मुकदमा दर्ज, जांच कमेटी सक्रिय, लेकिन गिरफ्तारी शून्य: उपेंद्र शंखधार आत्महत्या मामले में तीसरे दिन भी कार्रवाई का इंतजार

पीलीभीत। बीसलपुर नगर पालिका के बर्खास्त कर्मचारी उपेंद्र शंखधार की आत्महत्या ने जहां पूरे जिले को झकझोर दिया है, वहीं मामले में मुकदमा दर्ज होने के तीन दिन बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी न होने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। एक ओर प्रशासन जांच समितियों और निष्पक्ष पड़ताल के दावे कर रहा है, तो दूसरी ओर पीड़ित परिवार को अब भी कार्रवाई का इंतजार है।

जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने मामले की जांच तेज कर दी है। समिति कथित सुसाइड नोट, विभागीय रिकॉर्ड, बैंक खातों के लेनदेन और आरोपों की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। प्रशासनिक स्तर पर लगातार जांच की बात कही जा रही है, लेकिन जमीन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दिखाई दे रही है ।

हालांकि अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) रोशनी यादव ने कहा है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। समिति में मुख्य विकास अधिकारी सतीश प्रसाद मिश्रा, एडीएम न्यायिक रोशनी यादव और एसडीएम न्यायिक बीसलपुर शामिल हैं।

गौरतलब है कि मृतक के भाई अनुराग शर्मा की तहरीर पर बीसलपुर कोतवाली में ईओ शमशेर सिंह, चेयरमैन प्रतिनिधि अमन जायसवाल उर्फ निक्की, लिपिक मोहम्मद यासीन, अकरम खां और अकाउंटेंट संजीव मिश्रा के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

परिजनों का आरोप है कि उपेंद्र शंखधार को लंबे समय से मानसिक, आर्थिक और प्रशासनिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही थी। नौकरी बचाने के नाम पर धन की मांग, अपमानित करने, दबाव बनाने और मारपीट तक के आरोप लगाए गए हैं। घटनास्थल से मिला पांच पन्नों का कथित सुसाइड नोट भी कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
इसके बावजूद मुकदमा दर्ज होने के तीसरे दिन तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी न होना चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब नामजद मुकदमा दर्ज है और आरोप गंभीर हैं, तो कार्रवाई केवल फाइलों और जांच समितियों तक ही क्यों सीमित है। फिलहाल मामले में जांच का पहिया तेजी से घूमने के दावे जरूर किए जा रहे हैं, लेकिन गिरफ्तारी के मोर्चे पर पुलिस के हाथ अब भी खाली हैं।जिले में चर्चा है कि इस मामले में जांच की रफ्तार तो तेज दिखाई जा रही है, लेकिन कार्रवाई की गाड़ी अभी भी पहले गियर से आगे बढ़ती नजर नहीं आ रही।

चेयरमैन प्रतिनिधि निक्की पर बर्खास्त पालिका कर्मी को मूत्र पिलाने का गंभीर आरोप

बीसलपुर नगर पालिका के बर्खास्त कर्मचारी उपेंद्र शंखधार की आत्महत्या प्रकरण में दर्ज एफआईआर में चेयरमैन प्रतिनिधि अमन जायसवाल उर्फ निक्की पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मृतक के भाई की ओर से दर्ज कराई गई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उपेंद्र शंखधार को कथित रूप से एक गुप्त स्थान पर ले जाकर मारपीट की गई और उन्हें जबरन मूत्र पिलाया गया। साथ ही आर्थिक, मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने अमन जायसवाल, अधिशासी अधिकारी समेत पांच लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
रिपोर्ट-अदनान खान

रश्मि सिंह मास कम्युनिकेशन में स्नातकोत्तर हैं और मीडिया एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ग्राउंड रिपोर्टिंग और कंटेंट लेखन से की तथा समय के साथ देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों और समाचार चैनलों में कार्य किया। राजनीति, समसामयिक घटनाक्रम, उत्तर प्रदेश की खबरों, सामाजिक मुद्दों और मनोरंजन जगत की रिपोर्टिंग एवं विश्लेषण में उन्हें विशेष अनुभव प्राप्त है। डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों क्षेत्रों में काम करते हुए उन्होंने तथ्यपरक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता को अपनी पहचान बनाया है।

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