तेगापुर गांव का मामला, पीड़िता ने सीएचसी अधीक्षक व पुलिस से की शिकायत
बिना सर्जन के सिजेरियन ऑपरेशन कराने का भी लगाया गंभीर आरोप
पायनियर संवाददाता। हसनगंज, उन्नाव
सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने वाली आशा कार्यकर्ताओं के बीच मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजने को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। कोतवाली हसनगंज क्षेत्र के तेगापुर गांव में एक आशा बहू ने दूसरी आशा कार्यकर्ता पर गर्भवती महिला को बहला-फुसलाकर निजी अस्पताल में भर्ती कराने तथा कथित रूप से कमीशन के लिए ऑपरेशन से प्रसव कराने का आरोप लगाया है। तेगापुर गांव की आशा कार्यकर्ता माया ने सीएचसी अधीक्षक और कोतवाली हसनगंज में दिए शिकायती पत्र में बताया कि वह अपने क्षेत्र की गर्भवती महिला सुमन की पिछले नौ माह से नियमित निगरानी और देखरेख कर रही थीं। उनके अनुसार महिला की सभी आवश्यक स्वास्थ्य जांचें समय पर कराई गई थीं, ताकि उसका सुरक्षित प्रसव सरकारी अस्पताल में कराया जा सके।
शिकायत के अनुसार प्रसव के समय दूसरी आशा कार्यकर्ता चंद्रावती तथा उनकी पुत्री संगीता महिला को हसनगंज स्थित मां शारदा प्राइवेट हॉस्पिटल ले गईं, जहां उसका सिजेरियन ऑपरेशन कर प्रसव कराया गया। माया का आरोप है कि यह कार्य कमीशन प्राप्त करने के उद्देश्य से किया गया। पीड़ित आशा कार्यकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित निजी अस्पताल में ऑपरेशन के लिए अधिकृत सर्जन उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद महिला का सिजेरियन ऑपरेशन किया गया, जिसकी निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की गई है। उन्होंने अस्पताल की चिकित्सीय व्यवस्थाओं और संचालन की भी जांच कर कार्रवाई की मांग की है। माया का कहना है कि क्षेत्र में महीनों तक गर्भवती महिलाओं की निगरानी और देखरेख करने के बाद यदि उन्हें निजी अस्पतालों में भेज दिया जाता है तो इससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के उद्देश्य प्रभावित होते हैं।
जांच के बाद होगी कार्रवाई : अधीक्षक
मामले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हसनगंज के अधीक्षक डॉ. नितिन श्रीवास्तव ने बताया कि आशा कार्यकर्ता द्वारा लिखित शिकायत प्राप्त हुई है। शिकायत की जांच कराई जा रही है। जांच में यदि किसी प्रकार की अनियमितता अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों एवं संस्थान के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।










