कैबिनेट फैसले
60 वर्ष से अधिक की महिलाओं जीवन भर कर सकेंगी यूपी रोडवेज में सफर
हरिद्वार तक विस्तारित होगा गंगा एक्सप्रेसवे
8 मेगा औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहन देने की मंजूरी
यूपी में होगा 2,606 करोड़ रुपये का नया औद्योगिक निवेश
बिजनौर, उन्नाव और कानपुर देहात में स्थापित होंगी औद्योगिक परियोजनाएं
250 नई इले्ट्रिरक बसों से मजबूत होगा रोडवेज का बेड़ा
छात्रवृत्ति से वंचित छात्रों को मिलेगा एक और मौका, पोर्टल खोलने के लिए कैबिनेट की मंजूरी
सुल्तानपुर में 272 करोड़ से बनेगा इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर
7,968 करोड़ रुपये से बनेगा झांसी लिंक एक्सप्रेसवे
युवाओं के लिए 25 लाख टैबलेट खरीदने का प्रस्ताव मंजूर
पायनियर समाचार सेवा
लखनऊ। यूपी कैबिनेट ने मंगलवार को दो बडे़ और महत्वपूर्ण फैसले लिए। एक फैसले के तहत अब मां-बाप अपने बच्चों को आसानी से संपत्ति से बेदखल कर सकेंगे। इसके लिए मंत्रिमंडल ने ‘उत्तर प्रदेश माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण नियमावली-2014’ में संशोधन करते हुए नियम 22 में 22क, 22ख और 22ग जोड़ने का निर्णय लिया है। इस फैसले से वरिष्ठ नागरिकों के सम्मानजनक जीवन और उनके अधिकारों की रक्षा होगी। इसके अलावा ‘सशक्त नारी’ के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की सामान्य बसों में निशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान करने की भी घोषणा की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई कैबिनेट की बैठक में 24 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति योजना को भी मंजूरी शामिल है।
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के समीप विकसित होगा औद्योगिक क्लस्टर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने औद्योगिक कॉरिडोर योजना के अंतर्गत जनपद सुल्तानपुर में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स (आईएमएलसी) की स्थापना के लिए अवस्थापना विकास के निर्माण कार्यों से संबंधित परियोजना प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के सन्निकट विकसित किए जाने वाले इस औद्योगिक क्लस्टर के लिए 27225.33 लाख रुपये यानी लगभग 272.25 करोड़ रुपये की लागत अनुमोदित की गई है। निर्माण कार्य में होने वाला संभावित व्यय-भार राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। परियोजना में केंद्र सरकार की किसी प्रकार की वित्तीय भागीदारी अपेक्षित अथवा प्रस्तावित नहीं है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद परियोजना के निर्माण एजेंसी के चयन के लिए ग्लोबल बिड आमंत्रित की जाएगी। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा और परियोजना को समयबद्ध रूप से पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। आईएमएलसी के विकास से सुल्तानपुर में उद्योगों की स्थापना, निवेश और विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के समीप होने के कारण क्लस्टर को बेहतर कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं का लाभ मिलेगा। परियोजना के क्रियान्वयन और इसके अंतर्गत उद्योगों की स्थापना से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है। इससे सुल्तानपुर के लोगों को अपने ही जनपद में रोजगार के अवसर मिलेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर के विकास से सुल्तानपुर में औद्योगिक आधारभूत ढांचे को मजबूती मिलेगी।
बीडा और डिफेंस कॉरिडोर को मिलेगी तेज कनेक्टिविटी, आवागमन होगा सुगम
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में बुंदेलखंड के इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने 7,968.30 करोड़ रुपये की लागत से झांसी लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना के विकास को मंजूरी प्रदान कर दी है।
झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण से बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) क्षेत्र, डिफेंस कॉरिडोर और जनपद झांसी के आसपास के महत्वपूर्ण स्थलों तक बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। एक्सप्रेसवे के माध्यम से प्रदेश एवं देश के अन्य क्षेत्रों से इन स्थानों तक सुरक्षित और द्रुतगति यातायात आवागमन की सुविधा मिलेगी। परियोजना के निर्माण की अनुमानित लागत 7,968.30 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। निर्माण कार्य के लिए होने वाला संभावित पूरा व्यय भार राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। केंद्र सरकार की ओर से इस परियोजना में किसी प्रकार की वित्तीय भागीदारी अपेक्षित अथवा प्रस्तावित नहीं है। परियोजना को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद यथाशीघ्र निर्माण कार्य प्रारंभ किए जाने की कार्यवाही की जाएगी। सरकार का लक्ष्य परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करना है, जिससे क्षेत्र को जल्द बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिल सके। झांसी लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण बीडा और डिफेंस कॉरिडोर के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रयागराज और हरिद्वार के बीच बनेगा तेज और नियंत्रित एक्सप्रेसवे कनेक्शन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक विस्तारित करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण 6 लेन में किया जाएगा, जिसे भविष्य में 8 लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। हरिद्वार तक गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार के लिए राज्य सरकार पर संभावित 10,761 करोड़ रुपये का व्यय-भार आएगा। परियोजना में केंद्र सरकार की किसी प्रकार की वित्तीय भागीदारी अपेक्षित अथवा प्रस्तावित नहीं है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद परियोजना की डीपीआर तैयार करने सहित आगे की आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। उत्तराखंड सीमा से लगे बिजनौर जिले से हरिद्वार जाने के लिए वर्तमान में प्रमुख रूप से एनएच-34 (मेरठ-बिजनौर-हरिद्वार राष्ट्रीय मार्ग) की सुविधा उपलब्ध है। गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक विस्तार से बिजनौर को हरिद्वार से बेहतर और तेज कनेक्टिविटी मिल सकेगी।इसके साथ ही बिजनौर की कनेक्टिविटी गंगा एक्सप्रेसवे के माध्यम से प्रदेश की राजधानी लखनऊ से भी बेहतर होगी। इससे क्षेत्र में व्यापार, निवेश, उद्योग और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक पहुंचने से गंगा के तट पर स्थित दो प्रमुख कुम्भ नगरियों, प्रयागराज और हरिद्वार के बीच प्रवेश नियंत्रित एक्सप्रेसवे नेटवर्क के माध्यम से तेज और सुगम यातायात सुविधा विकसित होगी। इससे धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए दोनों धार्मिक नगरियों के बीच आवागमन अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है। एक्सप्रेसवे के विस्तार से धार्मिक पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। बेहतर कनेक्टिविटी से हरिद्वार, बिजनौर और गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़े अन्य क्षेत्रों में पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है।
2,901 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को मिलेगा बढ़ावा
योगी कैबिनेट की बैठक में प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के तहत आठ मेगा श्रेणी की औद्योगिक इकाइयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट (एलओसी) जारी किए जाने की संस्तुति को मंजूरी प्रदान कर दी है। इन आठ औद्योगिक इकाइयों द्वारा प्रदेश में कुल 2,901.97 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इन इकाइयों को नीति के तहत नेट एसजीएसटी और पूंजीगत सब्सिडी जैसे प्रोत्साहनों का लाभ मिलेगा।
उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति (एचएलईसी) की 4 मई 2026 को हुई बैठक में इन औद्योगिक इकाइयों के प्रस्तावों पर विचार कर कैबिनेट से अनुमोदन की संस्तुति की गई थी। अब कैबिनेट ने इन इकाइयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किए जाने की मंजूरी दे दी है। मंजूरी पाने वाली औद्योगिक इकाइयों में सूर्या ग्लोबल सुपर फ्लैक्सीफिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा गौतमबुद्ध नगर में 605.37 करोड़ रुपये, शाल्विस स्पेशियलिटीज लिमिटेड द्वारा हमीरपुर में 297.30 करोड़ रुपये और साउंड कास्टग्सिं प्राइवेट लिमिटेड द्वारा हाथरस में 225 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसी तरह वृन्दावन बॉटलर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा बाराबंकी में 436.12 करोड़ रुपये, जुआरी एनविएन बायोएनर्जी प्राइवेट बायोएनर्जी लिमिटेड द्वारा लखीमपुर खीरी में 294.72 करोड़ रुपये, पसवारा पेपर्स लिमिटेड द्वारा हाथरस में 315 करोड़ रुपये, सीआरडी फूड्स एंड बेवरेजेज लिमिटेड द्वारा मथुरा में 363.94 करोड़ रुपये और माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज लिमिटेड द्वारा उन्नाव में 363.52 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है।
