एएमआर से मुकाबले में फार्मासिस्टों की भूमिका अहम

पायनियर समाचार सेवा।लखनऊ
इंटीग्रल विश्वविद्यालय, लखनऊ के फार्मेसी विभाग एवं स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज़ द्वारा 25 सितंबर को केंद्रीय सभागार में विश्व फार्मासिस्ट दिवस मनाया गया। इस वर्ष का विषय “स्वस्थ भविष्य के लिए फार्मासिस्टों को सशक्त बनाना” तथा उप-विषय “स्वस्थ भारत: एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (AMR) से मुकाबला” था। कार्यक्रम में जनस्वास्थ्य को बढ़ावा देने, दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करने तथा एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध की बढ़ती चुनौती से निपटने में फार्मासिस्टों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो. सैयद मिस्बाहुल हसन के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने अतिथियों एवं संकाय सदस्यों का स्वागत किया तथा स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को सुदृढ़ बनाने में फार्मेसी व्यवसाय के महत्व पर प्रकाश डाला। उत्तर प्रदेश सरकार के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA), लखनऊ की सहायक औषधि आयुक्त (ड्रग्स) श्रीमती उर्मिला अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। अपने संबोधन में उन्होंने दवाओं के सुरक्षित, प्रभावी एवं जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करने में फार्मेसी व्यवसाय के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने जनस्वास्थ्य की रक्षा, एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग और अनावश्यक अधिक उपयोग को रोकने में फार्मासिस्टों की भूमिका को रेखांकित किया।
ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स के श्री एस. श्रीवास्तव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में फार्मासिस्टों की बदलती भूमिका पर विचार व्यक्त किए तथा रोगी देखभाल, औषधीय नवाचार और दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने में उनके योगदान को उजागर किया। इस आयोजन ने एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध से निपटने और स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए स्वास्थ्य पेशेवरों, नियामक प्राधिकरणों तथा फार्मास्यूटिकल उद्योग के बीच सहयोग के महत्व को रेखांकित किया। साथ ही, इसमें एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने, एंटीबायोटिक दवाओं के उचित इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने तथा दवा-प्रतिरोधी संक्रमणों के प्रसार को रोकने के लिए जन-जागरूकता बढ़ाने में फार्मासिस्टों की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया गया।
कार्यक्रम के संयोजक प्रो. (डॉ.) तारिक महमूद, विभागाध्यक्ष, फार्मेसी विभाग तथा प्रो. डॉ. जुबैर अख्तर, डीन, फैकल्टी ऑफ फार्मेसी, इंटीग्रल विश्वविद्यालय थे। प्रो. डॉ. कुलदीप सिंह, प्रो. डॉ. वसीम ए. अंसारी तथा डॉ. इरफान अज़ीज़ ने कार्यक्रम के सह-संयोजक के रूप में भूमिका निभाई। कार्यक्रम का समापन भावी फार्मासिस्टों को व्यावसायिक ज्ञान, नैतिक जिम्मेदारी तथा रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा दृष्टिकोण से सशक्त बनाने के नए संकल्प के साथ हुआ, जिससे स्वस्थ भारत के लक्ष्य की दिशा में योगदान दिया जा सके।



