अनिल कुमार। पायनियर संवाददाता। घाटमपुर
कस्बा स्थित प्राचीन माता कुष्मांडा देवी मंदिर के दूसरे तालाब में लगभग 25 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर पानी भर गया है। तालाब में जल देखकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और मंदिर परिसर में “जय माता दी” के जयकारे गूंज उठे। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले मंदिर परिसर में दोनों तालाब एक हुआ करते थे, लेकिन तीन दशक पूर्व आस्था केन्द्र वाले इस सरोवर को दो भागों में बांट दिया गया था, बताते हैं पश्चिम दिशा का तालाब नगर पालिका परिषद के कब्जे में हो गया जबकि पूर्व दिशा का दूसरा तालाब बीते ढाई दशकों से सूखा पड़ा था। देखरेख के अभाव में तालाब अपना अस्तित्व खोता जा रहा था। बुजुर्ग श्रद्धालु बताते हैं कि करीब 30 साल पहले तक इस तालाब में साल भर पानी रहता था और श्रद्धालु यहां स्नान कर माता के दर्शन करते व चढ़ाया गया जल नेत्र रोग से पीड़ित लोग आंखों में दवा के रुप में डालते थे, तालाब के पुनर्जीवन का श्रेय क्षेत्रीय विधायक की सक्रियता को दिया जा रहा है। मंदिर परिसर में हाल ही में लगवाए गए दूसरे ट्यूबवेल से तालाब में पानी छोड़ा गया, जिसके बाद यह फिर से लबालब हो गया। पानी भरते ही मंदिर की रौनक लौट आई और लोगों को पुराने कुष्मांडा देवी मंदिर के वैभव की याद ताजा हो गई। श्रद्धालुओं को अब उम्मीद है कि मंदिर के बगल में बने जनाना घाट को भी जल्द व्यवस्थित किया जाएगा। नगर पालिका द्वारा जनाना घाट पर महिलाओं के स्नान आदि की समुचित व्यवस्था करने की योजना है, जिससे माताओं-बहनों को पूजा से पहले स्नान में सुविधा हो सके। तालाब में पानी भरने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचे। लोगों ने विधायक एवं मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। श्रद्धालुओं का कहना है कि माता के मंदिर का यह तालाब धार्मिक आस्था के साथ-साथ घाटमपुर की ऐतिहासिक धरोहर भी है।