लखनऊ: उत्तर प्रदेश को देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनाने और किसानों की आय को कई गुना बढ़ाने के उद्देश्य से राजधानी लखनऊ में एक उच्च स्तरीय संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित की गई। योजना भवन के वैचारिकी सभागार में हुई इस ऐतिहासिक बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के ‘कृषि रोडमैप’, केंद्रीय व राज्य स्तरीय योजनाओं और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की।
इस बैठक में उत्तर प्रदेश की कृषि व्यवस्था को आधुनिक, तकनीक-संचालित और जलवायु अनुकूल बनाने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा तैयार ‘विकसित कृषि @2047: उत्तर प्रदेश कार्ययोजना’ का खाका पेश किया गया। साथ ही, किसानों के हित में कई बड़े फैसलों की घोषणा की गई।
लखनऊ में स्थापित होगा ‘क्लीन प्लांट सेंटर’
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तर प्रदेश के बागवानी (हॉर्टिकल्चर) क्षेत्र को एक नई दिशा और गति देने के लिए लखनऊ में ‘क्लीन प्लांट सेंटर’ (Clean Plant Center) स्थापित करने की बड़ी घोषणा की।
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मुख्य उद्देश्य: इस केंद्र के माध्यम से राज्य के किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले और पूरी तरह से रोगमुक्त (Disease-free) पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे।
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प्रभाव: इससे न केवल प्रदेश में उद्यानिकी क्षेत्र का व्यापक विस्तार होगा, बल्कि फलों और सब्जियों की गुणवत्ता सुधरने से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित होगी।
यूपी की कृषि अर्थव्यवस्था को 7.41 ट्रिलियन से 96.96 ट्रिलियन रुपये बनाने का लक्ष्य
बैठक में आईसीएआर (ICAR) के महानिदेशक ने ‘विकसित कृषि @2047: उत्तर प्रदेश कार्ययोजना’ पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। इस कार्ययोजना में उत्तर प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का विजन रखा गया है:
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अर्थव्यवस्था में उछाल: वर्तमान में उत्तर प्रदेश की कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था लगभग 7.41 ट्रिलियन रुपये की है। रोडमैप के अनुसार, वर्ष 2047 तक कृषि विविधीकरण (Crop Diversification) और उच्च उत्पादकता के माध्यम से इसे 96.96 ट्रिलियन रुपये तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य है।
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विकास दर में वृद्धि: इस विशाल लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य की वास्तविक कृषि विकास दर को वर्तमान 3.19 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.41 प्रतिशत तक ले जाने की रणनीति बनाई गई है।
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रणनीति का आधार: साल 2047 तक कृषि विकास का आधार केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि उत्पादकता, मूल्य संवर्धन (Value Addition), किसानों की शुद्ध आय और निर्यात क्षमता में समग्र वृद्धि करना होगा।
किसानों के लिए बड़ी राहत: सरकारी खरीद की अवधि बढ़ी, नए आवासों की सौगात
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तर प्रदेश के किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए दो अत्यंत महत्वपूर्ण स्वीकृतियां प्रदान कीं:
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MSP पर खरीद की अवधि बढ़ी: केंद्रीय मंत्री ने प्रदेश में चना, मसूर और सरसों की सरकारी खरीद की अवधि बढ़ाए जाने की मंजूरी दी और इसका आशय पत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा। मुख्यमंत्री ने इसके लिए आभार जताते हुए कहा कि इससे अधिक से अधिक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ मिलेगा।
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6.18 लाख से अधिक नए पीएम आवास: ग्रामीण विकास को गति देते हुए केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अगले चरण के लिए पात्र 6,18,482 लाभार्थियों की सूची मुख्यमंत्री को सौंपी। सीएम योगी ने निर्देश दिए कि पूर्ण पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से इन सभी जरूरतमंदों को मकान उपलब्ध कराए जाएं।
कृषि विविधीकरण और उत्पादकता वृद्धि पर विशेष जोर
रोडमैप में इस बात को रेखांकित किया गया है कि धान और गेहूं पर पारंपरिक निर्भरता को कम करना होगा। इसके स्थान पर:
