नई दिल्ली। दिल्ली के उपराज्यपाल एवं दिल्ली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष तरनजीत सिंह संधू ने बुधवार को दिल्ली मास्टर प्लान-2047 को मंजूरी दे दी। इस योजना का उद्देश्य दिल्ली को आधुनिक, टिकाऊ, हरित और नागरिक सुविधाओं से युक्त महानगर के रूप में विकसित करना है। योजना में आवास, परिवहन, आर्थिक विकास, पर्यावरण संरक्षण, जल प्रबंधन, अपशिष्ट निपटान, बुनियादी ढांचे, विरासत संरक्षण और नागरिक केंद्रित प्रशासन को प्राथमिकता दी गई है।
मास्टर प्लान-2047 को प्रधानमंत्री के विकसित भारत-2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप तैयार किया गया है। योजना में लंदन और पेरिस में अपनाए गए आधुनिक शहरी विकास के विभिन्न सिद्धांतों से प्रेरणा लेते हुए दिल्ली के भविष्य के विस्तार और पुनर्विकास का खाका तैयार किया गया है।
पुराने डीडीए आवासों का होगा पुनर्विकास
मास्टर प्लान-2047 में दिल्ली के पुराने आवासीय क्षेत्रों के पुनर्विकास पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत 50 साल से अधिक पुराने और कमजोर डीडीए आवासीय परिसरों के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव है। पुरानी दो मंजिला डीडीए आवासीय इकाइयों को खाली भूखंड के समान पुनर्विकास अधिकार दिए जाने का प्रावधान किया गया है। इससे जर्जर और पुरानी आवासीय इकाइयों के स्थान पर आधुनिक आवासीय परिसर विकसित किए जा सकेंगे। इससे जमीन का बेहतर उपयोग होने के साथ लोगों को आधुनिक सुविधाओं वाले आवास उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
दिल्ली में विकसित किए जाएंगे नए उपनगर
योजना में दिल्ली के भीतर नए उपनगर विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। इन क्षेत्रों में आवासीय और औद्योगिक गतिविधियों के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचा तैयार किया जाएगा। नए उपनगरों का विकास इस तरह करने की योजना है कि आवास, रोजगार, परिवहन और नागरिक सुविधाएं एक-दूसरे से जुड़ी रहें। इसका उद्देश्य दिल्ली के मौजूदा क्षेत्रों पर बढ़ते जनसंख्या और यातायात के दबाव को कम करना तथा भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप शहर का संतुलित विस्तार करना है।
रिठाला-कुंडली मार्ग से बढ़ेगी संपर्क सुविधा
नरेला उपनगर में रिठाला-कुंडली मेट्रो मार्ग के डिपो के विकास के लिए 19.63 हेक्टेयर भूमि का उपयोग परिवहन संबंधी गतिविधियों के लिए करने की अनुमति दी गई है। इससे मेट्रो की लाल रेखा के विस्तार का मार्ग प्रशस्त होगा।
इस विस्तार से उत्तर-पश्चिम दिल्ली और हरियाणा के बीच संपर्क सुविधा बेहतर होने की उम्मीद है। साथ ही यात्रियों को आवागमन में लगने वाला समय कम होगा और सड़क मार्ग पर निर्भरता घटाने में भी मदद मिल सकती है।
भवन निर्माण की अनुमति प्रक्रिया होगी आसान
मास्टर प्लान के तहत एकीकृत भवन उपविधि-2016 में संशोधन को भी मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य भवन निर्माण से जुड़ी अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाना और अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को कम करना है।
भवन निर्माण की अनुमति के लिए विभिन्न विभागों से अलग-अलग अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की पूर्व शर्त को हटाने का प्रावधान किया गया है। इससे अनुमति प्रक्रिया में लगने वाला समय कम हो सकता है और दिल्ली में योजनाबद्ध निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
लंदन से क्या सीख रहा है दिल्ली?
लंदन की शहरी विकास योजना में शहर के भीतर उपलब्ध जमीन के बेहतर उपयोग और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दी गई है। पुरानी औद्योगिक और बंदरगाह भूमि को पुनर्विकसित कर आवासीय और व्यावसायिक केंद्रों में बदलने के उदाहरण वहां देखने को मिलते हैं।
कैनरी व्हार्फ और डकलैंड्स इसका प्रमुख उदाहरण हैं। कभी बंदरगाह क्षेत्र रहे इन इलाकों को योजनाबद्ध तरीके से विकसित कर महत्वपूर्ण व्यावसायिक केंद्रों में बदला गया। इसके साथ ही लंदन में हरित क्षेत्रों को संरक्षित रखने और नए आवासीय विकास को सार्वजनिक परिवहन से जोड़ने पर जोर दिया जाता है।
दिल्ली मास्टर प्लान-2047 में भी इसी तरह मौजूदा भूमि के बेहतर उपयोग, नए उपनगरों के विकास और परिवहन व्यवस्था को आपस में जोड़ने की दिशा में प्रावधान किए गए हैं।
पेरिस की तर्ज पर नागरिक सुविधाओं पर जोर
पेरिस में शहरी विकास में पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं को विशेष महत्व दिया गया है। वहां ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर जोर है, जिसमें लोगों को घर के आसपास ही शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और मनोरंजन जैसी आवश्यक सुविधाएं मिल सकें।
दिल्ली की नई योजना में भी हरित क्षेत्रों के विस्तार, प्रदूषण नियंत्रण, जल प्रबंधन और अपशिष्ट निपटान जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई है। इसका उद्देश्य राजधानी को अधिक पर्यावरण अनुकूल और रहने योग्य शहर बनाना है।
हरित और टिकाऊ दिल्ली बनाने का लक्ष्य
मास्टर प्लान-2047 में दिल्ली के विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया है। हरित क्षेत्रों का संरक्षण, प्रदूषण में कमी, जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और अपशिष्ट के वैज्ञानिक निपटान को योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
योजना में परिवहन, आवास और रोजगार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की कोशिश की गई है, ताकि दिल्ली का विस्तार अनियोजित तरीके से न हो और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उनके आवासीय क्षेत्रों के आसपास ही उपलब्ध कराई जा सकें।
विश्वस्तरीय महानगर बनाने की तैयारी
दिल्ली मास्टर प्लान-2047 को राजधानी के दीर्घकालिक विकास की आधारभूत योजना के रूप में देखा जा रहा है। पुराने आवासीय क्षेत्रों का पुनर्विकास, नए उपनगरों का निर्माण, मेट्रो संपर्क का विस्तार, भवन अनुमति प्रक्रिया का सरलीकरण और पर्यावरण संरक्षण जैसे प्रावधानों के माध्यम से दिल्ली को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
यदि योजना के प्रावधानों को निर्धारित समयसीमा और प्रभावी समन्वय के साथ लागू किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में दिल्ली के आवास, परिवहन, रोजगार और नागरिक सुविधाओं के ढांचे में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।