दीर्घकालिक निवेश विकल्पों के लिए नियामकों से बातचीत कर रही है एलआईसी : सीईओ

नयी दिल्ली

भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने कहा है कि उसके एन्यूटी उत्पादों में निवेश लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में कंपनी को अपनी दीर्घकालिक देनदारियों के अनुरूप अधिक लंबी अवधि वाले निवेश माध्यमों या विकल्पों की आवश्यकता है। इस संबंध में सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) और बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) सहित प्रमुख नियामकों के साथ बातचीत कर रही है।

एन्यूटी उत्पाद बीमा कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले ऐसी सेवानिवृत्ति योजना होता है, जो जमा की गई राशि को नियमित और गारंटी वाली आय में बदल देता है। एलआईसी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक आर दुरईस्वामी ने कहा कि एन्यूटी उत्पाद सेवानिवृत्ति कोष को एक गारंटी में बदलते हैं जिसमें लंबे समय तक आय मिलती है। जब कोई इसमें एकमुश्त राशि का निवेश करता है, तो एलआईसी उसे जीवन भर के लिए पेंशन देती है। उन्होंने कहा कि एलआईसी ने अपनी आवश्यकताओं से संबंधित सुझाव बीमा नियामक इरडा के अलावा आरबीआई और सेबी जैसे नियामकों के समक्ष भी रखे हैं। उनके अनुसार, इरडा भी बाजार की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सक्रिय कदम उठा रहा है।

दुरईस्वामी ने कहा कि बीमा कंपनियां दीर्घकालिक कोष जुटाती हैं, जिनका उपयोग अवसंरचना विकास और राष्ट्र निर्माण की परियोजनाओं के वित्तपोषण में होता है। उन्होंने कहा कि नियामकीय ढांचा भी अब इन आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित हो रहा है, जिससे सभी पक्षों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि आज एन्यूटी विकल्पों में ज्यादा निवेश प्रवाह हो रहा है, ऐसे में हमें दीर्घावधि की देनदारियों के लिए लंबी अवधि के निवेश की जरूरत है। उन्होंने बताया कि एलआईसी का एन्यूटी कारोबार काफी बड़ा है और इसकी देनदारियां 30, 40 से 50 वर्षों तक फैली हुई हैं। इसलिए निवेश रणनीति भी इसी दीर्घकालिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर बनाई जाती है।

नए कारोबार के मूल्य (वीएनबी) मार्जिन के बारे में पूछे जाने पर दुरईस्वामी ने कहा कि कंपनी का प्रयास वीएनबी मार्जिन के साथ-साथ सकल वीएनबी और अन्य सभी प्रमुख प्रदर्शन मानकों में निरंतर सुधार बनाए रखने का है। उन्होंने कहा कि कंपनी वर्तमान स्तर को बनाए रखने और उसे आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है, हालांकि पॉलिसीधारकों के हित सर्वोपरि रहेंगे। उन्होंने कहा कि एलआईसी ऐसे उत्पाद उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है, जो ग्राहकों को बेहतर मूल्य प्रदान करें और उनकी जरूरतों के अनुरूप हों। दुरईस्वामी ने यह भी कहा कि एलआईसी अपनी बढ़ती डिजिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए एक वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) इकाई स्थापित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह पहल रणनीतिक निवेश या स्वयं की इकाई स्थापित करने, दोनों माध्यमों से की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि आधुनिकरण और नवोन्मेषण को बढ़ावा देने के लिए एलआईसी पहले से फिनटेक और बीमा प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही है। साथ ही, एक बड़े वित्तीय संस्थान के रूप में कंपनी विभिन्न संगठनों में रणनीतिक निवेश के अवसरों का भी मूल्यांकन करती है। सरकार द्वारा एलआईसी में हिस्सेदारी और कम किए जाने की संभावना पर उन्होंने कहा कि कंपनी इसके लिए शुरू से तैयार है। उन्होंने कहा कि आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की तैयारी के समय से ही एलआईसी ने इस प्रकार की संभावित कार्रवाइयों को ध्यान में रखा था। हालांकि, हिस्सेदारी बिक्री का अंतिम निर्णय सरकार को लेना है।

उन्होंने कहा कि जब भी सरकार समय और हिस्सेदारी बिक्री की मात्रा पर निर्णय लेगी, एलआईसी इस प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए उसके साथ पूर्ण सहयोग करेगी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 में एलआईसी का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम आया था, जिसके तहत सरकार ने 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर लगभग 21,000 करोड़ रुपये जुटाए थे। इससे पहले एलआईसी पूरी तरह केंद्र सरकार के स्वामित्व में थी। दुरईस्वामी ने कहा कि सरकार सूचीबद्ध कंपनियों के लिए निर्धारित न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर ध्यान दे रही है। हालांकि, मौजूदा बाजार अस्थिरता को देखते हुए वह सार्वजनिक निर्गम के लिए उपयुक्त समय का इंतजार कर रही है।

Chief Sub-editor Pioneer Hindi

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