मेला गुघाल पहचान और सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा-राज्यमंत्री
मेयर ने बताया सांस्कृतिक धरोहर, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

सहारनपुर। मेला गुघाल का भव्य शुभारंभ मेला द्वार पर रिबन काटकर किया गया। संसदीय कार्य राज्य मंत्री जसवंत सैनी, भाजपा के निवर्तमान प्रदेश मंत्री एवं संभल प्रभारी चंद्रमोहन तथा महापौर डॉ. अजय कुमार ने संयुक्त रूप से मेले का उद्घाटन किया।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए जसवंत सैनी ने कहा कि मेला गुघाल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समृद्ध लोक-संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का उत्सव है। यह सहारनपुर की पहचान और सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा है। चंद्रमोहन ने कहा कि मेले संस्कृति और समाज के बीच सेतु का काम करते हैं। महापौर डॉ. अजय कुमार ने कहा कि मेला हमारी सांस्कृतिक धरोहर है, इसे भव्य बनाने और सुरक्षा के लिए सीसीटीवी सहित व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
समारोह को विधायक देवेंद्र निम, विधायक मुकेश चौधरी, जिला पंचायत अध्यक्ष मांगेराम चौधरी, जिला अध्यक्ष अजीत राणा, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष विजेंद्र कश्यप, एससी एसटी आयोग सदस्य महीपाल बाल्मीकि, महानगर अध्यक्ष शीतल बिश्नोई, पूर्व विधायक जगपाल सिंह ने भी संबोधित किया। पार्षद एवं सह-संयोजक ज्योति अग्रवाल ने मेले का इतिहास बताया और कार्यक्रम का संचालन किया।
इस अवसर पर उपसभापति मयंक गर्ग, आयोजन समिति अध्यक्ष दिग्विजय चौहान, दल नेता राजेंद्र कोहली, पूर्व उपसभापति मुकेश गक्खड़, मेला संयोजक संजय सैनी, सह-संयोजक सीमा कात्यायनी, रेणु शर्मा, अल्पना, पार्षद दीपक रहेजा, के.के बत्रा, राजकुमार शर्मा, इसम सिंह, वीरसैन सिद्धू, नीरज शर्मा, सोपिन पाल, पूर्व विधायक शशीबाला पुंडीर, सुरेंद्र कपिल, रविन्द्र मोल्हू, पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा, हेमंत अरोड़ा, अमित गगनेजा, अभय राणा, साहब सिंह पुण्डीर, दिनेश सेठी, अपर नगरायुक्त सूरज कुमार यादव, मृत्युंजय, मेलाधिकारी जे पी यादव, बिकास धर दुबे सहित निगम अधिकारी मौजूद रहे।
नगर विधायक और पूर्व सांसद की गैरहाजिरी चर्चा का विषय...
सहारनपुर। मेला गुघाल के भव्य शुभारंभ के दौरान नगर विधायक और पूर्व सांसद की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। मेला उद्घाटन में मंत्री, महापौर, विधायकों और भाजपा संगठन के तमाम बड़े नेताओं की मौजूदगी रही, लेकिन शहर के दो प्रमुख जनप्रतिनिधियों के न आने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
कुछ लोग इसे पार्टी की अंदरूनी खींचतान से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ मेले की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते नजर आए। बताया जा रहा है कि मेला आयोजन को लेकर पहले से ही असंतोष की बातें सामने आ रही थीं।
फिलहाल दोनों जनप्रतिनिधियों का कार्यक्रम से दूरी बनाए रखना संशय पैदा कर रहा है। कार्यकर्ताओं में भी इसे लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि इस संबंध में कोई भी नेता खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए जसवंत सैनी ने कहा कि मेला गुघाल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समृद्ध लोक-संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का उत्सव है। यह सहारनपुर की पहचान और सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा है। चंद्रमोहन ने कहा कि मेले संस्कृति और समाज के बीच सेतु का काम करते हैं। महापौर डॉ. अजय कुमार ने कहा कि मेला हमारी सांस्कृतिक धरोहर है, इसे भव्य बनाने और सुरक्षा के लिए सीसीटीवी सहित व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
समारोह को विधायक देवेंद्र निम, विधायक मुकेश चौधरी, जिला पंचायत अध्यक्ष मांगेराम चौधरी, जिला अध्यक्ष अजीत राणा, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष विजेंद्र कश्यप, एससी एसटी आयोग सदस्य महीपाल बाल्मीकि, महानगर अध्यक्ष शीतल बिश्नोई, पूर्व विधायक जगपाल सिंह ने भी संबोधित किया। पार्षद एवं सह-संयोजक ज्योति अग्रवाल ने मेले का इतिहास बताया और कार्यक्रम का संचालन किया।
इस अवसर पर उपसभापति मयंक गर्ग, आयोजन समिति अध्यक्ष दिग्विजय चौहान, दल नेता राजेंद्र कोहली, पूर्व उपसभापति मुकेश गक्खड़, मेला संयोजक संजय सैनी, सह-संयोजक सीमा कात्यायनी, रेणु शर्मा, अल्पना, पार्षद दीपक रहेजा, के.के बत्रा, राजकुमार शर्मा, इसम सिंह, वीरसैन सिद्धू, नीरज शर्मा, सोपिन पाल, पूर्व विधायक शशीबाला पुंडीर, सुरेंद्र कपिल, रविन्द्र मोल्हू, पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा, हेमंत अरोड़ा, अमित गगनेजा, अभय राणा, साहब सिंह पुण्डीर, दिनेश सेठी, अपर नगरायुक्त सूरज कुमार यादव, मृत्युंजय, मेलाधिकारी जे पी यादव, बिकास धर दुबे सहित निगम अधिकारी मौजूद रहे।
नगर विधायक और पूर्व सांसद की गैरहाजिरी चर्चा का विषय...
सहारनपुर। मेला गुघाल के भव्य शुभारंभ के दौरान नगर विधायक और पूर्व सांसद की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। मेला उद्घाटन में मंत्री, महापौर, विधायकों और भाजपा संगठन के तमाम बड़े नेताओं की मौजूदगी रही, लेकिन शहर के दो प्रमुख जनप्रतिनिधियों के न आने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
कुछ लोग इसे पार्टी की अंदरूनी खींचतान से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ मेले की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते नजर आए। बताया जा रहा है कि मेला आयोजन को लेकर पहले से ही असंतोष की बातें सामने आ रही थीं।
फिलहाल दोनों जनप्रतिनिधियों का कार्यक्रम से दूरी बनाए रखना संशय पैदा कर रहा है। कार्यकर्ताओं में भी इसे लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि इस संबंध में कोई भी नेता खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।



