आरटीसी योजना से ट्रैफिक जाम से राहत

परिमाणात्मक विश्लेषण के आधार पर लक्षित एवं त्वरित सुधारात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही

पायनियर समाचार सेवा

लखनऊ। आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं रियल-टाइम डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करते हुए प्रदेश के प्रमुख शहरों में यातायात प्रबंधन को एक नई दिशा मिल रही है। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन तथा अपर पुलिस महानिदेशक, यातायात ए सतीश गणेश के निर्देशन में संचालित यह योजना उत्तर प्रदेश पुलिस ने यातायात प्रबंधन के क्षेत्र में एक अभिनव एवं तकनीक-आधारित पहल आरटीसी का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के संकल्प को साकार करने की दिशा में, जिसके अंतर्गत प्रदेशवासियों को सुरक्षित, सुगम एवं समयबद्ध यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में सम्मिलित है।  पुलिस महानिदेशक ने बताया कि ट्रैफिक एनालिटिक्स प्रणाली है। जिसका उद्देश्य ट्रैफिक जाम की पहचान करना, उसका तत्काल विश्लेषण करना तथा न्यूनतम समय में प्रभावी हस्तक्षेप  कर यातायात को सामान्य बनाना है। आरटीसी योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि उत्तर प्रदेश में पहली बार यातायात जाम का आकलन केवल अनुभव अथवा दृश्य निरीक्षण के आधार पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक एवं परिमाणात्मक  मानकों के आधार पर किया जा रहा है।

प्रत्येक मार्ग के वास्तविक यात्रा समय, औसत यात्रा समय तथा समय विलंब का सतत विश्लेषण कर यातायात जाम को मापनीय मानदंड के रूप में परिभाषित किया गया है। इसी परिमाणात्मक विश्लेषण के आधार पर लक्षित एवं त्वरित सुधारात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। इस प्रणाली में गूगल आधारित वास्तविक समय ट्रैफिक डेटा का प्रत्येक दो घण्टे में ऑटोमैटिक विश्लेषण किया जाता है।

क्या है आरटीसी योजना?

आरटीसी उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा विकसित देश की अपनी तरह की प्रथम एआई-सक्षम, गूगल आधारित रियल-टाइम प्रत्येक चिन्हित मार्ग का सामान्य परिस्थितियों में औसत यात्रा समय  निर्धारित किया गया है। जैसे ही किसी मार्ग पर वास्तविक समय में यात्रा अवधि सामान्य औसत समय से अधिक हो जाती है, गति-अप एआई प्लेटफॉर्म स्वतः उस मार्ग को रेड फ्लैग कर देता है।

आरटीसी योजना ने पारंपरिक जाम लगने के बाद कार्रवाई की व्यवस्था को बदलकर प्रिडिक्टिव एवं रियल-टाइम ट्रैफिक मैनेजमेंट की आधुनिक प्रणाली विकसित की है। अब ट्रैफिक का मूल्यांकन केवल चालान अथवा वाहन संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि आम नागरिक द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचने में लगने वाले वास्तविक यात्रा समय  के आधार पर किया जा रहा है। यह प्रणाली प्रतिदिन हजारों ट्रैफिक डेटा बिंदुओं का विश्लेषण कर अधिकारियों को उन मार्गों की तत्काल सूचना उपलब्ध कराती है जहाँ हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है। आरटीसी योजना ने उत्तर प्रदेश में पारंपरिक यातायात प्रबंधन प्रणाली को आधुनिक डाटा ड्रिवन गवर्नेंस में परिवर्तित किया है। इस प्रणाली से नागरिकों के यात्रा समय में कमी, ईंधन की बचत, अनावश्यक जाम में कमी, प्रदूषण नियंत्रण तथा सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिल रहा है। साथ ही पुलिस संसाधनों का वैज्ञानिक एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो रहा है। इसके आलावा यातायात निदेशालय का उद्देश्य केवल यातायात जाम कम करना नहीं, बल्कि सुरक्षित, स्मार्ट, नागरिक-केंद्रित एवं तकनीक आधारित यातायात व्यवस्था स्थापित करना है। इसी उद्देश्य से आरटीसी मॉडल का चरणबद्ध विस्तार प्रदेश के अन्य शहरों एवं जनपदों में भी किया जा रहा है। जिससे उत्तर प्रदेश एआई आधारित स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान और अधिक सुदृढ़ कर सके।

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