लखनऊ। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद की अध्यक्षता में शुक्रवार को 1, विक्रमादित्य मार्ग, लखनऊ में मंडल के पार्टी पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों, संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और जनसंपर्क अभियान को प्रभावी बनाने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. संजय निषाद ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव संगठन की एकजुटता, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और जनता के विश्वास का चुनाव होगा। उन्होंने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत एवं सक्रिय बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और निषाद पार्टी की नीतियों को मछुआ समाज सहित आम जनता तक पहुंचाने का काम करें।

उन्होंने कहा कि संगठन की सबसे बड़ी ताकत उसके समर्पित कार्यकर्ता हैं। प्रत्येक पदाधिकारी अपने क्षेत्र में नियमित जनसंपर्क अभियान चलाए, नए कार्यकर्ताओं को संगठन से जोड़े और बूथ व सेक्टर स्तर की संगठनात्मक संरचना को मजबूत करे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अनुशासन, पूर्ण समर्पण और टीम भावना के साथ काम करने की अपील की। बैठक में सदस्यता अभियान, बूथ सशक्तिकरण, जनसंपर्क कार्यक्रमों और आगामी संगठनात्मक रणनीति पर भी चर्चा हुई। पदाधिकारियों ने आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को मजबूत स्थिति में पहुंचाने और बेहतर प्रदर्शन का संकल्प लिया।
विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतू जनजाति आयोग के गठन का स्वागत
डॉ. संजय निषाद ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा **विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतू जनजाति आयोग** के गठन के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति निषाद समाज और संबंधित समुदायों की ओर से आभार व्यक्त किया।
डॉ. निषाद ने कहा कि विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतू समुदायों को सम्मान और अधिकार दिलाने का संघर्ष दशकों पुराना है। उन्होंने दावा किया कि इन समुदायों के सामाजिक, संवैधानिक और आर्थिक अधिकारों के लिए वह लंबे समय से आवाज उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतू समुदायों की करीब 193 जातियां निवास करती हैं। उनके अनुसार, अंग्रेजी शासन के दौरान इन समुदायों पर क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट जैसा कानून लागू किया गया था, जिसके चलते उन्हें लंबे समय तक सामाजिक उपेक्षा और अन्याय का सामना करना पड़ा।
डॉ. निषाद ने कहा कि निषाद, केवट, मल्लाह, बिंद, कहार, कश्यप, धीवर, धीमर और रैकवार सहित मछुआ समाज की कई उपजातियां भी ऐतिहासिक रूप से इन परिस्थितियों से प्रभावित रही हैं। उन्होंने कहा कि इन समुदायों ने देश की स्वतंत्रता और राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया, लेकिन लंबे समय तक उन्हें उनके अधिकार और सम्मान से वंचित रखा गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आयोग का गठन इन समुदायों के सम्मान, अधिकार और समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक रूप से पिछड़े समुदायों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी।
डॉ. संजय निषाद ने विश्वास जताया कि आयोग विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतू समाज की समस्याओं के समाधान और उनके सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए प्रभावी भूमिका निभाएगा।










