संभावनाशील एवं भविष्य की सब्जी फसलों को मुख्यधारा में समावेशन, पोषण एवं आर्थिक सुरक्षा को बढ़ावा देने की पहल

पायनियर । वाराणसी
आईसीएआर-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी द्वारा संभावनाशील एवं भविष्य की सब्जी फसलों को मुख्यधारा में समावेशन: उत्पादन तकनीक, बीज प्रणाली एवं बाजार संपर्क” विषय पर आयोजित 10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का बुधवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 21 से 30 सितंबर, 2026 तक आयोजित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों में अवसर सब्जी फसलों के पोषण, औषधीय, आर्थिक एवं व्यावसायिक महत्व के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना तथा उनकी क्षमता का विकास करना था। प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के विभिन्न भागों से शिक्षक, वैज्ञानिक, विषय वस्तु विशेषज्ञ तथा अन्य प्रतिभागियों ने भाग लिया।
समापन समारोह में डॉ. ए. बी. राय, पूर्व प्रमुख, सब्जी संरक्षण प्रभाग, आईसीएआर-आईआईवीआर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने संभावनाशील एवं भविष्य की सब्जी फसलों पर व्यवस्थित एवं समन्वित अनुसंधान किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया और इन्हें भविष्य की पोषण सुरक्षा एवं आर्थिक समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण फसलें बताया। डॉ. राय ने देशभर में उपलब्ध संभावनाशील एवं भविष्य की सब्जी फसलों के व्यवस्थित संग्रह, लक्षण-वर्णन, मूल्यांकन एवं दस्तावेजीकरण के लिए एक राष्ट्रीय नेटवर्क कार्यक्रम विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने इन फसलों को किसानों द्वारा व्यापक रूप से अपनाने के लिए मानकीकृत उत्पादन तकनीकों एवं समग्र पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज के विकास की आवश्यकता पर भी बल दिया। डॉ. राजेश कुमार, निदेशक, ने संभावनाशील एवं भविष्य की सब्जी फसलों की अप्रयुक्त क्षमता का पता लगाने एवं उसका समुचित उपयोग करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से जैविक एवं अजैविक तनावों के प्रति अनुकूलन क्षमता, पोषण एवं औषधीय गुणों, जलवायु अनुकूलता तथा व्यावसायिक विस्तार की संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने इन फसलों को कृषि विविधीकरण के एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में बढ़ावा देने तथा पोषण एवं आर्थिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का नेतृत्व डॉ. राकेश कुमार दुबे, प्रधान वैज्ञानिक एवं कार्यक्रम निदेशक ने किया, जबकि इसका समन्वय संस्थान के वैज्ञानिकों डॉ. विकास सिंह, डॉ. ज्योति देवी एवं डॉ. केशव के. गौतम द्वारा किया गया। डॉ. राकेश कुमार दुबे ने कहा कि संभावनाशील एवं भविष्य की सब्जी फसलों को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए एक समेकित एवं बहुआयामी दृष्टिकोण आवश्यक है, जिसमें आनुवंशिक संसाधनों का संरक्षण, फसल सुधार, उत्पादन तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज प्रणाली, मूल्य संवर्धन, बाजार संपर्क तथा उपभोक्ता जागरूकता को शामिल किया जाना चाहिए।
10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को विशेषज्ञों के साथ संवाद करने तथा संभावनाशील एवं भविष्य की सब्जी फसलों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी एवं व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने का अवसर मिला। डॉ. दुबे ने बताया कि संस्थान द्वारा संभावनाशील एवं भविष्य की सब्जी फसलों की 15 से अधिक किस्में विकसित की जा चुकी हैं।



