप
- राज्य स्तरीय स्कूल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में अव्यवस्थाओं पर उठे सवाल
- खिलाड़ियों को स्पोर्ट्स किट और चेंजिंग रूम नहीं मिलने के आरोप
- निजी होटल में ठहरने का दबाव बनाने की भी शिकायत
कविता। फरीदाबाद/भिवानी
हरियाणा को खेलों की नर्सरी और अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों की धरती के रूप में पहचान दिलाने वाले भिवानी में आयोजित राज्य स्तरीय स्कूल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रतियोगिता में खिलाड़ियों को मैटल बैटन की जगह लकड़ी की डंडियों से रिले रेस कराने, हैमर थ्रो का जाल टूटा होने के बावजूद इवेंट कराने और खिलाड़ियों को पर्याप्त खेल सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने के आरोप सामने आए हैं। अभिभावकों और खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता के संचालन में लापरवाही के साथ-साथ खुराक भत्ते के भुगतान में अनियमितता और निजी होटलों में ठहरने का दबाव बनाए जाने के भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
रिले रेस में लकड़ी की डंडियां
खिलाड़ियों और अभिभावकों का आरोप है कि दुनिया के सबसे तेज ट्रैक इवेंट में शामिल रिले रेस के दौरान खिलाड़ियों को मानक मैटल बैटन उपलब्ध कराने के बजाय लकड़ी की डंडियां पकड़ा दी गईं। उनका कहना है कि राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए पर्याप्त बजट होने के बावजूद इस तरह की व्यवस्था खिलाड़ियों के साथ मजाक है और इससे प्रतियोगिता के स्तर पर सवाल उठते हैं।
टूटा हैमर थ्रो जाल
प्रतियोगिता में सबसे गंभीर आरोप हैमर थ्रो को लेकर सामने आए हैं। आरोप है कि हैमर थ्रो का सुरक्षा जाल टूटा हुआ था और उसे दुरुस्त कराए बिना प्रतियोगिता कराई गई। इतना ही नहीं, खिलाड़ियों और अभिभावकों के अनुसार डिस्कस थ्रो एरिना में हैमर थ्रो इवेंट कराया गया। इससे बड़ी दुर्घटना होने की आशंका बनी रही। मौके पर मौजूद खिलाड़ियों और अभिभावकों ने आरोप लगाया कि आयोजन समिति ने सुरक्षा संबंधी पर्याप्त जानकारी और सावधानियां भी नहीं बताईं।
धाविका को चोट
आरोप है कि रनिंग इवेंट के दौरान एक धाविका के सिर में ट्रैक पर गंभीर चोट लगी। खिलाड़ियों और अभिभावकों का कहना है कि प्रतियोगिता स्थल पर चोटिल खिलाड़ियों के लिए तत्काल और पर्याप्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में भी लापरवाही बरती गई।
धमकी देने का आरोप
कई जिलों से आए खिलाड़ियों के अभिभावकों ने आरोप लगाया कि खिलाड़ियों को मिलने वाला डाइट मनी/खुराक भत्ता उन्हें नहीं दिया गया। उनका दावा है कि भत्ता मांगने पर कुछ खिलाड़ियों को प्रतियोगिता में नहीं खिलाने या वापस भेजने की धमकी तक दी गई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अभिभावकों ने मांग की है कि विभाग सभी जिलों के खिलाड़ियों को जारी खुराक भत्ते और उसके वास्तविक भुगतान का रिकॉर्ड सार्वजनिक करे।
निजी होटल में ठहरने का दबाव
कुछ खिलाड़ियों और अभिभावकों ने आरोप लगाया कि सरकारी ठहरने की व्यवस्था के बजाय खिलाड़ियों को निजी होटलों में रुकने के लिए दबाव डाला गया। उनका दावा है कि इसके चलते खिलाड़ियों को अपनी जेब से करीब 1,000 से 1,500 रुपये प्रतिदिन तक खर्च करने पड़े। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले खिलाड़ियों पर इसका अतिरिक्त बोझ पड़ा।
पर्याप्त चेंजिंग रूम नही
अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षा विभाग की ओर से खेल किट उपलब्ध कराने के निर्देशों के बावजूद कई खिलाड़ियों को किट नहीं मिली। लड़कियों के लिए पर्याप्त चेंजिंग रूम की व्यवस्था नहीं होने और घटिया खेल उपकरणों के इस्तेमाल के आरोप भी लगाए गए हैं।
नियुक्ति पर भी सवाल
खिलाड़ियों और अभिभावकों ने प्रतियोगिता में तकनीकी अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि एसजीएफआई के निर्धारित चयन मानकों की अनदेखी करते हुए बड़ी संख्या में ऐसे तकनीकी अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई, जो खेल प्रशिक्षक नहीं थे। उनका कहना है कि राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में तकनीकी व्यवस्थाएं पूरी तरह नियमों के अनुरूप होनी चाहिए थीं।
खेल परिणाम प्रभावित
कुछ अभिभावकों ने आरोप लगाया कि प्रतियोगिता के दौरान कुछ खेल परिणामों को प्रभावित करने और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए चयन में पक्षपात किए जाने की कोशिश हुई। आरोप है कि चयन प्रक्रिया में कुछ परिचित खेल अकादमियों के खिलाड़ियों को लाभ पहुंचाया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
जांच की मांग की
अभिभावकों ने मुख्यमंत्री, शिक्षा विभाग और खेल विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने खिलाड़ियों को जारी खुराक भत्ते का रिकॉर्ड जांचने, सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जांच कराने, निजी होटल में ठहरने के दबाव की पड़ताल करने तथा दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अभिभावकों का कहना है कि ‘जिस प्रदेश में खेलों और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने की बात होती है, वहां राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में यदि खिलाड़ी लकड़ी की डंडियों से रिले दौड़ने और असुरक्षित मैदान में इवेंट करने को मजबूर हों तो यह पूरे खेल तंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि सुविधाओं के अभाव और आर्थिक बोझ के कारण गरीब परिवारों के बच्चे खेलों से दूर हुए तो भविष्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की तलाश और तैयार करने की पूरी व्यवस्था प्रभावित होगी।