नारद को मिला वानर रूप, अहंकार का हुआ अंत - तिकुनिया में रामजन्म की लीला पर बरसे फूल, जय श्रीराम से गूंजा पंडाल

- तिकुनिया में 76वां रामलीला महोत्सव - कामदेव हारा, नारद का टूटा घमंड, फिर अवध में गूंजी रामजन्म की शहनाई
- देवर्षि नारद को मिला वानर रूप, दशरथ के घर गूंजी किलकारी - दूसरे दिन उमड़ा जनसैलाब
पायनियर संवाददाता । तिकुनियां/निघासन-खीरी
कस्बे में चल रहे श्री जनता रामलीला कमेटी के 76 वें वार्षिक मेला उत्सव के दूसरे दिन सोमवार रात लीला प्रेमियों को भक्ति, अहंकार और मर्यादा का अद्भुत संगम देखने को मिला। अयोध्या से आई प्रसिद्ध ड्रामा पार्टी के कलाकारों ने पहले नारद मोह और फिर प्रभु श्रीराम के जन्म की अलौकिक लीला का ऐसा सजीव मंचन किया कि पूरा पंडाल जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा।
लीला की शुरुआत नारद मोह प्रसंग से हुई। हिमालय की गुफा में देवर्षि नारद कठोर तपस्या में लीन थे। उनकी तपस्या से भयभीत देवराज इंद्र ने कामदेव को तपस्या भंग करने भेजा, लेकिन कामदेव अपने मायाजाल में असफल रहे। इस विजय के बाद नारद जी के मन में अहंकार घर कर गया। अहंकारवश वह एक राजकन्या के स्वयंवर में सुंदर रूप पाने के लिए भगवान विष्णु के पास पहुंचे। भगवान विष्णु ने उनके अहंकार को भांप लिया और मायावश उन्हें वानर रूप दे दिया।
वानर रूप लेकर जब नारद जी स्वयंवर में पहुंचे तो उनका उपहास और अपमान हुआ। क्रोधित होकर उन्होंने भगवान विष्णु को ही श्राप दे दिया। जैसे ही भगवान की माया हटी, नारद जी को अपनी भूल का अहसास हुआ और पश्चाताप करने लगे। तब भगवान विष्णु ने समझाया कि अहंकार ही भक्ति का सबसे बड़ा शत्रु है। इस प्रसंग ने दर्शकों को विनम्रता का गहरा संदेश दिया।
इसके बाद मंच पर अवध की खुशियों का दृश्य छा गया। निःसंतान राजा दशरथ अपने मंत्री सुमंत के सामने वंश आगे न बढ़ने की चिंता व्यक्त करते हैं। सुमंत उन्हें कुलगुरु वशिष्ठ के पास ले जाते हैं। गुरु वशिष्ठ राजा दशरथ को पुत्रेष्ठि यज्ञ कराने का परामर्श देते हैं। विधि-विधान से यज्ञ संपन्न होता है और उसके फलस्वरूप महारानी कौशल्या तेजस्वी पुत्र को जन्म देती हैं। पुत्र जन्म की खबर मिलते ही पूरे अवध में आनंद-उत्सव छा जाता है, ढोल-नगाड़े बज उठते हैं।
इस अवसर पर कमेटी के महामंत्री अजय गर्ग, अतुल तिवारी, हंसराज गर्ग, आरपी मिश्र सहित भारी संख्या में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग मौजूद रहे। देर रात तक दर्शक लीलाओं का आनंद लेते रहे।



