पिंकी बलहारा ने कुराश स्पर्धा में में जीता कांस्य
सेमीफाइनल में उन्हें दक्षिण कोरिया की सुमिन मो के हाथों 0-5 से हार का सामना करना पड़ा।

नागोया। भारत की पिंकी बलहारा ने सोमवार को एशियाई खेलों में महिला 78 किग्रा से कम भार वर्ग की कुराश स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। सेमीफाइनल में उन्हें दक्षिण कोरिया की सुमिन मो के हाथों 0-5 से हार का सामना करना पड़ा।मुकाबले के दौरान पिंकी को ‘डक्की’ यानी पेनल्टी मिली, जबकि मो ने ‘योनबोश’ अंक हासिल किया। सेमीफाइनल में हार के साथ पिंकी का अभियान कांस्य पदक के साथ समाप्त हुआ।
यह एशियाई खेलों में पिंकी का दूसरा पदक है। इससे पहले उन्होंने 2018 जकार्ता एशियाई खेलों में महिलाओं के 52 किग्रा से कम भार वर्ग में रजत पदक जीता था। उस संस्करण में कुराश को पहली बार एशियाई खेलों में शामिल किया गया था।
पिंकी ने इससे पहले क्वार्टर फाइनल में दक्षिण कोरिया की लिम गाराम को 3-0 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी। उन्होंने निर्णायक अंक ‘चाला’ के जरिए हासिल किया। ‘चाला’ तब दिया जाता है जब खिलाड़ी प्रतिद्वंद्वी को जमीन पर गिराता है, लेकिन उस दौरान पूरा नियंत्रण नहीं बना पाता।
प्री-क्वार्टर फाइनल में पिंकी को बाय मिला था। हालांकि, क्वार्टर फाइनल मुकाबले के दौरान उनके दाएं घुटने में चोट लग गई थी। पिंकी ने बताया कि सेमीफाइनल में उनकी प्रतिद्वंद्वी को उनकी चोट के बारे में जानकारी थी और उन्होंने बार-बार उसी घुटने को निशाना बनाया।
पिंकी ने कहा कि चोट के बावजूद उन्होंने आक्रामक खेल जारी रखने की कोशिश की, लेकिन पेनल्टी के कारण उन्हें मुकाबला गंवाना पड़ा। उन्होंने बताया कि 78 किग्रा वर्ग में यह उनका केवल दूसरा मुकाबला था। इससे पहले उन्होंने मई में उज्बेकिस्तान में एशियाई चैंपियनशिप में इस वर्ग में हिस्सा लिया था।
दिल्ली के नेब सराय की रहने वाली 27 वर्षीय पिंकी मुनिरका स्थित बाबा गंगा नाथ जूडो एवं कुराश अकादमी में प्रशिक्षण लेती हैं। उनके मामा और जूडो एवं कुराश कोच समुदंर टोकस इस अकादमी का संचालन करते हैं। पिंकी ने नौ साल की उम्र में जूडो खेलना शुरू किया था।
क्या है कुराश: कुराश मध्य एशिया, खासकर उज्बेकिस्तान में प्राचीन समय से प्रचलित पारंपरिक मार्शल आर्ट है। इसमें खिलाड़ी एक-दूसरे को खड़े होकर किए जाने वाले थ्रो के जरिए जमीन पर गिराने का प्रयास करते हैं। मुकाबले में खिलाड़ी हरे और नीले रंग की जैकेट पहनते हैं।प्रतिद्वंद्वी को पीठ के बल गिराने पर सीधे जीत मिल सकती है, जबकि पेट या बगल के बल गिराने पर अंक दिए जाते हैं। जमीन पर दांव-पेंच, गला दबाने और जोड़ पर पकड़ बनाने जैसी तकनीकें प्रतिबंधित होती हैं।



