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साइबर अपराधियों से एक कदम आगे रहना जरूरी: राजीव कृष्ण

साइबर ठगी पर यूपी पुलिस का बड़ा प्रहार लखनऊ में शुरू हुआ सीएफएमसी, 1930 हेल्पलाइन की क्षमता हुई दोगुनी पायनियर समाचार सेवा। लखनऊ साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने बड़ी पहल की है। रविवार को…

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साइबर अपराधियों से एक कदम आगे रहना जरूरी: राजीव कृष्ण

साइबर ठगी पर यूपी पुलिस का बड़ा प्रहार लखनऊ में शुरू हुआ सीएफएमसी, 1930 हेल्पलाइन की क्षमता हुई दोगुनी

पायनियर समाचार सेवा। लखनऊ
साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने बड़ी पहल की है। रविवार को कल्ली पश्चिम स्थित पुलिस लाइन परिसर में साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर और 1930 साइबर हेल्पलाइन के नए स्टैंडअलोन 2.0 सेंटर का शुभारंभ किया गया। इसका उद्घाटन उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने किया। प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के मामलों को देखते हुए हेल्पलाइन की क्षमता बढ़ाई गई है। वर्ष 2021 में महज 14 सीटों से शुरू हुई 1930 हेल्पलाइन अब 80 सीटों की मजबूत व्यवस्था में तब्दील हो चुकी है। जुलाई 2025 में 30 सीटों वाले पहले स्टैंडअलोन सेंटर की शुरुआत हुई थी। जबकि अब स्टैंडअलोन 2.0 के तहत इसकी क्षमता बढ़ाकर 60 सीट कर दी गई है। 112 भवन की 20 सीटों को मिलाकर कुल क्षमता 80 सीट हो गई है।

हर दिन आ रही 10 हजार से ज्यादा कॉल
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2025 में हेल्पलाइन पर करीब 30 लाख कॉल प्राप्त हुई थीं। वहीं वर्ष 2026 में प्रतिदिन औसतन 10,700 से अधिक कॉल आ रही हैं। कॉल की बढ़ती संख्या के चलते कई शिकायतें प्रतीक्षा में रह जाती थीं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अधिक कॉल ‘गोल्डन ऑवर’ में रिसीव की जा सकेंगी, जिससे ठगी की रकम को समय रहते फ्रीज कराने में मदद मिलेगी।

एक साल में दोगुनी हुई धनराशि फ्रीज करने की क्षमता
साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों की रकम सुरक्षित कराने के लिए बैंक खातों पर लगाए जाने वाले ‘लियन’ में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। अप्रैल 2025 में जहां लियन दर 18.3 प्रतिशत थी, वहीं अप्रैल 2026 में यह बढ़कर 37.3 प्रतिशत पहुंच गई। इस अवधि में करीब 466.9 करोड़ रुपये की धनराशि सुरक्षित कराई गई है।

19 बैंक अब एक ही छत के नीचे
नए साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर (सीएफएमसी) में 19 बैंकों के 20 प्रतिनिधियों को एक ही स्थान पर तैनात किया गया है। इनमें सार्वजनिक, निजी और सहकारी बैंक शामिल हैं। इससे साइबर ठगी के मामलों में बैंकों के साथ तत्काल समन्वय स्थापित कर संदिग्ध लेन-देन को रियल टाइम में रोका जा सकेगा। पुलिस जल्द ही शेष बैंकों के रात्रिकालीन डेस्क को भी जोड़ने की तैयारी में है ताकि व्यवस्था 24 घंटे सक्रिय रह सके। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि साइबर अपराधियों के बदलते तौर-तरीकों को देखते हुए पुलिस को हमेशा एक कदम आगे रहना होगा। स्टैंडअलोन 2.0 सेंटर और सीएफएमसी के जरिए अधिक कॉल समय पर रिसीव की जा सकेंगी और ज्यादा से ज्यादा पीड़ितों की धनराशि सुरक्षित की जा सकेगी। उत्तर प्रदेश पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही किसी भी व्यक्ति के साथ ओटीपी, पीआईएन, सीवीवी और बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें तथा अंजान लिंक, फर्जी कॉल और निवेश के नाम पर दिए जाने वाले लालच से सतर्क रहें।

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Editorial Pioneer

दिल्ली | लखनऊ | रायपुर आधिकारिक हिंदी समाचार सेवा” “हर दिन नया मुद्दा, नई सोच और निष्पक्ष खबरों के साथ, The Hindi Pioneer — सच के साथ।”

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