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आयुष्मान योजना पर योगी सरकार का बड़ा एक्शन, यूपी के 184 निजी अस्पताल डी-इम्पैनल; अब नहीं मिलेगा कैशलेस इलाज

आयुष्मान योजना पर योगी सरकार का बड़ा एक्शन, यूपी के 184 निजी अस्पताल डी-इम्पैनल; अब नहीं मिलेगा कैशलेस इलाज

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। निर्धारित सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करने वाले 184 निजी अस्पतालों को आयुष्मान भारत योजना से डी-इम्पैनल कर दिया गया है। इन अस्पतालों में अब आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं मिल सकेगी।

प्रदेश सरकार की इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग में भी हड़कंप है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

सख्त मानकों पर हुई अस्पतालों की जांच

डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के मुताबिक, भारत सरकार की ओर से आयुष्मान भारत योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए सुरक्षा और गुणवत्ता से संबंधित मानकों को और सख्त किया गया है। इसके बाद प्रदेश में योजना से संबद्ध सभी अस्पतालों के दस्तावेजों और व्यवस्थाओं का विस्तृत सत्यापन कराया गया।

सत्यापन प्रक्रिया के दौरान अस्पतालों से कई जरूरी दस्तावेज और सुरक्षा संबंधी प्रमाण मांगे गए। इनमें फायर एनओसी, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट समेत मरीजों की सुरक्षा और अस्पताल की व्यवस्थाओं से जुड़े अन्य जरूरी मानक शामिल थे।

मार्च से दिया जा रहा था मौका

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अस्पतालों को मानकों को पूरा करने के लिए मार्च से लगातार जानकारी और अवसर दिए जा रहे थे। संबंधित अस्पतालों को कमियों को दूर करने और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त समय दिया गया।इसके बावजूद निर्धारित अवधि में जिन अस्पतालों ने जरूरी शर्तें पूरी नहीं कीं, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। जांच के दौरान खासतौर पर मरीजों की सुरक्षा से जुड़े मानकों को गंभीरता से देखा गया।फायर एनओसी जैसे जरूरी सुरक्षा मानकों में कमी पाए जाने पर भी अस्पतालों को आयुष्मान योजना के पैनल से बाहर किया गया। सरकार का कहना है कि अस्पतालों में आग जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था होना बेहद जरूरी है।

अब 184 अस्पतालों में नहीं मिलेगा कैशलेस इलाज

डी-इम्पैनल किए गए 184 निजी अस्पतालों में अब आयुष्मान भारत योजना के तहत कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। यानी इन अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड के आधार पर योजना का लाभ लेने वाले मरीजों को पहले की तरह इलाज की सुविधा नहीं मिल सकेगी।हालांकि, आयुष्मान योजना के लाभार्थियों के लिए प्रदेश में बड़ी संख्या में अन्य सूचीबद्ध अस्पताल उपलब्ध हैं। सरकार का जोर ऐसे अस्पतालों को योजना से जोड़ने पर है, जो निर्धारित गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को पूरा करते हों।

मरीजों की सुरक्षा से समझौता नहीं

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने स्पष्ट किया कि सरकार के लिए मरीजों की सुरक्षा और बेहतर इलाज सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनका कहना है कि आयुष्मान भारत जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजना में शामिल अस्पतालों को निर्धारित नियमों और मानकों का पालन करना ही होगा।सरकार का रुख साफ है कि केवल आयुष्मान योजना का हिस्सा बन जाना पर्याप्त नहीं है। अस्पतालों को मरीजों को सुरक्षित वातावरण, बेहतर चिकित्सा व्यवस्था और निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप सेवाएं उपलब्ध करानी होंगी।इस कार्रवाई से निजी अस्पतालों के लिए भी साफ संदेश गया है कि आयुष्मान भारत योजना में बने रहने के लिए सुरक्षा, गुणवत्ता और जरूरी दस्तावेजों से जुड़े मानकों का पालन अनिवार्य है।

 

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