साजिश नाकाम: यूपी एटीएस ने चार आरोपियों को किया गिरफ्तार

- पाकिस्तानी हैंडलर के इशारे पर पुलिस या सैन्यकर्मी की हत्या की थी योजना
- पाकिस्तान से भेजे गए थे हथियार और कारतूस, टारगेट किलिंग के बाद नेपाल भागने का मिला था निर्देश
- हत्या का वीडियो बनाकर भेजने के एवज में तीन लाख रुपए देने का था वादा
पायनियर समाचार सेवा
लखनऊ। यूपी एटीएसने राजधानी में आतंकी साजिश को नाकाम करते हुए प्रतिबंधित शहजाद भट्टी नेटवर्क (एसबीएन) से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार किया है। एटीएसके मुताबिक, आरोपी पाकिस्तानी हैंडलर राना भाईके इशारे पर लखनऊ में किसी पुलिसकर्मी या सैन्यकर्मी की हत्या करने की फिराक में थे। साथ ही आरोपीयों के कब्जे से एक पिस्टल और 20 कारतूस बरामद किए है। एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) अमिताभ यश ने बताया कि प्रतिबंधित संगठन शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार करने तथा एक बाल अपचारी को पुलिस निगरानी में लेने में यूपी एटीएस को महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि को एटीएस को सूचना मिली थी कि प्रतिबंधित शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े पंजाब के कुछ युवक भारत में आतंक फैलाने और देश की संप्रभुता, एकता एवं अखंडता को नुकसान पहुंचाने के इरादे से किसी पुलिस या सैन्यकर्मी को निशाना बनाने की योजना बना रहे हैं।
सूचना के आधार पर जांच और निगरानी के बाद एटीएसने 30 अक्टूबर को लखनऊ से चारों को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से एक पिस्टल और 20 कारतूस बरामद किए गए। इसके अलावा गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गगन दीप सिंह (26)निवासी मेहता पिण्ड, थाना मेहता चौक, अमृतसरपंजाब,रजत कुमार (19)निवासी मोहल्ला हिम्मपुर, थाना गढ़वाली गेट, अमृतसरपंजाब, क्रिश (21)निवासी डेरा बाबा, हिम्मत पखोके, जनपद गुरदासपुर, पंजाब और एक बाल अपचारी शामिल है। जहां एटीएस की पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि वे पाकिस्तान में बैठे राना भाई के लिए काम करते थे।
राना भाई ने उन्हें लखनऊ जाकर किसी आर्मी या पुलिसकर्मी की हत्या करने और वारदात का वीडियो बनाकर उसे भेजने का निर्देश दिया था। इस काम को अंजाम देने के बाद आरोपियों को तीन लाख रुपए देने का वादा किया गया था। इसके अलावा बताया कि 27 अक्टूबर को पंजाब के अमृतसर से दिल्ली होते हुए 29 अक्टूबर की रात करीब 12 बजे लखनऊ पहुंचे थे। यात्रा के लिए पाकिस्तानी हैंडलर ने उन्हें 2,585 रुपए भेजे थे। लखनऊ पहुंचने के बाद आरोपियों ने हैंडलर के निर्देश पर रेलवे स्टेशन का वीडियो बनाकर उसे भेजा था।
एटीएसके मुताबिक, आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि राना भाई ने उन्हें जानकारी दी थी कि हथियार और कारतूस पाकिस्तान से भेजे गए हैं। लखनऊ में उसका एक स्थानीय सहयोगी उन्हें असलहा और कारतूस उपलब्ध कराएगा। इसके बाद लखनऊ में हैंडलर के एक व्यक्ति ने उन्हें पिस्टल और कारतूस सौंपे। साथ ही आरोपियों को खर्चे के लिए दो दिनों में दो किस्तों में करीब 2,500 रुपए भी भेजे गए थे। वारदात को अंजाम देने के बाद पुलिस से बचने के लिए नेपाल भागने और वहां मौज-मस्ती करने की योजना बताई गई थी।
एटीएस की प्रारंभिक जांच में आरोपियों के मोबाइल फोन में वर्चुअल नंबर से संचालित व्हाट्सएप अकाउंट के जरिए विदेशी नंबरों पर बातचीत के साक्ष्य मिले हैं। मोबाइल फोन के प्राथमिक परीक्षण में कई संदिग्ध चैट, वीडियो और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की रेकी से संबंधित सामग्री भी मिली है। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने संवेदनशील प्रतिष्ठानों की लोकेशन और अन्य जानकारियां पाकिस्तानी हैंडलर को भेजी थीं। इस मामले में थाना एटीएस, लखनऊ में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की गई है। इसके अलावा यूपी एटीएस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जांच शुरु कर दी है।



