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खबर छपते ही 65 लाख की सड़क पर शुरू हुई लीपापोती, मोरंग डालकर छिपाई जा रहीं खामियां; जेई-एक्सईएन पर उठे सवाल

पीलीभीत। आवास विकास कॉलोनी में करीब 65 लाख रुपये की लागत से बन रही 14 से 15 सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों के बीच अब मरम्मत के नाम पर लीपापोती किए जाने का आरोप सामने आया है। स्थानीय…

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खबर छपते ही 65 लाख की सड़क पर शुरू हुई लीपापोती, मोरंग डालकर छिपाई जा रहीं खामियां; जेई-एक्सईएन पर उठे सवाल
65 लाख रुपये की लागत से बन रही 14 से 15 सड़कों के निर्माण

पीलीभीत। आवास विकास कॉलोनी में करीब 65 लाख रुपये की लागत से बन रही 14 से 15 सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों के बीच अब मरम्मत के नाम पर लीपापोती किए जाने का आरोप सामने आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समाचार प्रकाशित होने के बाद विभाग और ठेकेदार सक्रिय तो हुए, लेकिन सड़क को मानकों के अनुरूप दोबारा बनाने के बजाय उखड़े हिस्सों पर केवल मोरंग डालकर खामियां छिपाने का प्रयास किया जा रहा है।

आयकर विभाग कार्यालय के सामने सोमवार को बनी सड़क मंगलवार तक कई स्थानों से उखड़ गई थी। सड़क के एक दिन भी नहीं टिक पाने से निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हुए। मामला सामने आने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि पूरी सड़क की तकनीकी जांच कराकर आवश्यकतानुसार दोबारा निर्माण कराया जाएगा, लेकिन मौके पर केवल उखड़े हिस्सों पर मोरंग डालकर मरम्मत किए जाने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है।

लोगों ने उठाए गुणवत्ता पर सवाल

कॉलोनीवासियों का कहना है कि जिस सड़क को वर्षों तक आम जनता के उपयोग में रहना है, वह एक दिन भी नहीं टिक सकी। ऐसे में केवल ऊपर से मरम्मत कर देना समस्या का समाधान नहीं है। उनका आरोप है कि यदि मामला मीडिया में उजागर नहीं होता तो घटिया निर्माण को ही सही बताकर भुगतान की प्रक्रिया भी पूरी कर दी जाती।

जेई और एक्सईएन की भूमिका पर भी सवाल

निर्माण कार्य की निगरानी आवास विकास परिषद के अवर अभियंता (जेई) आनंद कुमार की देखरेख में कराई जा रही थी। सड़क के एक दिन में उखड़ जाने के बाद उनकी निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण के दौरान गुणवत्ता की नियमित जांच होती तो ऐसी स्थिति नहीं बनती।

अधिकारियों ने नहीं दिया पक्ष

मामले में आवास विकास परिषद के अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) और अवर अभियंता (जेई) से उनका पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन दोनों अधिकारियों ने कॉल रिसीव नहीं की। अधिकारियों की चुप्पी से लोगों के बीच और भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

जांच और कार्रवाई की मांग

कॉलोनीवासियों ने मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए और यदि गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो संबंधित ठेकेदार के साथ-साथ निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए। लोगों का कहना है कि लाखों रुपये की सरकारी परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।