डेढ़ फीट पानी के तेज बहाव के बीच जान जोखिम में डालकर निकल रहे ग्रामीण, मवेशियों के चारे का संकट गहराया
पायनियर संवाददाता। फर्रुखाबाद
गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर ने तटीय क्षेत्रों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दहेलिया-जमापुर संपर्क मार्ग पर करीब डेढ़ फीट पानी का तेज बहाव होने से आवागमन प्रभावित हो गया है। वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीण रोजमर्रा के जरूरी कामों और आवश्यक सेवाओं के लिए जान जोखिम में डालकर पानी के बीच से गुजरने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तेज बहाव के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
खेत डूबे, मवेशियों के चारे का संकट
बाढ़ का असर केवल आवागमन तक सीमित नहीं है। खेतों में पानी भरने से हरे चारे की फसलें डूब गई हैं। पशुपालकों के सामने मवेशियों के लिए हरे और सूखे चारे का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द चारे की व्यवस्था नहीं की गई तो पशुओं को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
2010 से बाढ़ झेल रहे ग्रामीण
ग्रामीणों के मुताबिक वर्ष 2010 से क्षेत्र हर साल बाढ़ की समस्या से जूझ रहा है। लंबे समय से गांव, खेत और संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी में डूबते रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो सका। ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ के दौरान प्रशासनिक अमला निरीक्षण करता है, लेकिन पानी उतरने के बाद समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं होती।
मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद भी इंतजार
क्षेत्रवासियों ने बताया कि पिछले वर्ष जमापुर चौराहे पर आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों को समस्या से स्थायी निजात दिलाने का आश्वासन दिया था। ग्रामीणों का कहना है कि एक साल बीतने के बाद भी बाढ़ की समस्या जस की तस बनी हुई है। इससे क्षेत्रवासियों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।
नाव, चारा और चिकित्सा सुविधा की मांग
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन से दहेलिया-जमापुर मार्ग पर तत्काल सरकारी नावों की व्यवस्था कराने, मवेशियों के लिए हरा और सूखा चारा उपलब्ध कराने तथा प्रभावित गांवों में चिकित्सा एवं राहत शिविर लगाने की मांग की है। ग्रामीणों ने बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए मजबूत तटबंध या पक्के बांध का निर्माण कराने की भी मांग उठाई है।