भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की हुई मौत

पायनियर समाचार सेवा
लखनऊ। अचानक बिल्डिंग में लगी आग…तेज होती आग की लपकें, बिल्डिंग में मौजूद 25 से 30 लोग, अचानक लगी भीषण आग ने ऐसा तांडव मचाया कि वहां मौजूद हर शख्स की रूह कांप उठी। चारों तरफ सिर्फ और सिर्फ चीख-पुकार मची थी। इसी खौफनाक मंजर के बीच एक मां की वो चीख गूंजी, जिसे सुनकर वहां मौजूद हर इंसान की आंखें नम हो गईं ‘कोई मेरे बच्चे को बचा लो, कोई मेरे बच्चे को अस्पताल ले जाओ’, बिल्डिंग की ऊपरी मंजिल पर चल रहे कोचिंग सेंटर, कंप्यूटर इंस्टीट्यूट और लाइब्रेरी चल रही थी। जिसे लेकर प्रशासन ने इनकार किया है और कहा है कि वहां गेमिंग जोन था और नीचे एक पेट शॉप थी।

मृकतो की संख्या

.सागर

.नीलेश

.अनामिका

.संयम

.अनुष्ठा

.सुखमनी

.आदित्य श्रीवास्तव

.ज्योति

.भविष्य

.अब्दुल रहमान

.सूरज शाह

.शाहजान

.जयनिल चक्रवर्ती

.मोहम्मद अम्मार

.सुमल्या

घायलो का चल रहा इलाज

.जयंत गुप्ता

.लवप्रीत कौर

.मोहम्मद आसिफ

.भुवन श्रीवास्तव

.पंकज गोस्वामी

.शैलेंद्र

.अभिषेक

.पंकज जोशी

.गौरव कुमार   

 

राजधानी के अलीगंज सेक्टर डी में हर रोज की तरह आज का भी दिन बेहद सामान्य था, लेकिन दोपहर के दो बजते-बजते जैसे वहां मौजूद लोगों की दुनिया ही पूरी तरह बदल चुकी थी। इसके बाद वहां अगर कुछ बचा था, तो वह सिर्फ चीख-पुकार, गम और कभी न खत्म होने वाला अंतहीन दु:ख था। बताया जा रहा है कि जिस इमारत में यह भीषण आग लगी, उसके भीतर हादसे के वक्त करीब 27 लोग मौजूद थे। आग की लपटें देख अपनी जान बचाने के लिए कई लोगों ने इमारत से बाहर छलांग लगा दी। वहीं, बड़ी संख्या में लोग इमारत के भीतर ही फंसे रह गए, जिन्हें बाहर निकालने की कोशिशें जारी रहीं। दोपहर 1:45 बजे तक सब कुछ सामान्य था, लेकिन उसके बाद उठे धुएं ने सबको दहशत में डाल दिया।

पापा, हम लोग फंस गए हैं… आखिरी कॉल ने झकझोर दिया…..

अग्निकांड के दौरान सामने आई कुछ मार्मिक जानकारियों ने पूरे प्रदेश को भावुक कर दिया। बताया जा रहा है कि आग की लपटों और धुएं के बीच फंसे कई युवाओं ने अपने परिजनों को फोन कर मदद की गुहार लगाई। कुछ युवकों ने अपने माता-पिता से कहा कि पापा, आग लग गई है, हम लोग अंदर फंस गए हैं। इन आखिरी कॉल्स के बाद कई परिवारों का संपर्क अपने बच्चों से टूट गया। घटनास्थल पर पहुंचे परिजनों की चीख-पुकार और बदहवासी ने हादसे की भयावहता को और अधिक दर्दनाक बना दिया।