इन परियोजनाओं को उनकी पात्रता के अनुसार नेट एसजीएसटी और पूंजीगत सब्सिडी जैसे प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इन प्रोत्साहनों का उद्देश्य प्रदेश में बड़े औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने और औद्योगिक इकाइयों को प्रतिस्पर्धी कारोबारी वातावरण उपलब्ध कराना है। इन आठ मेगा परियोजनाओं से प्रदेश में विनिर्माण एवं अन्य औद्योगिक गतिविधियों को विस्तार मिलने की उम्मीद है।
सरकार के इस निर्णय से गौतमबुद्ध नगर, हमीरपुर, हाथरस, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, मथुरा और उन्नाव जैसे जिलों में औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
यूपी में होगा 2,606 करोड़ रुपये का नया औद्योगिक निवेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश में बड़े औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने तीन प्रमुख औद्योगिक इकाइयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट (एलओसी) जारी किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में कुल 2,606.04 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। कैबिनेट की मंजूरी पाने वाली परियोजनाओं में मेसर्स एग्रिस्टो मासा प्राइवेट लिमिटेड की बिजनौर में, मेसर्स कैनपैक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की उन्नाव में और मेसर्स सुप्रीम इंडस्ट्रीज लिमिटेड की कानपुर देहात में परियोजना शामिल है। इन परियोजनाओं में एफडीआई/ एफसीआई तथा अन्य पात्र श्रेणियों के अंतर्गत नीति आधारित प्रोत्साहन के रूप में लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किया जाएगा। कैनपैक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा उन्नाव में एल्युमिनियम बेवरेज कैन के विनिर्माण की इकाई स्थापित की जाएगी। परियोजना के लिए 1,573.62 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। यह इकाई यूपीडा के आईएमएलसी इंड्ट्रिरयल कॉरिडोर क्षेत्र में करीब 26 हेक्टेयर भूमि पर स्थापित की जाएगी। परियोजना की अनुमानित वार्षिक उत्पादन क्षमता 130 करोड़ यूनिट होगी।
एग्रिस्टो मासा प्राइवेट लिमिटेड अपनी मौजूदा आलू फ्लेक्स उत्पादन गतिविधियों का विस्तार करते हुए फ्रेंच फ्राइज के उत्पादन में प्रवेश करेगी। कंपनी की वर्तमान उत्पादन क्षमता लगभग 7,332 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है, जबकि प्रस्तावित फ्रेंच फ्राइज इकाई की अधिकतम स्थापित क्षमता 75,000 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष होगी। इस परियोजना में 794.27 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है।
सुप्रीम इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा कानपुर देहात में 238.15 करोड़ रुपये के निवेश से वैल्यू एडेड प्लास्टिक बिल्डिंग सॉल्यूशन उत्पादों का विनिर्माण किया जाएगा। वर्ष 1942 में स्थापित सुप्रीम इंडस्ट्रीज भारत के प्रमुख प्लास्टिक प्रोसेसिंग समूहों में शामिल है। कंपनी देशभर में आधुनिक तकनीक और उन्नत विनिर्माण सुविधाओं से युक्त 28 संयंत्र संचालित करती है। तीनों परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से प्रदेश में विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलने के साथ निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है। बिजनौर, उन्नाव और कानपुर देहात में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। इस निर्णय से उत्तर प्रदेश में एफडीआई, विनिर्माण और वैल्यू एडेड इंडस्ट्री को बढ़ावा देने तथा प्रदेश को एक प्रमुख औद्योगिक निवेश गंतव्य के रूप में और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
4 सौ करोेड़ से खरीदी जाएंगी 250 नई इले्ट्रिरक बसें
योगी कैबिनेट ने सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में भी अहम फैसला लिया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के बस बेड़े के सुदृढ़ीकरण के लिए 250 नई वातानुकूलित इले्ट्रिरक बसों की खरीद प्रस्तावित है। इसके लिए सरकार ने 400 करोड़ रुपये की प्रावधानित धनराशि को मंजूरी देने का निर्णय लिया गया है। प्रस्ताव के तहत 50 सीटर 100 बसें और 41 सीटर 150 बसें खरीदी जाएंगी। इन 250 बसों की कुल खरीद पर करीब 425.50 करोड़ रुपये का वित्तीय व्यय संभावित है। सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली 400 करोड़ रुपये की धनराशि के अतिरिक्त करीब 25.50 करोड़ रुपये का खर्च उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम अपने संसाधनों से वहन करेगा।
