जंगली गुलाब बनेगा ग्रामीणों की आय का नया जरिया

- जंगली गुलाब (रोज हिप्स) की वैज्ञानिक प्रोसेसिंग से बदलेगी पहाड़ी आजीविका
पायनियर समाचार सेवा। हल्द्वानी। उत्तराखंड के पर्वतीय एवं स्वदेशी समुदायों की आजीविका में विविधता लाने के उद्देश्य से जंगली गुलाब के फलों (रोज हिप्स) के सतत संग्रहण, कटाई-पश्चात प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग, स्कूल आॅफ साइंस की ओर से आयोजित कार्यक्रम यूकॉस्ट, देहरादून द्वारा वित्तपोषित परियोजना के तहत हुआ। इसमें चंपावत और पिथौरागढ़ के प्रगतिशील किसानों, समुदाय प्रतिनिधियों तथा विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया। परियोजना अन्वेषक डॉ. एसएन ओझा ने रोज हिप्स के वैज्ञानिक संग्रहण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की संभावनाएं बताईं। विशेषज्ञ डॉ. सरला शाशनी ने आॅनलाइन व्याख्यान में उचित समय पर कटाई, प्राथमिक प्रसंस्करण, गुणवत्ता संरक्षण और भंडारण की तकनीकी जानकारी दी। सह-परियोजना अन्वेषक किशोर कुमार पंत ने प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग को ग्रामीण आजीविका से जोड़ने की आवश्यकता बताई। डॉ. विशाल कुमार शर्मा ने भी आॅनलाइन सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजेश मठपाल ने किया। प्रशिक्षण में रोज हिप्स के संभावित औद्योगिक उपयोग पर भी चर्चा हुई। इस पहल से जैव-संसाधनों के संरक्षण के साथ ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे।