आग की लपटों के बीच अपनों को ढूंढती पथराई आंखें

यह दर्दनाक हादसा दोपहर के वक्त हुआ, जब नीचे बनी एक दुकान में अचानक शॉट सर्किट से आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और पूरी बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले लिया। जहरीला काला धुआं इतनी तेजी से फैला कि ऊपरी मंजिलों पर मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। दम घुटने लगा, तो बच्चे जान बचाने के लिए बालकनी की तरफ भागे. बाहर खड़े माता-पिता और राहगीर बेबस होकर अपने बच्चों को आग के बीच तड़पते देख रहे थे। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि लोग चाहकर भी अंदर नहीं घुस पा रहे थे। कुछ लोगों और छात्रों ने जब ऊपर से छलांग लगाई, तो नीचे खड़े लोगों के कलेजे फट गए। हर तरफ सिर्फ खून, आंसू और बेबसी का मंजर था

14 फायर टेंडर और डिप्टी सीएम मौके पर, रेस्क्यू के बीच पसरा सन्नाटा

घटना की भयावहता को देखते हुए मौके पर फायर ब्रिगेड की 14 से ज्यादा गाड़ियां बुलाई गईं। हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म की मदद से दमकलकर्मी खिड़िकयों को तोड़कर बच्चों को बाहर निकालने की कोशिश में जुटे रहे। इस हादसे में कई बच्चों के गंभीर रूप से घायल होने और कई लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है, जिसने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया है। फिलहाल 14 से 15 लोगों के मौत की खबर सामने आ रही है लेकिन ये आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। सभी मृतकों की उम्र 24-25 साल बताई जा रही है।

खाकी की बेबस सांत्वना, धमाके, धुआं और अपनों की चीखें

अलीगंज सेक्टर-डी में लोक सेवा भवन के पीछे स्थित मशहूर ‘अलीगंज पेट शॉप’ में लोग अपने पालतू जानवरों का इलाज करा रहे थे। इसके ठीक ऊपर बने एनीमेशन सेंटर में कुछ प्रशिक्षु और गेमिंग जोन में कई लोग व कर्मचारी मौजूद थे। मगर दोपहर 2:00 बजते ही अचानक वहां आग की लपटें, जोरदार धमाके और चारों तरफ काला धुआं फैल गया। बिल्डिंग के अंदर फंसे लोगों के परिवार वाले बाहर खड़े होकर बेबसी में सिर्फ चीख रहे थे।

फायर ब्रिगेड पर लापरवाही का आरोप

जान बचाने के लिए कुछ लोगों ने बिजली के तारों के सहारे लटक कर नीचे आने की कोशिश की। इसी दौरान एक युवक ने सीधे ऊपर से नीचे छलांग लगा दी, जिसकी कमर गेट से टकराई और वह मौके पर ही बेहोश हो गया। करीब आधे घंटे तक मौके पर भारी चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस बेहद संवेदनशील समय के दौरान अग्निशमन दल मौके पर नहीं पहुंच सका।

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ ने संभाला मोर्चा

जब भयानक आग ने पूरी पांच मंजिला बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले लिया, तब जाकर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां वहां पहुंच सकीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर करीब 20 एंबुलेंस के साथ राज्य और केंद्रीय आपदा बल की टीमें भी बुलाई गईं। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 15 शव बाहर निकाले जा चुके थे। एंबुलेंस से लगातार शवों को अस्पताल ले जाने का सिलसिला जारी था।

बेबस मां-बाप का अंतहीन इंतजार

इसी बीच गेमिंग जोन में काम करने वाले शहजाद के पिता बाहर फूट-फूटकर आंसू बहा रहे थे। मौके पर मौजूद एक पुलिसकर्मी उन्हें ढांढस बंधा रहा था कि सबको सुरक्षित निकाल लिया गया है, लेकिन उस पुलिसकर्मी को भी सच पता था। शहजाद तो महज एक उदाहरण था, वहां ऐसे दर्जनों माता-पिता अपने बच्चों की एक झलक पाने के लिए बेबस खड़े थे। किसी अनहोनी की आशंका से उनका कलेजा फटा जा रहा था।