इस फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना भी है। सीपीक्यूएम के निर्देशों के अनुसार 1 नवंबर 2026 से दिल्ली में केवल सीएनजी, इले्ट्रिरक और बीएस-6 वाहनों को प्रवेश की अनुमति होगी। ऐसे में इले्ट्रिरक बसों के बेड़े का विस्तार उत्तर प्रदेश से दिल्ली आने-जाने वाले सार्वजनिक परिवहन को इन पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप बनाने में मदद करेगा। नई इले्ट्रिरक बसों के संचालन से प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों के लिए परिवहन सेवाओं को भी बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इले्ट्रिरक बसें पर्यावरण के अनुकूल यात्रा सुविधा उपलब्ध कराने के साथ आम यात्रियों को आधुनिक और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन का विकल्प देंगी। इसके साथ ही बस बेड़े के विस्तार से चालकों, परिचालकों और तकनीकी रख-रखाव से जुड़े कुशल-अकुशल कर्मियों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। बसों की संख्या में वृद्धि से ढाबा, रेस्टोरेंट और अन्य यात्री सुविधाओं से जुड़े रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
तकनीकी व अन्य कारणों से छात्रवृत्ति से वंचित रह गए छात्रों को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभिन्न कारणों से छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ पाने से वंचित रह गए पात्र छात्रों को एक और अवसर दिए जाने का निर्णय किया गया। इसके लिए मंत्रिमंडल ने विशेष मामले के रूप में छात्रवृत्ति पोर्टल को दोबारा खोलने की मंजूरी प्रदान की है। प्रेसवार्ता में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से संबंधित विभिन्न पात्र वर्गों के कुल 2,76,057 छात्र इस निर्णय से लाभान्वित होंगे। इन छात्रों को छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए कुल 551 करोड़ 85 लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी। इनमें सामान्य वर्ग के 51,078 छात्रों के लिए 163.42 करोड़ रुपये, अनुसूचित जाति के 64,971 छात्रों के लिए 58.17 करोड़ रुपये, अनुसूचित जनजाति के 5,192 छात्रों के लिए 9.21 करोड़ रुपये और अन्य पिछड़ा वर्ग के 1,36,136 छात्रों के लिए 300 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इसी क्रम में अल्पसंख्यक वर्ग के 18,680 छात्रों को 21.05 करोड़ रुपये की धनराशि दी जाएगी। वित्तीय वर्ष 2025-26 में दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत कई पात्र छात्रों की छात्रवृत्ति की प्रक्रिया विभिन्न कारणों से पूरी नहीं हो सकी। कहीं शिक्षण संस्थानों की ओर से आवेदन अग्रसारित नहीं किए गए, तो कहीं आवेदन में कमियां रहने अथवा अन्य तकनीकी कारणों से पीएफएमएस स्तर पर भुगतान नहीं हो सका। कुछ मामलों में शिक्षण संस्थानों द्वारा समय से परीक्षा परिणाम घोषित नहीं किए जाने, जनपद स्तरीय समिति में आवेदन लंबित रहने, फीस जमा न होने अथवा अन्य तकनीकी कारणों से भी छात्रों को छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि नहीं मिल सकी। मंत्रिमंडल ने अब ऐसे सभी पात्र छात्रों को राहत देने का निर्णय लिया है। सामान्य, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग सहित अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के पात्र छात्रों को छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ दिलाने के लिए विशेष मामले के रूप में एक बार फिर छात्रवृत्ति पोर्टल को खोला जाएगा। इसके लिए वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट से 551 करोड़ 85 लाख रुपये की धनराशि व्यय किए जाने की अनुमति भी प्रदान की गई है। सरकार के इस निर्णय से उन छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी, जो पात्र होने के बावजूद प्रक्रिया संबंधी तकनीकी अथवा अन्य कारणों से वित्तीय वर्ष 2025-26 में छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति के लाभ से वंचित रह गए थे। सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी पात्र छात्र केवल प्रक्रियागत या तकनीकी कारणों से अपने अधिकार के लाभ से वंचित न रहे।
