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रोहित शर्मा के भविष्य पर खींचतान, लक्ष्मण से मतभेद के बाद अगरकर अलग

नयी दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा के वनडे भविष्य को लेकर बीसीसीआई और चयन समिति के बीच मतभेद तथा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण के साथ नीतिगत मुद्दों पर बढ़ती असहमति को अजीत अगरकर के मुख्य…

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रोहित शर्मा के भविष्य पर खींचतान, लक्ष्मण से मतभेद के बाद अगरकर अलग
रोहित शर्मा के भविष्य पर खींचतान, लक्ष्मण से मतभेद के बाद अगरकर अलग

नयी दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा के वनडे भविष्य को लेकर बीसीसीआई और चयन समिति के बीच मतभेद तथा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण के साथ नीतिगत मुद्दों पर बढ़ती असहमति को अजीत अगरकर के मुख्य चयनकर्ता पद से अलग होने के घटनाक्रम की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार अगरकर ने बीसीसीआई को अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद पद पर नहीं बने रहने की इच्छा से अवगत कराया है।

अगरकर और बोर्ड के बीच रिश्तों में सबसे अहम मोड़ रोहित के भविष्य को लेकर आया। इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से पहले चयन समिति, टीम प्रबंधन और बीसीसीआई के शीर्ष पदाधिकारियों के बीच रोहित को लेकर चर्चा हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक चयन समिति रोहित को 2027 वनडे विश्व कप की योजना से आगे बढ़ने का संकेत देने के पक्ष में थी, जबकि बीसीसीआई चाहता था कि उनके भविष्य पर जल्दबाजी में फैसला नहीं किया जाए। लॉर्ड्स वनडे के बाद रोहित के संन्यास की अटकलों को बीसीसीआई द्वारा सार्वजनिक रूप से खारिज किए जाने से भी अगरकर के असहज होने की बात सामने आई है।

अगरकर का मानना बताया गया कि यदि 2027 विश्व कप के लिए यशस्वी जायसवाल को तैयार करना है तो उन्हें पर्याप्त वनडे खेलने का अवसर मिलना चाहिए। दूसरी ओर, रोहित के समर्थन में उनका हालिया प्रदर्शन एक प्रमुख तर्क था। यह विवाद चयन समिति और बोर्ड के अधिकार क्षेत्र को लेकर भी सवाल खड़े करता रहा।

इसी दौरान अगरकर और लक्ष्मण के बीच चोटिल खिलाड़ियों के प्रबंधन और भारत ए के कार्यक्रम को लेकर मतभेद की खबरें सामने आईं। भारत ए के मैचों का कार्यक्रम अन्य घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों से टकराने का मुद्दा भी चर्चा में रहा। चोटिल केंद्रीय अनुबंधित खिलाड़ियों की वापसी की समयसीमा और उनकी उपलब्धता को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच असहमति बताई गई।

इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए मुंबई में हुई अहम बैठक में अगरकर के शामिल नहीं होने को भी घटनाक्रम में महत्वपूर्ण माना गया। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने उनका बचाव किया था, लेकिन बोर्ड के भीतर एक वर्ग का मानना था कि ऐसी बैठक में मुख्य चयनकर्ता की मौजूदगी जरूरी थी।

अगरकर की अगुवाई वाली चयन समिति के कार्यकाल में भारत ने दो टी20 विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी जीती। इसके बावजूद उनके भविष्य को लेकर बीसीसीआई में चर्चा जारी रही। 18 सितंबर को बीसीसीआई की सालाना आम बैठक के बाद पदाधिकारियों को चयन समिति और अगरकर के भविष्य पर फैसला लेने के लिए अधिकृत किया गया। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अगरकर ने स्वयं कार्यकाल बढ़ाने के बजाय मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने पर पद छोड़ने की इच्छा जताई है। इसलिए उनके अलग होने की प्रक्रिया में बोर्ड के साथ मतभेदों के साथ-साथ उनका व्यक्तिगत निर्णय भी महत्वपूर्ण पहलू है।