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पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना हादसा: टीएचडीसी-एचसीसी की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

पीपलकोटी।विष्णुगाढ़-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की टीआरटी सुरंग में मलबा आने से हुए दर्दनाक हादसे ने परियोजना में कार्यरत मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद रात करीब 2:30 बजे तक चले रेस्क्यू अभियान में सात लोगों…

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पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना हादसा: टीएचडीसी-एचसीसी की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

पीपलकोटी।विष्णुगाढ़-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की टीआरटी सुरंग में मलबा आने से हुए दर्दनाक हादसे ने परियोजना में कार्यरत मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद रात करीब 2:30 बजे तक चले रेस्क्यू अभियान में सात लोगों के शव बरामद किए जा चुके थे, जबकि घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया। तीन लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि सुरंग के अंदर उस समय कितने मजदूर काम कर रहे थे, इसकी स्पष्ट जानकारी परियोजना प्रबंधन और निर्माणदायी कंपनी के पास क्यों नहीं थी। यदि कंपनी के पास सुरंग के अंदर कार्यरत श्रमिकों का सही रिकॉर्ड था, तो रेस्क्यू अभियान के दौरान मजदूरों की संख्या को लेकर असमंजस की स्थिति क्यों बनी? इसको लेकर परियोजना प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

सुरंग में काम करने वाले श्रमिकों के अनुसार, जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां पिछले करीब 20 दिनों से धंसाव की स्थिति बनी हुई थी। श्रमिकों का आरोप है कि इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों और कंपनी प्रबंधन को होने के बावजूद संभावित खतरे को गंभीरता से नहीं लिया गया। यदि समय रहते सुरक्षा उपाय किए जाते तो इतने बड़े हादसे को टाला जा सकता था।

इस हादसे ने जलविद्युत परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर भी बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि क्या सुरक्षा मानक केवल कागजों तक सीमित हैं या वास्तव में कार्यस्थल पर भी उनका प्रभावी पालन हो रहा है। सुरंगों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा के लिए नियमित निरीक्षण, जोखिम वाले स्थानों की पहचान और समय रहते आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाना बेहद जरूरी है।

बताया जा रहा है कि टीएचडीसी की इन सुरंगों में पूर्व में भी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद यदि पुराने हादसों से सबक नहीं लिया गया और संभावित खतरे के संकेतों को नजरअंदाज किया गया, तो यह गंभीर लापरवाही का विषय है।

हादसे के बाद टीएचडीसी और निर्माणदायी कंपनी एचसीसी की सुरक्षा नीति और निगरानी व्यवस्था की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि हादसे के समय सुरंग के अंदर वास्तव में कितने श्रमिक मौजूद थे और उनकी उपस्थिति का कंपनी के पास क्या रिकॉर्ड था।

मजदूर संगठनों और स्थानीय राजेंद्र हटवाल का कहना है कि हादसे की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। यदि सुरक्षा मानकों की अनदेखी या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और परियोजनाओं में काम करने वाले श्रमिकों की जान सुरक्षित रह सके।

लेखक

Rashmi Singh

रश्मि सिंह मास कम्युनिकेशन में स्नातकोत्तर हैं और मीडिया एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ग्राउंड रिपोर्टिंग और कंटेंट लेखन से की तथा समय के साथ देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों और समाचार चैनलों में कार्य किया। राजनीति, समसामयिक घटनाक्रम, उत्तर प्रदेश की खबरों, सामाजिक मुद्दों और मनोरंजन जगत की रिपोर्टिंग एवं विश्लेषण में उन्हें विशेष अनुभव प्राप्त है। डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों क्षेत्रों में काम करते हुए उन्होंने तथ्यपरक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता को अपनी पहचान बनाया है।

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