उम्मीद और बेबसी का मंजर

जैसे-जैसे आग शांत हुई और धुआं बढ़ा, वैसे-वैसे अंदर से आने वाली झुलसे हुए मांस की दुर्गंध ने लोगों की आशंकाओं को सच में बदल दिया। अब जिंदगी और मौत के बीच सिर्फ एक धुंधली सी उम्मीद का ही सहारा बचा था। अस्पताल भेजे गए शवों की हालत ऐसी थी कि फिलहाल उनकी शिनाख्त कर पाना बिल्कुल भी संभव नहीं था। अलीगंज के स्थानीय पार्षद पृथ्वी ने बताया कि कम से कम चार परिवार उनके पास अपनों की तलाश में आए हैं, लेकिन वे भी खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।

सवाल जो जवाब मांगते हैं…

क्या राजधानी में संचालित भवनों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की नियमित फायर ऑडिट होती है? मानकों के विपरीत निर्माण करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? लखनऊ विकास प्राधिकरण, नगर निगम और अन्य संबंधित विभागों की जवाबदेही कब तय होगी? हर हादसे के बाद जांच के नाम पर समय बिताने के बजाय दोषियों पर कठोर कार्रवाई कब होगी? अलीगंज अग्निकांड ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है। यदि अब भी जिम्मेदार विभाग नहीं चेते, तो आने वाले समय में ऐसे हादसे फिर किसी परिवार की खुशियां छीन सकते हैं। राजधानी के लोगों को सिर्फ संवेदना नहीं, बल्कि जवाबदेही और न्याय चाहिए।

नियम, कायदे और कानून क्या हैं?

.भारत में किसी भी कमर्शियल या शैक्षणिक संस्थान जैसे कोचिंग सेंटर को चलाने के लिए कड़े नियम हैं, लेकिन जमीन पर इनका पालन न होना ही हादसों को न्योता देता है। नेशनल बिल्डिंग कोड के तहत कोचिंग सेंटरों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि दो निकास रखें. किसी भी ऐसी जगह जहां बच्चे पढ़ते हैं, वहां आपातकालीन स्थिति में निकलने के लिए कम से कम दो रास्ते होने जरूरी हैं. सीढि़यां और गलियारे पर्याप्त चौड़े होने चाहिए ताकि भगदड़ न मचे। कम से कम 1.5 से 2 मीटर। फॉल्स सीलिंग और डक्ट्स के अंदर आग को रोकने वाले ‘फायर बैरियर’ होने चाहिए ताकि आग पूरी बिल्डिंग में न फैले।

.इले्ट्रिरकल सेफ्टी नियम का पालन करना भी जरूरी है. हर कनेक्शन में एमसीबी और आरसीसीबी लगा होना चाहिए. जैसे ही करंट सामान्य से अधिक होगा या शॉर्ट सर्किट होगा, ये स्विच अपने आप बिजली काट देते हैं. व्यावसायिक इमारतों को हर साल बिजली विभाग और फायर ब्रिगेड से ‘इले्ट्रिरकल सेफ्टी ऑडिट’ कराना होगा और फायर अनापत्ति प्रमाणपत्र हासिल करना होगा। अगर इनका उल्लंघन हुआ है तो मालिक और प्रबंधन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत गंभीर धाराएं लगती हैं। बिना फायर एनओसी के संस्थान चलाने पर सीलिंग और भारी जुर्माने का प्रावधान है।

हादसे का जिक्र करते हुए भावुक हुए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक

अलीगंज अग्निकांड के बाद घटनास्थल पर पहुंचे उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। मीडिया से बातचीत के दौरान जब उन्होंने हादसे में हुई जनहानि और पीड़ित परिवारों की पीड़ा का जिक्र किया तो वह भावुक हो गए। उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद और हृदयविदारक घटना है। सरकार हर पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और घायलों के इलाज के लिए सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। आग इतनी भीषण थी कि जान बचाने के लिए लगानी पड़ी छलांग, कुछ ने तो बिजली के तार पकड़ कर जान बचाने की कोशिश में लगे रहे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग इतनी तेजी से फैली कि कई युवाओं को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला।

