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ईरान की सैन्य कमान का व‍िस्‍तार, सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने छह शीर्ष पदों पर नए कमांडर नियुक्त क‍िए

ईरान को साइबर सुरक्षा और निष्क्रिय रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत: उपराष्ट्रपति रजा आरिफ नई द‍िल्‍ली, एजेंसी। पूर्व इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) कमांडर मोहसिन रेजाई को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (एसएनएससी) में अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने के बाद इस्लामी…

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ईरान की सैन्य कमान का व‍िस्‍तार, सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने छह शीर्ष पदों पर नए कमांडर नियुक्त क‍िए

ईरान को साइबर सुरक्षा और निष्क्रिय रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत: उपराष्ट्रपति रजा आरिफ

नई द‍िल्‍ली, एजेंसी। पूर्व इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) कमांडर मोहसिन रेजाई को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (एसएनएससी) में अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने के बाद इस्लामी क्रांति के नेता अयातुल्लाह सैय्यद मोजतबा हुसैनी खामेनेई ने अलग-अलग आदेश जारी कर छह सैन्य कमांडरों की नियुक्ति की। ईरान की मेहर न्‍यूज एजेंसी की र‍िपोर्ट के अनुसार, ईरान के सभी सशस्त्र बलों की कमान संभालने वाले इस्लामी क्रांति के नेता अयातुल्लाह सैयद मोजतबा हुसैनी खामेनेई ने सेना के छह शीर्ष पदों पर नई नियुक्तियां कीं, जिनमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) के प्रमुख का पद भी शामिल है। मेहर न्‍यूज के अनुसार, सुप्रीम लीडर ने मेजर जनरल अली अब्दोल्लाही को ईरानी सशस्त्र बलों का चीफ आॅफ स्टाफ नियुक्त किया। साथ ही ब्रिगेडियर जनरल कियमार्स हैदरी को ईरानी सशस्त्र बलों का डिप्टी चीफ आफ स्टाफ बनाया गया। उन्होंने मेजर जनरल अहमद वाहिदी को आईआरजीसी का मुख्य कमांडर नियुक्त किया। मेहर न्‍यूज के अनुसार, ईरानी सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर ने मेजर जनरल मुस्तफा इजादी को आईआरजीसी का डिप्टी कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया। सुप्रीम लीडर ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पोस्‍ट में ल‍िखा, अत्यंत दयालु और कृपालु ईश्वर के नाम परङ्घमेजर जनरल मुस्तफा इजादी, आपकी निष्ठा, क्षमता और बहुमूल्य अनुभव को देखते हुए और आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ की सिफारिश पर मैं आपको आईआरजीसी के डिप्टी कमांडर-इन-चीफ के पद पर नियुक्त करता हूं। इसके अलावा, उन्‍होंने रियर एडमिरल अली ओजमाई को आईआरजीसी नौसेना का कमांडर बनाया गया। सुप्रीम लीडर ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पोस्‍ट में ल‍िखा, रियर एडमिरल अली ओजमाई, रियर एडमिरल तंगसिरी की शहादत को देखते हुए और आपकी लगन, काबिलियत और अनुभव को ध्यान में रखते हुए, आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ की सिफारिश पर, मैं आपको आईआरजीसी नेवी का कमांडर नियुक्त करता हूं। इसके अलावा उन्‍होंने नेता ने हुसैन ताएब को आईआरजीसी की बसीज संगठन का प्रमुख नियुक्त किया।सुप्रीम लीडर ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पोस्‍ट में ल‍िखा, हुज्जत-उल-इस्लाम हुसैन ताएब, जायोनी-अमेरिकी दुश्मन के हाथों मेजर जनरल सुलेमानी की शहादत को देखते हुए और आपकी प्रतिबद्धता, काबिलियत व अनुभव को ध्यान में रखते हुए, आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ की सिफारिश पर, मैं आपको आईआरजीसी बासिज संगठन का प्रमुख नियुक्त करता हूं।
ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा क‍ि हमारे दुश्‍मन साज‍िशें रचेंगे और देश को नुकसान पहुंचाने का मौका तलाशते रहेंगे। इसल‍िए देश की साइबर सुरक्षा और निष्क्रिय रक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विरोधियों की साजिशों से निपटने के लिए ईरान को पूरी तरह तैयार रहना होगा। इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) की र‍िपोर्ट के अनुसार, तेहरान में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विकास मुख्यालय की बैठक में आरिफ ने दुश्मनों की साजिशों को नाकाम करने के लिए देश को साइबर सुरक्षा और निष्क्रिय रक्षा के क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत करनी होगी। उन्‍होंने कहा कि शहीद इस्लामी क्रांति के नेता की ओर से तय किए गए विकास दृष्टि कार्यक्रम के तहत ईरान को उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में क्षेत्रीय स्तर पर अग्रणी स्थान हासिल करना चाहिए और वैश्विक स्तर पर भी एक प्रभावशाली भूमिका निभानी चाहिए। आईआरएनए के अनुसार, उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा को मजबूत करना एक जरूरी रणनीति है, क्योंकि दुश्मन ईरानी जनता के सामने हाल की अपनी हार के बावजूद साजिशें रचना बंद नहीं करेगा और हमारे देश को नुकसान पहुंचाने का मौका तलाशता रहेगा। हमें पूरी तरह तैयार रहते हुए विरोधियों की साजिशों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए और निष्क्रिय रक्षा पर भी ज्यादा ध्यान देना चाहिए। मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा क‍ि अमेरिका और इजराइल ने जून 2025 में ईरान के खिलाफ अपना पहला युद्ध शुरू किया था, जो 12 दिन तक चला। इसके बाद उनका दूसरा सैन्य हमला इस वर्ष 2026 में 28 फरवरी को शुरू हुआ और 40 दिन के बाद अप्रैल की शुरूआत में रुक गया। मोहम्मद रजा आरिफ ने दावा क‍िया क‍ि दोनों युद्धों में ईरान के मजबूत प्रतिरोध और जवाबी सैन्य अभियानों ने विरोधियों को युद्धविराम स्वीकार करने पर मजबूर कर दिया।