लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनाए रखने और “प्रेस” नाम के कथित दुरुपयोग पर रोक लगाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति (पुनर्गठित) ने गुरुवार को राजधानी लखनऊ के हजरतगंज से प्रदेशव्यापी अभियान की शुरुआत की। समिति के संयोजक प्रभात कुमार त्रिपाठी के नेतृत्व में शुरू किए गए इस अभियान के दौरान प्रेस लिखे वाहनों और पत्रकार पहचान-पत्रों की जांच की गई।समिति का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य वास्तविक पत्रकारों को परेशान करना नहीं, बल्कि फर्जी पत्रकारों, फर्जी प्रेस पहचान-पत्रों और प्रेस लिखे वाहनों के कथित दुरुपयोग पर प्रभावी रोक लगाना है।
हजरतगंज चौराहे से हुई अभियान की शुरुआत
गुरुवार सुबह करीब 10 बजे हजरतगंज चौराहे पर अभियान का शुभारंभ किया गया। अभियान के दौरान यातायात पुलिस और स्थानीय पुलिस प्रशासन ने सहयोग करते हुए वाहनों की जांच कराई। इस दौरान यातायात पुलिस अधीक्षक रवीना त्यागी, एसीपी ट्रैफिक प्रदीप कुमार यादव, टीआई शैलेश पांडे, टीएसआई वीरेंद्र प्रताप सिंह तथा हजरतगंज इंस्पेक्टर विक्रम सिंह अपनी टीम के साथ मौजूद रहे।
समिति ने पुलिस प्रशासन के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि प्रशासन के सहयोग से अभियान शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
करीब 45 वाहनों की जांच, 12 संदिग्ध वाहन चिन्हित
अभियान के दौरान प्रेस लिखे लगभग 45 वाहनों की जांच की गई। समिति के अनुसार, प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों से जुड़े पत्रकारों ने अपने वैध पहचान-पत्र दिखाकर जांच में पूरा सहयोग किया।
समिति का दावा है कि जांच के दौरान 12 ऐसे वाहन चिन्हित किए गए, जिन पर अनधिकृत रूप से “प्रेस” लिखा हुआ था। समिति के अनुसार, इन वाहनों का संबंध समाचार संस्थानों से नहीं पाया गया। कुछ मामलों में वाहनों का उपयोग निजी कार्यों या अन्य गतिविधियों के लिए किए जाने की बात भी सामने आई।
समिति के प्रतिनिधियों ने संबंधित लोगों को भविष्य में बिना वैध अनुमति “प्रेस” शब्द का उपयोग न करने की सलाह दी। साथ ही वैध पत्रकारों को सहयोग के लिए गुलाब का फूल देकर सम्मानित भी किया गया।
पत्रकारिता की गरिमा बनाए रखने पर जोर
समिति के अध्यक्ष विक्रम राव और महासचिव ज्ञानेश पाठक ने अभियान की सफलता पर पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए ऐसे अभियान समय-समय पर चलाए जाते रहेंगे।
समिति के संयोजक प्रभात कुमार त्रिपाठी ने कहा कि अभियान पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ चलाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी वास्तविक पत्रकार को असुविधा पहुंचाना समिति का उद्देश्य नहीं है। मुख्य लक्ष्य केवल उन लोगों पर रोक लगाना है जो कथित रूप से प्रेस की पहचान का दुरुपयोग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसकी विश्वसनीयता बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि कोई व्यक्ति फर्जी पहचान-पत्र या प्रेस लिखे वाहन का दुरुपयोग करता है, तो इससे वास्तविक पत्रकारों की छवि भी प्रभावित होती है।
प्रदेशभर में जारी रहेगा अभियान
समिति ने बताया कि लखनऊ में अभियान की शुरुआत के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में भी चलाया जाएगा। इसके लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस के सहयोग से आगे भी जांच अभियान आयोजित किए जाएंगे।
इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के अलावा विभिन्न जिलों से आए पत्रकार भी मौजूद रहे। समिति ने सभी मीडिया संस्थानों और पत्रकारों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि पत्रकारिता की गरिमा और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।










