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बाढ़ के बीच बच्चों को बांटी एक्सपायरी दवा? कानपुर में स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप, लोगों ने लेने से किया इनकार

बर्रा मायापुरम के लोग इन दिनों बाढ़ की दोहरी मार झेल रहे हैं। घरों में पानी घुसने के साथ संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे समय में स्वास्थ्य विभाग की टीम सोमवार दोपहर करीब 20 परिवारों को दवाइयां…

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बाढ़ के बीच बच्चों को बांटी एक्सपायरी दवा? कानपुर में स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप, लोगों ने लेने से किया इनकार

बर्रा मायापुरम के लोग इन दिनों बाढ़ की दोहरी मार झेल रहे हैं। घरों में पानी घुसने के साथ संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे समय में स्वास्थ्य विभाग की टीम सोमवार दोपहर करीब 20 परिवारों को दवाइयां बांटने पहुंची थी। लोगों को उम्मीद थी कि इन दवाओं से बाढ़ के दौरान होने वाली बीमारियों से बचाव में मदद मिलेगी, लेकिन कथित एक्सपायरी सिरप सामने आने के बाद इलाके में नाराजगी फैल गई।

सिरप पीने के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने का दावा

स्थानीय लोगों के मुताबिक, जयपाल और मीना के चार वर्षीय बेटे ऋषभ ने सिरप पीने के बाद उल्टियां शुरू कर दीं। बच्चे की हालत बिगड़ने पर परिजन उसे नजदीकी निजी डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे, जहां इलाज के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ।

इसी तरह सोनम और रिंकू के तीन वर्षीय बेटे रुद्र तथा अंकिता और अजय के तीन वर्षीय बेटे आयुष की तबीयत भी दवा और सिरप लेने के बाद खराब होने की बात कही जा रही है। एक साथ कई बच्चों के बीमार पड़ने की सूचना के बाद परिवारों में डर का माहौल बन गया।

लोगों ने कथित एक्सपायरी सिरप समेत अन्य दवाइयां भी फेंक दीं। मंगलवार को जब स्वास्थ्य विभाग की टीम दोबारा मायापुरम पहुंची और दवाइयां वितरित करने की कोशिश की, तो बाढ़ प्रभावित परिवारों ने दवा लेने से इनकार कर दिया।

इलाज के लिए 100 रुपये देने की पेशकश

मीडिया कर्मियों के मौके पर पहुंचने के बाद मामला और चर्चा में आया। ऋषभ की मां मीना का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कथित तौर पर सिरप दिए जाने में गलती होने की बात स्वीकार की और बच्चे के इलाज के लिए 100 रुपये देने की पेशकश की। हालांकि परिवार ने पैसे लेने से इनकार कर दिया।

परिजनों का सवाल है कि अगर कथित एक्सपायरी सिरप पीने के बाद किसी बच्चे की हालत गंभीर हो जाती या कोई अनहोनी हो जाती, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती? परिवारों के मुताबिक इस सवाल का मौके पर स्वास्थ्य कर्मियों की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।

CMO ने कहा- जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट

मामले को लेकर कानपुर के CMO डॉ. हरिदत्त नेमी ने कहा कि प्रकरण उनके संज्ञान में आया है और इसकी जांच कराई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने के बाद ही मामले में आगे कुछ कहा जा सकेगा।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि बाढ़ जैसे संवेदनशील हालात में राहत के नाम पर बांटी गई दवाइयों की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई थी। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सिरप वास्तव में एक्सपायर्ड था या नहीं और बच्चों की तबीयत खराब होने का उससे कोई संबंध था या नहीं।

बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए यह मामला सिर्फ दवा का नहीं, बल्कि भरोसे और सुरक्षा का भी है। एक तरफ पांडु नदी का बढ़ता पानी और दूसरी तरफ संक्रमण का खतरा उनकी मुश्किलें बढ़ा रहा है। ऐसे में लोग प्रशासन से सुरक्षित राहत सामग्री और दवाइयों की व्यवस्था की उम्मीद कर रहे हैं।

 

लेखक

Rashmi Singh

रश्मि सिंह मास कम्युनिकेशन में स्नातकोत्तर हैं और मीडिया एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ग्राउंड रिपोर्टिंग और कंटेंट लेखन से की तथा समय के साथ देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों और समाचार चैनलों में कार्य किया। राजनीति, समसामयिक घटनाक्रम, उत्तर प्रदेश की खबरों, सामाजिक मुद्दों और मनोरंजन जगत की रिपोर्टिंग एवं विश्लेषण में उन्हें विशेष अनुभव प्राप्त है। डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों क्षेत्रों में काम करते हुए उन्होंने तथ्यपरक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता को अपनी पहचान बनाया है।

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