पायनियर समाचार सेवा। फरीदाबाद
जेनरेशन जेड की बदलती अपेक्षाओं के अनुरूप विश्वविद्यालयों को अपनी शिक्षा व्यवस्था में बदलाव करना होगा। युवाओं को केवल ज्ञान और कौशल देने के बजाय उन्हें संस्कार, सही दिशा और राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार करना भी उच्च शिक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यह विचार मानव रचना अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान एवं अध्ययन संस्थान में आयोजित कुलपतियों के सम्मेलन 2026 में सामने आए।
सम्मेलन का आयोजन दृष्टि से वास्तविकता : भारतीय विश्वविद्यालय संस्थापकों की प्रेरक कहानियां पुस्तक के विमोचन के अवसर पर किया गया। पुस्तक के सह-लेखक प्रोफेसर भूषण पटवर्धन और डॉ. पंकज मित्तल हैं। इसमें देश के 20 विश्वविद्यालय संस्थापकों की यात्राओं, चुनौतियों, निर्णयों और संस्थानों के निर्माण की कहानी शामिल है।
आचार्य बालकृष्ण, कुलाधिपति, पतंजलि विश्वविद्यालय ने कहा कि जेनरेशन जेड को लेकर एक जैसा दृष्टिकोण नहीं अपनाया जा सकता। देश के युवा प्रतिभा और ऊर्जा से भरपूर हैं। आवश्यकता उन्हें सही दिशा और अवसर देने की है, ताकि उनकी क्षमता को राष्ट्र निर्माण से जोड़ा जा सके।
प्रोफेसर भूषण पटवर्धन ने कहा कि विश्वविद्यालयों की सफलता केवल उनकी स्थापना से नहीं, बल्कि समय के साथ अपनी पहचान और प्रासंगिकता बनाए रखने से तय होती है। दूरदृष्टि, निरंतर प्रयास और चुनौतियों का सामना करने की क्षमता संस्थानों को मजबूत बनाती है।
डॉ. पंकज मित्तल, महासचिव, भारतीय विश्वविद्यालय संघ ने कहा कि उच्च शिक्षा में निजी संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। मजबूत विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए स्पष्ट उद्देश्य और नेतृत्व, शिक्षकों, विद्यार्थियों तथा कर्मचारियों के सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
डॉ. प्रशांत भल्ला, अध्यक्ष, मानव रचना शैक्षणिक संस्थान ने कहा कि बदलती तकनीक, रोजगार और कौशल की आवश्यकताओं के अनुरूप विश्वविद्यालयों को निरंतर बदलाव अपनाना होगा।
डॉ. पी.के. गुप्ता, कुलाधिपति, शारदा विश्वविद्यालय ने भी शिक्षा में विविधता, नवाचार और बदलती सीखने की पद्धतियों के अनुरूप संस्थानों को विकसित करने पर जोर दिया।
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