नमामि गंगे पर सीएजी की रिपोर्ट ने उठाए सवाल, गंगा में 32 गुना बढ़ा कोलीफॉर्म

देहरादून। गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए संचालित नमामि गंगे कार्यक्रम के दावों पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट ने सवाल खड़े किए हैं। वर्ष 2018 से 2023 के बीच किए गए ऑडिट में प्रदेश में सीवेज प्रबंधन की खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, देवप्रयाग से हरिद्वार के बीच करीब 93 किलोमीटर के दायरे में गंगा के पानी में कुल कोलीफॉर्म का स्तर 32 गुना तक बढ़ गया। इसका एक प्रमुख कारण बिना उपचारित सीवेज का नदी में मिलना बताया गया है।
ऑडिट में प्रदेश के 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की स्थिति की जांच की गई। इनमें से 12 संयंत्रों से बिना उपचारित सीवेज गंगा और उसकी सहायक नदियों में जाने की बात सामने आई। सात शहरों में स्थापित 21 एसटीपी से घरेलू सीवर कनेक्शन ही नहीं जुड़े थे। ऐसे में इन संयंत्रों का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा था। कई स्थानों पर एसटीपी की क्षमता भी सीवेज की मात्रा के मुकाबले कम पाई गई। नालों की समुचित टैपिंग नहीं होने से गंदा पानी सीधे नदियों में पहुंच रहा था।
रिपोर्ट के अनुसार, श्रीनगर, उत्तरकाशी, टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग, देहरादून और हरिद्वार में जिला गंगा समितियों ने नदी बेसिन प्रबंधन योजना तैयार नहीं की। राज्य सरकार ने सीवेज विकास पर 55.08 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन गंगा किनारे बसे शहरों में सीवरेज व्यवस्था के विस्तार के लिए कोई राशि खर्च नहीं की गई। कई एसटीपी राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्धारित मानकों के अनुरूप भी संचालित नहीं हो रहे थे।
कई शहरों में घरों तक नहीं पहुंचा सीवर नेटवर्क
सीएजी ने घरेलू सीवर कनेक्शन की स्थिति को भी कमजोर पाया। श्रीनगर में कुल 6,523 घरों में से महज 797 यानी 12.22 प्रतिशत घर ही सीवर नेटवर्क से जुड़े थे। चमोली-गोपेश्वर में 5,510 घरों में से 354 (6.42 प्रतिशत) और उत्तरकाशी के ज्ञानसू में 6,089 घरों में से 572 (9.39 प्रतिशत) को ही सीवर नेटवर्क से जोड़ा जा सका था। खामियों के चलते उत्तराखंड जल संस्थान ने श्रीनगर के एसटीपी को अपने अधीन लेने से भी इन्कार कर दिया था।
हरिद्वार-ऋषिकेश में भी अधूरे कनेक्शन
गंगा किनारे बसे प्रमुख शहरों में भी सीवर नेटवर्क की पहुंच पूरी नहीं हो सकी है। हरिद्वार में 68,802 घरों में से 47,728 यानी 69.37 प्रतिशत घर सीवर नेटवर्क से जुड़े थे। वहीं ऋषिकेश, तपोवन और मुनि की रेती में 34,756 घरों में से केवल 9,966 (28.67 प्रतिशत) घरों को ही सीवर नेटवर्क से जोड़ा गया। सीएजी ने एसटीपी बनाने के साथ घरों को सीवर नेटवर्क से जोड़ने को भी जरूरी बताया है।
देवप्रयाग से हरिद्वार तक बढ़ा कोलीफॉर्म
रिपोर्ट में हरिद्वार की हरकी पैड़ी और देवप्रयाग के दस वर्षों के आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया। इसके अनुसार, अक्तूबर 2023 तक देवप्रयाग से हरिद्वार के बीच करीब 93 किलोमीटर की दूरी में कुल कोलीफॉर्म का स्तर 32 गुना बढ़ गया था। रिपोर्ट में नदी में बिना उपचारित सीवेज के प्रवाह को इसकी प्रमुख वजहों में शामिल किया गया है।
वरिष्ठ रसायनशास्त्री और स्पर्श गंगा अभियान के पूर्व ओएसडी प्रो. पीपी बडोनी के अनुसार, धरासू से गंगोत्री तक नदी में बैक्टीरियोफेज का स्तर 1100 प्रतिशत दर्ज किया गया था, जो पानी को सुरक्षित बनाने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि देवप्रयाग से ऋषिकेश तक आवासीय गतिविधियां अपेक्षाकृत कम हैं। ऐसे में होटल और रेस्तरां से निकलने वाला सीवेज भी नदी में कोलीफॉर्म बढ़ने की वजह हो सकता है।



