उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को जेवर क्षेत्र के किसानों से संवाद करते हुए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट परियोजना से जुड़ा एक दिलचस्प अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि जब जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई थी, तब कई किसान अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं थे। हालांकि, संवाद और विश्वास के जरिए स्थिति बदली और आज यह परियोजना प्रदेश के विकास की नई पहचान बन चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब राज्य कैबिनेट ने जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रस्ताव को मंजूरी दी, तब अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि 100 दिनों के भीतर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए। लेकिन निर्धारित समय के भीतर काम आगे नहीं बढ़ पाया। इसके बाद उन्होंने स्वयं क्षेत्र का दौरा किया और किसानों के साथ बैठक की।
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि उस बैठक में करीब 100 किसान मौजूद थे। जब उन्होंने किसानों से एयरपोर्ट निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराने की बात कही तो अधिकांश किसानों ने साफ तौर पर कहा कि वे अपनी जमीन नहीं देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय उन्होंने किसानों से कहा कि वह उन्हें सोचने के लिए एक घंटे का समय दे रहे हैं, क्योंकि यह परियोजना पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है।
उन्होंने किसानों से कहा था कि समय हर किसी के जीवन में अवसर लेकर आता है। जो लोग अवसर को पहचानते हैं, वे आगे बढ़ते हैं, जबकि जो उसे गंवा देते हैं, वे पीछे रह जाते हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार किसानों ने उनकी बात पर भरोसा जताया और इसके बाद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ी।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसानों के सहयोग और विश्वास का ही परिणाम है कि आज 13 हजार एकड़ से अधिक भूमि पर एयरपोर्ट परियोजना का पहला चरण लगभग पूरा हो चुका है। यह परियोजना न केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाली साबित होगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विकास चार चरणों में किया जाएगा। पहला चरण पूरा होने की ओर है, जबकि आने वाले वर्षों में इसके अन्य चरण भी विकसित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक एयरपोर्ट नहीं बल्कि रोजगार, निवेश और औद्योगिक विकास का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है।
योगी आदित्यनाथ ने एयरपोर्ट से किसानों को मिलने वाले लाभों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जेवर एयरपोर्ट देश का पहला बड़ा कार्गो हब और एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इससे प्रदेश के किसानों को अपनी उपज देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचाने में बड़ी सुविधा मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि आज किसान आम को स्थानीय बाजार में लगभग 50 रुपये प्रति किलो की दर से बेचते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 800 से 1000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है। यदि परिवहन और कार्गो लागत को भी जोड़ दिया जाए, तब भी किसानों को प्रति किलो करीब 600 रुपये तक का लाभ मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद कृषि उत्पादों के निर्यात को नई गति मिलेगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि जेवर एयरपोर्ट आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश, व्यापार और रोजगार का प्रमुख केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।