जानलेवा घटनायें दिल को दहलाने वाली: मायावती
बसपा अध्यक्ष मायावती ने भी घटना पर शोक व्यक्त करते हुए ‘एक्स’ पर कहा, कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में आज दोपहर बाद हुई अग्निकाण्ड में अनेक लोगों की मौत तथा और भी कई लोगों के घायल हो जाने की घटना अति-दुखद। उन्होंने आगे कहा, कि इस प्रकार की जानलेवा घटनायें दिल को दहलाने वाली होती हैं तथा कितने ही परिवार की उम्मीदों को बिखेर देती हैं। ऐसी दुखद घटनाओं की रोकथाम के लिये सबको मिलकर सही से काम करने की ज़रूरत है। सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप से काम नहीं चलेगा। आग लगने के समय इमारत के अंदर मौजूद रहे युवकों और युवतियों के रिश्तेदार बताये जा रहे कुछ लोग घटनास्थल के पास खड़े होकर रोते-बिलखते और अधिकारियों से इमारत के अंदर जाने की गुहार लगाते नजर आये।

अग्निकांड में हुई जनहानि अत्यंत हृदयविदारक: केशव

उप मुख्यमंत्री  केशव प्रसाद मौर्य ने जनपद लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुई दुर्भाग्यपूर्ण अग्नि दुर्घटना में जनहानि पर गहरा दु:ख व्यक्त किया है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि अलीगंज, लखनऊ में आग लगने के कारण हुआ हादसा अत्यंत दु:खद एवं पीड़ादायक है। इस दुर्भाग्यपूर्ण अग्नि दुर्घटना में हुई जनहानि अत्यंत हृदयविदारक है। इस हादसे में जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। उन्होंने कहा कि मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों को इस असहनीय दु:ख को सहन करने की शक्ति दें। साथ ही, ईश्वर से घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।

पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है सरकार: खन्ना

वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री तथा जनपद लखनऊ के प्रभारी मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे अत्यंत दु:खद, पीड़ादायक एवं हृदयविदारक घटना बताया है। उन्होंने हादसे में दिवंगत हुए 15 लोगों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोकाकुल परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है। खन्ना ने कहा कि इस दुर्घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। एक साथ इतने लोगों की असमय मृत्यु अत्यंत दुखद है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान देने तथा शोक संतप्त परिवारों को इस असहनीय दु:ख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

रालोद ने जताया शोक
राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय महासचिव अनिल दुबे ने लखनऊ के अलीगंज में हुये हृदय विदारक अग्निकांड में निर्दोष छात्रों की असामयिक मृत्यु के समाचार को अत्यंत पीड़ादायक बताते हुये कहा कि इस अपार दुख की घड़ी में राष्ट्रीय लोकदल की संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति और घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य प्रदान करें। दूबे ने इस घटना पर शोक व्यक्त करने के साथ साथ प्रशासन से जवाबदेही तय करने और भविष्य में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हादसे की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है ताकि आग लगने के वास्तविक कारणों और भवन निर्माण व प्रबंधन की कमियों का पता चल सके।

सपा ने जताया दुख, कहा ईमानदारी से हो जांच

सपा मुखिया अखिलेश यादव ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा कि लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में आग लगने से जिन्होंने अपनी जान गंवाई है, उनके प्रति हमारी श्रद्धांजलि। जिन्होंने अपनों को खोया है, उन शोक संतप्त परिवारों के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं। सरकार घायलों के लिए सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा सुनिश्चित करे। ये एक बेहद दुखद घटना है। इसके पीछे के कारणों की ईमानदारी से जांच हो, बच्चे किसी के घर के भी हो सकते थे। भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों से बचा जा सके, हम सबकी यही कोशिश होनी चाहिए।

Crime Reporter Pioneer Hindi

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