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दलहन (दालें), तिलहन, मोटे अनाज, मक्का और बागवानी जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों (High-Value Crops) का विस्तार किया जाएगा।
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प्रत्येक जिले की कृषि-जलवायु परिस्थिति और बाजार की मांग के अनुरूप फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा।
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उत्पादकता बढ़ाने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले बीज, जलवायु सहनशील किस्में, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और सटीक कृषि (Precision Agriculture) को अपनाया जाएगा।
एकीकृत कृषि प्रणाली (Integrated Farming) से चमकेगी किस्मत:
कार्ययोजना में फसल उत्पादन के साथ-साथ डेयरी, बागवानी, मत्स्य पालन, मशरूम उत्पादन, वर्मी कम्पोस्ट और कृषि वानिकी को एक साथ अपनाने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा और किसानों की शुद्ध आय में 109% से 162% तक की भारी वृद्धि हो सकती है।
तकनीक से बदलेगी खेती की सूरत: AI, ड्रोन और डिजिटल प्लेटफॉर्म
2047 के विजन को पूरा करने के लिए कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के समावेशन की सिफारिश की गई है:
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कृषि यंत्रीकरण (Mechanization): इसे साल 2047 तक 75 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य है।
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आधुनिक टूल्स: खेती में ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), रिमोट सेंसिंग और डिजिटल कृषि प्लेटफॉर्म का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाएगा।
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जिला स्तरीय केंद्र: प्रत्येक जनपद में डिजिटल कृषि एवं एआई प्लेटफॉर्म, मृदा-जल-कार्बन वेधशालाएं और कृषि उद्यमिता एवं बिजनेस इन्क्यूबेशन केंद्र स्थापित करने का सुझाव दिया गया है।
FDR तकनीक से यूपी ने बचाए 1,000 करोड़ रुपये
बैठक में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एक महत्वपूर्ण तकनीकी सफलता साझा की। उन्होंने बताया कि राज्य ने एफडीआर (Full Depth Reclamation) तकनीक के उपयोग से सड़कों व इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में लगभग 1,000 करोड़ रुपये की बचत की है। यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण और लागत में कमी लाने में बेहद प्रभावी रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से इसके लिए प्रोत्साहन राशि देने का आग्रह किया, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया।
आगामी जुलाई से शुरू होगा नया मिशन: ‘वीबी-जी राम’ (VB-GRAM)
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आगामी जुलाई महीने से शुरू होने वाले ‘विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ यानी वीबी-जी राम (VB-GRAM) के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। यह योजना ग्रामीण इलाकों में रोजगार सृजन, जल संरक्षण और टिकाऊ संपत्तियों के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने मनरेगा के लंबित देयों के भुगतान के लिए राज्य सरकार को तुरंत प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए ताकि नई योजना निर्बाध रूप से शुरू हो सके।
इसके अतिरिक्त, बैठक में संभावित अलनीनो (El Nino) परिस्थितियों और खेती पर उसके प्रभाव की भी समीक्षा की गई तथा जल संरक्षण व मौसम आधारित कृषि सलाह प्रणाली को मजबूत करने पर सहमति बनी।
‘समृद्ध उत्तर प्रदेश से ही साकार होगा विकसित भारत’
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तर प्रदेश के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यूपी कभी ‘बीमारू’ राज्यों में गिना जाता था, लेकिन आज पीएम मोदी और सीएम योगी के नेतृत्व में यह विकास के नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा, “विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए समृद्ध उत्तर प्रदेश सबसे अनिवार्य शर्त है।”
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आईसीएआर के इस रोडमैप को यूपी के लिए अत्यंत उपयोगी मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के साझा और समन्वित प्रयासों से ‘विकसित कृषि एवं विकसित भारत’ के लक्ष्य को समय से पहले प्राप्त कर लिया जाएगा।
इस उच्च स्तरीय बैठक में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख, राजस्व राज्य मंत्री सुरेन्द्र दिलेर तथा केंद्र व राज्य सरकार के तमाम वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।












