बेलीपार, गोरखपुर।जनपद मुख्यालय से 13 किमी दूर गोरखपुर-वराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर भौवापार में स्थित बाबा मुंजेश्वरनाथ मंदिर अपनी प्राचीनता, पवित्रता, दिव्यता व महात्म्य के लिए जन -जन में वर्षों से प्रसिद्ध है। यहां सावन माह, अधिक मास एवं महाशिवरात्रि के अवसर पर दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए आते हैं। श्रद्धालुओं में ऐसी मान्यता है कि यहां जलाभिषेक एवं दर्शन पूजन करने से भक्तों की मनौतियां पूरी होती है।
अत्यंत प्राचीन है मंदिर का इतिहास
बाबा मुंजेश्वर नाथमंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। नाग कौशलोत्तर नामक ऐतिहासिक ग्रंथ के अनुसार इस मंदिर की स्थापना सत्तासी नरेश राजा मुंज ने कराई थी। जनश्रुतियों के मुताबिक मंदिर के स्थान पर मूंज की झाड़ियां थी। कुछ मजदूर फावड़े से झाड़ियां खोदकर खेत बना रहे थे। तभी किसी मजदूर का फावड़ा एक पत्थर से टकराया तो मजदूर ने उस स्थान पर देखा तो वहां दूध की धारा बहने लगी थी। इसी दौरान सतासी नरेश को रात में भगवान शिव ने स्वप्न में कहा कि मैं शंकर हूं. मैं यहीं निवास करूंगा। राजा ने स्वप्न के अनुसार वहां जलाशय व मंदिर का निर्माण कराया। यहां के लोग बताते हैं कि वर्षों पुरानी बात है बाबा मुंजेश्वरनाथ के ऊपर छत नहीं लगा। और जब भी कोई छत लगाने की कोशिश करता है तो कुछ न कुछ अनहोनी हो जाती है। यहां शिवलिंग के ऊपर अति प्राचीन पीपल व बरगद का पेड़ है।जिस पर हमेशा सर्प विराजमान रहते हैं। लेकिन आजतक कभी किसी भक्त को नुक़सान नहीं पहुंचाया है। यहां राम लक्ष्मण सीता हनुमान जी सहित एक दर्जन से भी अधिक देवी देवताओं के छोटे बड़े मंदिर है। जलाशय के सामने भगवान शिव की भव्य प्रतिमा, त्रिशूल और नंदी महराज यहां की सुंदरता को चार-चांद लगाते हैं। मंदिर परिसर में रुद्राभिषेक,मुंडन, यज्ञोपवीत एवं विवाह आदि मांगलिक कार्यक्रम होते रहते हैं। ग्रहों की शांति के लिए लोग यहां अनुष्ठान भी करते हैं। देवोत्थान एकादशी के अवसर पर यहां मंदिर समिति तथा स्थानीय लोगों द्वारा विशाल दीपदान कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है। मंदिर परिसर में ही नवग्रह वाटिका स्थित है, एकादशी के अवसर पर लोग इसकी परिक्रमा करते हैं।

पर्यटन विभाग ने कराया सुंदरीकरण
जब यह मंदिर जीर्ण शीर्ण अवस्था में पहुंच चुका था तो भौवापार निवासी पूर्व प्रशासनिक अधिकारी योगेंद्र राम त्रिपाठी ने तीन लाख रुपये चंदा जुटाकर मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। किंतु प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर वर्ष 2023-2024 में पर्यटन विभाग से 6 करोड़ 29 लाख रुपए लगाकर मंदिर का सुंदरीकरण किया गया है। जिसका शिलान्यास स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। अब यह मंदिर जनपद के बड़े पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। सायंकाल के समय मंदिर परिसर के सामने स्थित सौर ऊर्जा से संचालित लाइटें जब प्रकाशित होती हैं तो इसकी छटा देखते ही बनती है।
जलाशय के सुंदरीकरण के बाद बहुत से श्रद्धालु जलाशय में पाली गई मछलियों को दाना खिलाने आते हैं। मंदिर के पुजारी अजय गिरी व संजय गिरी ने बताया कि सावन माह में आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर एवं पुलिस प्रशासन की देखरेख में जलाभिषेक एवं दर्शन पूजन कराया जा रहा है। इस कार्य में गोसाई परिवार के स्वयंसेवक तथा स्थानीय लोगों का भी सहयोग रहता है। वैसे तो रोज रात में भगवान शिव की आरती की जाती है, लेकिन सावन के सोमवार एवं महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष आरती होती है। इस अवसर पर भगवान शिव का विशेष श्रृंगार करके 56 भोग के प्रसाद के साथ महाआरती किया जाता है।
विजय कुमार मोदनवाल, बेलीपार