जब नैमिषारण्य स्टेशन पर गूंजा ‘वंदे मातरम्’, सम्मान में झुके सिर, सपनों को मिले पंख

कहीं स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों का सम्मान, कहीं बच्चों की कलाकारी, तो कहीं केक काटकर खुशियां
महोत्सव में दिखी आस्था और अपनत्व की झलक
पायनियर संवाददाता।सीतापुर
सुबह का माहौल, स्टेशन की सजी-धजी इमारत और चारों ओर उत्सव की रौनक। बुधवार को नैमिषारण्य रेलवे स्टेशन पर नजारा किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। शुरुआत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की गूंज से हुई तो सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। इस महोत्सव में कहीं देश के लिए योगदान देने वालों की विरासत को सलाम किया गया, तो कहीं नन्हे विद्यार्थियों के सपनों को सम्मान मिला। अपर मंडल रेल प्रबंधक (इंफ्रा) प्रेम शंकर झा ने स्वतंत्रता सेनानियों स्वर्गीय एसजी वाजपेयी, दीनदयाल, श्याम सुंदर, मुरलीधर और गुलजारीलाल के परिजनों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। रेलवे की वर्षों सेवा करने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों जेएन मिश्रा, उमाशंकर, सतीश चंद्र त्रिपाठी और रामकिशन को भी सम्मान मिला। सम्मान के इन पलों ने समारोह को यादगार बना दिया। महोत्सव की दूसरी तस्वीर स्कूलों से आई, जहां ‘मेरे सपनों का स्टेशन-नैमिषारण्य’ विषय पर निबंध और चित्रकला प्रतियोगिताएं हुईं। लाला राम नारायण सहगल इंटर कॉलेज और अखंड आचार्य स्वामी अच्युत्यानंद इंटर कॉलेज के मेधावी विद्यार्थियों को प्रशस्ति-पत्र और मेडल दिए गए। प्रेम शंकर झा ने बच्चों के साथ केक काटकर उनकी खुशियों में हिस्सा लिया। स्टेशन परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। बड़ी स्क्रीन पर नैमिषारण्य कीपौराणिक और धार्मिक महत्ता दिखाई गई। प्रेम शंकर झा ने कहा कि 88 हजार ऋषियों की तपोभूमि नैमिषारण्य देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। रेलवे का प्रयास है कि यहां आने वाले यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिलें और उनकी यात्रा सुरक्षित व सुविधाजनक बने। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (फ्रेट) विपिन शर्मा ने स्वच्छता, यात्री सहायता और वाणिज्यिक सेवाओं में सुधार की प्रतिबद्धता जताई। समारोह में वरिष्ठ मंडल अभियंता मनतेश कुमार मीना, सहायक मंडल वाणिज्य प्रबंधक अंकित शर्मा, अन्य रेल अधिकारी-कर्मचारी, मीडिया प्रतिनिधि, भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के सदस्य और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।



