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बलिया की ग्राम प्रधान से दिल्ली के राष्ट्रीय मंच तक पहुंचीं स्मृति सिंह, ‘पंचायत से संसद’ में महिला नेतृत्व की उठाई आवाज

नई दिल्ली/बलिया: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर पंचायत की जिम्मेदारी संभालने वाली स्मृति सिंह इन दिनों चर्चा में हैं। रतसड़ कलां की ग्राम प्रधान स्मृति सिंह ने नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित Women Leaders…

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बलिया की ग्राम प्रधान से दिल्ली के राष्ट्रीय मंच तक पहुंचीं स्मृति सिंह, ‘पंचायत से संसद’ में महिला नेतृत्व की उठाई आवाज

नई दिल्ली/बलिया: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर पंचायत की जिम्मेदारी संभालने वाली स्मृति सिंह इन दिनों चर्चा में हैं। रतसड़ कलां की ग्राम प्रधान स्मृति सिंह ने नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित Women Leaders Conclave में ‘Panchayat to Parliament’ विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं के नेतृत्व, शिक्षा, स्वावलंबन और निर्णय लेने की क्षमता को लेकर अपनी बात मजबूती से सामने रखी।

पंचायत से राष्ट्रीय मंच तक का सफर

ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ीं स्मृति सिंह ने उच्च शिक्षा हासिल की और पंचायत स्तर से सार्वजनिक जीवन में कदम रखा। ग्राम प्रधान बनने के बाद उनकी सामाजिक और सार्वजनिक सक्रियता बढ़ी। उनका कहना है कि ग्रामीण महिलाओं, बेटियों और बच्चों की समस्याओं को केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें बड़े मंचों पर भी मजबूती से उठाया जाना चाहिए।

दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में उन्होंने बताया कि पंचायत ग्रामीण महिलाओं के लिए नेतृत्व की पहली पाठशाला हो सकती है। उनके मुताबिक, अगर किसी महिला को गांव में नेतृत्व का अवसर मिलता है और वह जनता का भरोसा जीतती है, तो उसके लिए आगे चलकर विधानसभा और संसद तक पहुंचने की संभावनाएं भी खुल सकती हैं।

माता-पिता के निधन के बाद शुरू हुई राजनीतिक यात्रा

स्मृति सिंह ने अपनी निजी जिंदगी के संघर्ष को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में उन्होंने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया था। यह उनके जीवन का बेहद कठिन दौर था। इसी समय उनकी राजनीतिक यात्रा ने भी आकार लेना शुरू किया।

उन्होंने बताया कि उनके पिता की इच्छा थी कि उनकी पहचान अपनी बेटी के नाम से हो, न कि बेटी की पहचान केवल पिता के नाम से। स्मृति सिंह का कहना है कि पिता की यह सोच उनके लिए आज भी प्रेरणा का स्रोत है।

3000 वोटों से जीत का दावा

स्मृति सिंह के मुताबिक, उन्होंने ग्राम प्रधान का चुनाव करीब 3000 वोटों के अंतर से जीता था। वह इसे ग्रामीण राजनीति में महिलाओं की बढ़ती स्वीकार्यता का उदाहरण मानती हैं। उनका कहना है कि पंचायत भवन केवल प्रशासनिक कामकाज की जगह नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए राजनीतिक और सामाजिक नेतृत्व सीखने का मंच भी बन सकता है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को सिर्फ सरकारी योजनाओं की लाभार्थी बनकर नहीं रहना चाहिए। उन्हें शिक्षित, स्वावलंबी और निर्णय लेने वाली नेतृत्वकर्ता बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

राजनीति में महिलाओं के सामने बड़ी चुनौती

स्मृति सिंह ने राजनीति में महिलाओं के सामने मौजूद पितृसत्तात्मक सोच को भी बड़ी चुनौती बताया। उनका कहना है कि लंबे समय तक राजनीतिक विरासत में बेटों को प्राथमिकता मिलती रही है, जबकि बेटियों और महिलाओं को बराबर अवसर नहीं मिले।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपनी आवाज खुद उठानी होगी। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं यदि शिक्षा और आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं तो वे न सिर्फ अपने परिवार बल्कि समाज और राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

स्मृति सिंह का ‘Panchayat to Parliament’ संदेश इसी सोच पर आधारित है कि गांव की महिला नेतृत्वकर्ता बने, अपनी समस्याओं को खुद सामने रखे और जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय मंच तक अपनी आवाज पहुंचाए। बलिया से दिल्ली तक उनका सफर ग्रामीण महिला नेतृत्व की संभावनाओं को सामने लाने वाली कहानी के तौर पर देखा जा रहा है।

लेखक

Rashmi Singh

रश्मि सिंह मास कम्युनिकेशन में स्नातकोत्तर हैं और मीडिया एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ग्राउंड रिपोर्टिंग और कंटेंट लेखन से की तथा समय के साथ देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों और समाचार चैनलों में कार्य किया। राजनीति, समसामयिक घटनाक्रम, उत्तर प्रदेश की खबरों, सामाजिक मुद्दों और मनोरंजन जगत की रिपोर्टिंग एवं विश्लेषण में उन्हें विशेष अनुभव प्राप्त है। डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों क्षेत्रों में काम करते हुए उन्होंने तथ्यपरक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता को अपनी पहचान बनाया है।

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