पात्र युवाओं को निशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे टैबलेट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में प्रदेश के युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत 25 लाख टैबलेट की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। योगी सरकार ने टेंडर प्रक्रिया में चयनित संस्थाओं को क्रय आदेश जारी किए जाने की मंजूरी देकर प्रदेश के युवाओं को डिजिटल संसाधनों से जोड़ने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ये टैबलेट पात्र युवाओं को निशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। गौरतलब है कि स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना 5 वर्ष के लिए लागू है। योजना के तहत प्रदेश के युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए आधुनिक टैबलेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसके लिए 2,374.60 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। खास बात यह है कि इस योजना से केंद्र सरकार पर कोई अतिरिक्त व्यय भार नहीं पड़ेगा।
योजना के तहत स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा, कौशल विकास समेत विभिन्न शिक्षण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अध्ययनरत पात्र युवाओं को निशुल्क टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे विद्यार्थी अपने शैक्षिक पाठ्यक्रम को डिजिटल माध्यम से बेहतर ढंग से पूरा कर सकेंगे और तकनीक आधारित अध्ययन की सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। टैबलेट मिलने से युवाओं को सरकारी और गैर-सरकारी योजनाओं, ऑनलाइन प्रशिक्षण, रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़ी सेवाओं तक पहुंच बनाने में भी मदद मिलेगी। योगी सरकार का उद्देश्य केवल युवाओं को उपकरण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसरों से जोड़ना है। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि कैबिनेट के इस निर्णय से उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा, कौशल विकास प्रशिक्षण और आईटीआई से जुड़े पंजीकृत कुशल युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने में मदद मिलेगी। डिजिटल संसाधनों तक आसान पहुंच से प्रशिक्षण की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ युवाओं की रोजगारपरक दक्षता भी बढ़ेगी। तकनीकी रूप से सक्षम युवा वर्ग रोजगार सृजन और सेवा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
एमबीबीएस-बीडीएस इंटर्नशिप भत्ता 12 से बढ़ाकर किया 25 हजार रुपये
प्रदेश के राजकीय मेडिकल कालेजों, संस्थानों और चिकित्सा विश्वविद्यालयों से एमबीबीएस व बीडीएस परीक्षा उत्तीर्ण कर रोटेटिंग इंटर्नशिप करने वाले छात्रों को अब हर माह 12 हजार के बजाय 25 हजार रुपये इंटर्नशिप भत्ता मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में भत्ता बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। गौरतलब है कि योगी सरकार ने इससे पहले भी 2021 में यह भत्ता 7500 हजार से बढ़ाकर 12 हजार रुपये किया था।
मैनपुरी में विकसित होगा मयंक ऋषि पक्षी विहार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में प्राकृतिक और पर्यावरणीय स्थलों को पर्यटन की नई पहचान देने की दिशा में समान पक्षी विहार के निकट पर्यटन विकास के लिए 6 हेक्टेयर ग्रामसभा भूमि पर्यटन विभाग के पक्ष में नि:शुल्क हस्तांतरित किए जाने को मंजूरी मिली है, यह स्थल मयंक ऋषि पक्षी विहार के नाम से जाना जाएगा। इस फैसले से पर्यटन सुविधाओं से जोड़ने और देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने का रास्ता साफ होगा।
कोर्ट मैनेजमेंट को मजबूत करने की योगी सरकार की बड़ी पहल
न्यायालयों के प्रशासनिक एवं प्रबंधकीय ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में योगी सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में इलाहाबाद हाईकोर्ट और प्रदेश के जनपदीय न्यायालयों में कार्यरत कोर्ट मैनेजर्स की सेवा व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए ‘द इलाहाबाद हाईकोर्ट (कोर्ट मैनेजर्स सेंट्रलाइज्ड सर्विस) रूल्स, 2026’ के मसौदे को मंजूरी दे दी है। सरकार के इस निर्णय से प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था में कोर्ट मैनेजर्स को एक अधिक सुसंगठित, स्पष्ट और संस्थागत सेवा ढांचा मिल सकेगा।