-अंतर्राष्ट्रीय बालश्रम निषेध दिवस के अवसर पर विशेष जन जागरूकता कार्यक्रम संपन्न
पायनियर समाचार सेवा
लखनऊ। श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि प्रदेश सरकार बाल श्रम उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध है। प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना तथा उनके शैक्षिक, बौद्धिक एवं शारीरिक विकास को सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि श्रम विभाग एवं सहयोगी संस्थाओं के संयुक्त प्रयासों से प्रदेश के 15 जिलों को दिसंबर तक बाल श्रममुक्त बनाए जाने की कार्यवाही चल रही है तथा सरकार ने वर्ष 2027 तक पूरे उत्तर प्रदेश को बाल श्रम मुक्त बनाने का संकल्प लिया है।
अंतर्राष्ट्रीय बालश्रम निषेध दिवस के अवसर पर इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान लखनऊ में श्रम एवं सेवा योजन विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा एक विशेष जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उददेश्य बालश्रम उन्मूलन के प्रति जन जागरूकता बढ़ाना तथा बच्चों की शिक्षा सुरक्षा एवं समग्र विकास के अधिकारों के प्रति समाज को संवेदनशील बनाना है। मंत्री ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि वर्ष 2027 तक प्रदेश को बालश्रम मुक्त कर देना है। इसके लिए हरसंभव प्रयास किये जायेंगे, ताकि हमारे देश के भविष्य नौनिहालों का भविष्य उज्ज्वल हो सके।
प्रमुख सचिव, श्रम एवं सेवायोजन, डॉ. एमके शन्मुगा सुन्दरम ने कहा कि आज 141 शहरी वार्डों एवं ग्राम पंचायतों को बाल श्रम मुक्त घोषित किया जा रहा है। उन्होंने झांसी मंडल को विशेष रूप से बधाई दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश को वर्ष 2027 तक बाल श्रम मुक्त बनाने के लक्ष्य के तहत प्रथम चरण में 15 जिलों को दिसंबर 2026 तक बाल श्रम मुक्त किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश में कुल 543 हॉट-स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहां प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से बच्चे कार्यरत पाए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2018-19 में 227, वर्ष 2021-22 में 281 तथा वर्ष 2022-23 में 115 हॉट-स्पॉट को बाल श्रम मुक्त कराया जा चुका है।
श्रम आयुक्त मार्कण्डेय शाही ने कहा कि प्रदेश को बाल श्रम मुक्त घोषित करने के लिए सभी विभागों और हितधारकों को मिलकर कार्य करना होगा। झांसी मंडलायुक्त विमल कुमार दुबे ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार झांसी जनपद के सम्पूर्ण ग्रामीण क्षेत्र को बाल श्रम मुक्त घोषित किया गया।
सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अशोक कुमार द्वारा बाल श्रम उन्मूलन एवं पुनर्वास विषय पर निजामाबाद (आंध्र प्रदेश) मॉडल का प्रस्तुतीकरण किया गया, जिसमें उन्होंने बताया कि किस प्रकार उनके प्रयासों से निजामाबाद को बाल श्रम मुक्त घोषित किया गया। कार्यक्रम में जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा कि कि मैं उत्तर प्रदेश सरकार को वर्ष 2027 तक राज्य को बाल श्रम मुक्त बनाने के संकल्प के लिए हार्दिक बधाई देता हूं। राज्य सरकार के सहयोग से हम उत्तर प्रदेश के 20,000 से अधिक गांवों को ‘सुरक्षित बाल ग्राम’ के रूप में विकसित करेंगे।
इससे पूर्व मुख्य अतिथि द्वारा कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश के उपरांत प्रदेश के 15 जनपदों यथा-बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, फतेहपुर, सिद्धार्थनगर, सोनभद्र, चन्दौली, चित्रकूट, कानपुर नगर, कानपुर देहात, फर्रूखाबाद, औरैया, इटावा, कन्नौज एवं गोंडा की प्रदर्शनी-स्टॉल का भ्रमण किया गया। इसके उपरांत बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों की सफलता की कहानियों पर आधारित वीडियो का प्रदर्शन किया गया, जिसमें बताया गया कि किस प्रकार पूर्व में बाल श्रम में संलग्न बच्चे अब विद्यालयों में अध्ययनरत हैं।
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