काशी की ज्ञान परंपरा और भारतीय चेतना के संवाहक थे कौशल मिश्र

- कौशल स्मृति व्याख्यानमाला में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा और काशी’ विषय पर हुआ विचार-मंथन, ‘काशी जर्नल ऑफ सोशल साइंसेज’ के नवीन अंक का विमोचन
पायनियर समाचार सेवा।वाराणसी
ज्ञान, संस्कृति, संवेदना और सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पित स्वर्गीय प्रो. कौशल किशोर मिश्र की दूसरी पुण्यतिथि पर शनिवार को मगध भवन, नगवा, वाराणसी में ‘कौशल स्मृति व्याख्यानमाला’ का आयोजन किया गया। अनिल कुमार मिश्र ‘झुन्ना’ फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा और काशी’ विषय पर विद्वानों, साहित्यकारों एवं समाजसेवियों ने विचार व्यक्त करते हुए स्वर्गीय प्रो. कौशल किशोर मिश्र के व्यक्तित्व, कृतित्व और बौद्धिक अवदान को श्रद्धापूर्वक याद किया। मुख्य वक्ता काशी हिंदू विश्वविद्यालय इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो प्रवेश भारद्वाज ने कहा कि आज के कार्यक्रम ने इस संदेश को पुनः स्थापित किया कि स्मृति तभी सार्थक होती है, जब वह विचार, संवाद और रचनात्मक कर्म का आधार बने। ‘कौशल स्मृति व्याख्यानमाला’ इसी उद्देश्य के साथ ज्ञान, संस्कृति और समाज के बीच संवाद को आगे बढ़ाने तथा काशी की समृद्ध बौद्धिक परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रो राकेश कुमार तिवारी ने भारतीय ज्ञान परंपरा और काशी की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए वैश्विक समस्यायों के निदान मे इसकी महती भूमिका को रेखांकित किया। अन्य वक्ताओं ने कहा कि काशी केवल एक प्राचीन नगर नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, दर्शन, आध्यात्मिकता, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं की सतत प्रवाहमान धारा है। इसकी विशिष्टता इस बात में है कि यहां परंपरा और आधुनिकता, ज्ञान और आस्था तथा लोकजीवन और शास्त्रीय चिंतन का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता आज के समय में और बढ़ गई है, क्योंकि यह समाज को नैतिकता, सह-अस्तित्व, मानवीय गरिमा और लोककल्याण की दिशा प्रदान करती है।कार्यक्रम में प्रो. प्रवेश भारद्वाज, प्रो. राकेश तिवारी, डॉ. ए. एन. उपाध्याय, अत्रि भारद्वाज, अशोक पांडेय, श्रीमती आनंद प्रभा, अरविंद मिश्र एवं , प्रियाशुं तिवारी, रविंद्र सिंह, नृपेंद सिंह, डाॅ सिद्धार्थ सिंह,डाॅ आहूति सिंह, प्रो नृपेंद किशोर मिश्र सहित अन्य वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने स्वर्गीय प्रो. कौशल किशोर मिश्र को ज्ञान, संस्कृति और सामाजिक प्रतिबद्धता के प्रति समर्पित व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि उनका स्मरण केवल एक व्यक्ति को श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि उन बौद्धिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प है, जिनके लिए उन्होंने जीवनभर कार्य किया।
इस अवसर पर अनिल कुमार मिश्र ‘झुन्ना’ फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित ‘काशी जर्नल ऑफ सोशल साइंसेज’ के नवीन अंक का विमोचन किया गया। वक्ताओं ने सामाजिक विज्ञानों के अध्ययन, शोध एवं प्रकाशन की परंपरा को सुदृढ़ करने में इस पत्रिका की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी अकादमिक पहलें भारतीय समाज, संस्कृति और अर्थव्यवस्था से जुड़े प्रश्नों पर गंभीर विमर्श को प्रोत्साहित करती हैं तथा नई पीढ़ी के शोधार्थियों को ज्ञान-सृजन के लिए प्रेरित करती हैं।कार्यक्रम का स्वागत डॉ. भारती मिश्रा ने किया। उन्होंने उपस्थित अतिथियों एवं वक्ताओं का अभिनंदन करते हुए आयोजन की पृष्ठभूमि और इसकी वैचारिक महत्ता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन प्रो. अनूप कुमार मिश्र ने किया। अपने संचालन के दौरान उन्होंने काशी की ज्ञान परंपरा, सामाजिक चेतना और भारतीय बौद्धिक विरासत के विभिन्न पक्षों को रेखांकित करते हुए स्वर्गीय प्रो. कौशल किशोर मिश्र के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की। अंत में सुनील कुमार मिश्र ने धन्यवाद ज्ञापित किया।



