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बीके अस्पताल में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत

बीके अस्पताल में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत

परिजनों ने ससुराल पक्ष पर इलाज में देरी का लगाया आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

पायनियर समाचार सेवा। फरीदाबाद

बीके सिविल अस्पताल में प्रसव के दौरान 20 वर्षीय गर्भवती महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत का मामला सामने आया है। घटना के बाद महिला के मायके पक्ष के लोगों ने ससुराल पक्ष पर इलाज कराने में कथित लापरवाही और देरी करने के आरोप लगाए हैं। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की है।

मृतका के छाता निवासी पिता ललित के अनुसार, उनकी 20 वर्षीय बेटी की शादी दो साल पहले सेञ्चटर-56 में हुई थी। उनकी बेटी गर्भवती थी, जिसको करीब आठ दिन पहले प्रसव पीड़ा होने पर बीके सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में जांच के बाद चिकित्सकों ने ऑपरेशन के माध्यम से प्रसव कराने की बात कहते हुए उसे दूसरे अस्पताल के लिए रेफर किया था। आरोप है कि इसके बाद महिला को ससुराल पक्ष के लोग वापस घर लेकर चले गए। मृतका के पिता का आरोप है कि बाद में जब ससुर ने महिला को निजी अस्पताल में भर्ती कराने की बात कही तो उसके पति ने कथित तौर पर इससे इनकार कर दिया। बुधवार को महिला को दोबारा तेज प्रसव पीड़ा हुई, जिसके बाद ससुराल पक्ष के लोग उसे बीके सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां प्रसव के दौरान महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत हो गई।

घटना की जानकारी मिलने के बाद महिला के मायके पक्ष के लोग अस्पताल पहुंचे। परिजनों का कहना है कि यदि महिला को समय रहते निजी अस्पताल अथवा किसी अन्य उच्च चिकित्सा केंद्र में ले जाया जाता और आवश्यक उपचार मिलता तो संभवत: उसकी तथा बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रसव के दौरान महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उपचार में किसी स्तर पर देरी या लापरवाही हुई या नहीं, इसकी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल मामले में महिला और नवजात की मौत के वास्तविक कारण तथा उपचार के दौरान किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही हुई या नहीं, यह जांच का विषय है।

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