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डीजल में एथेनॉल मिलाने की सरकार की योजना को झटका, सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतरी ब्लेंडिंग

नई दिल्ली: पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने के बाद अब डीजल में भी एथेनॉल मिलाने की योजना को बड़ा तकनीकी झटका लगा है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने संसद में लिखित जवाब में बताया कि डीजल…

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डीजल में एथेनॉल मिलाने की सरकार की योजना को झटका, सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतरी ब्लेंडिंग

नई दिल्ली: पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने के बाद अब डीजल में भी एथेनॉल मिलाने की योजना को बड़ा तकनीकी झटका लगा है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने संसद में लिखित जवाब में बताया कि डीजल में एथेनॉल मिलाकर तैयार किए गए ईंधन का परीक्षण जरूरी सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतर सका। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह डीजल के फ्लैश पॉइंट में आई कमी को बताया गया है।

सरकार के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने डीजल में एथेनॉल ब्लेंडिंग की संभावनाओं को लेकर वैज्ञानिक और तकनीकी परीक्षण किए थे। ये परीक्षण तेल कंपनियों के रिसर्च एंड डेवलपमेंट केंद्रों में मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं और वाहन निर्माताओं के सहयोग से किए गए। परीक्षण के दौरान सामने आया कि डीजल में एथेनॉल मिलाने के बाद ईंधन का फ्लैश पॉइंट निर्धारित स्तर से नीचे चला गया।

क्या होता है फ्लैश पॉइंट?

फ्लैश पॉइंट किसी तरल ईंधन के लिए बेहद महत्वपूर्ण सुरक्षा मानक होता है। यह वह न्यूनतम तापमान है, जिस पर ईंधन इतनी मात्रा में वाष्प छोड़ने लगता है कि किसी छोटी लौ या आग के स्रोत के संपर्क में आने पर वह जल सकता है।

ईंधन का फ्लैश पॉइंट जितना महत्वपूर्ण होता है, उतनी ही सावधानी उसके भंडारण, परिवहन और इस्तेमाल में बरती जाती है। सरकार के अनुसार, डीजल में एथेनॉल मिलाने के बाद इस महत्वपूर्ण गुण में बदलाव देखा गया। यही कारण रहा कि परीक्षण के दौरान तैयार ईंधन निर्धारित सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं कर सका।

पेट्रोल में 20% एथेनॉल, लेकिन डीजल में चुनौती

भारत पिछले कुछ वर्षों में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दे रहा है। फिलहाल पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण की व्यवस्था लागू है। सरकार का उद्देश्य घरेलू एथेनॉल उत्पादन के लिए बाजार तैयार करना, पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना है।

हालांकि, डीजल का रासायनिक व्यवहार पेट्रोल से अलग होने के कारण इसमें एथेनॉल मिलाने के दौरान अलग तरह की तकनीकी और सुरक्षा चुनौतियां सामने आई हैं। फ्लैश पॉइंट में कमी को इसी दिशा में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक माना गया है।

डीजल में आइसोब्यूटेनॉल की भी ब्लेंडिंग नहीं

संसद में सरकार से डीजल में आइसोब्यूटेनॉल के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर सुरेश गोपी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल डीजल में आइसोब्यूटेनॉल की ब्लेंडिंग नहीं की जा रही है।

इससे साफ है कि सरकार फिलहाल डीजल में किसी नए अल्कोहल आधारित मिश्रण को जल्दबाजी में लागू करने के बजाय सुरक्षा और तकनीकी पहलुओं को प्राथमिकता दे रही है।

पेट्रोल में एथेनॉल 20% से आगे बढ़ाने पर भी फैसला नहीं

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पेट्रोल में मौजूदा 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण की सीमा को आगे बढ़ाने को लेकर फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। यदि भविष्य में ब्लेंडिंग की मात्रा बढ़ाने पर विचार किया जाता है, तो उससे पहले व्यापक वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन किए जाएंगे।

इसके अलावा वाहन निर्माता कंपनियों, तेल विपणन कंपनियों और संबंधित अनुसंधान संस्थानों से भी सलाह ली जाएगी। यानी भविष्य में एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर कोई भी बड़ा फैसला सुरक्षा, वाहन अनुकूलता और तकनीकी परीक्षणों के आधार पर ही लिया जाएगा।

लेखक

Rashmi Singh

रश्मि सिंह मास कम्युनिकेशन में स्नातकोत्तर हैं और मीडिया एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ग्राउंड रिपोर्टिंग और कंटेंट लेखन से की तथा समय के साथ देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों और समाचार चैनलों में कार्य किया। राजनीति, समसामयिक घटनाक्रम, उत्तर प्रदेश की खबरों, सामाजिक मुद्दों और मनोरंजन जगत की रिपोर्टिंग एवं विश्लेषण में उन्हें विशेष अनुभव प्राप्त है। डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों क्षेत्रों में काम करते हुए उन्होंने तथ्यपरक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता को अपनी पहचान बनाया है।

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