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वृद्धा पेंशन के लिए दफ्तरों की चौखट नाप रहे बुजुर्ग

महराजगंज। उम्र के जिस पड़ाव पर बुजुर्गों को सहारे और सम्मान की जरूरत होती है, उसी उम्र में सरकारी पेंशन के लिए उन्हें दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। समाज कल्याण विभाग की व्यवस्था पर सवाल खड़े करती तस्वीर गुरुवार को…

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वृद्धा पेंशन के लिए दफ्तरों की चौखट नाप रहे बुजुर्ग

महराजगंज। उम्र के जिस पड़ाव पर बुजुर्गों को सहारे और सम्मान की जरूरत होती है, उसी उम्र में सरकारी पेंशन के लिए उन्हें दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। समाज कल्याण विभाग की व्यवस्था पर सवाल खड़े करती तस्वीर गुरुवार को उस समय सामने आई, जब चिलचिलाती धूप और उमसभरी गर्मी के बीच कई बुजुर्ग समाज कल्याण अधिकारी के कार्यालय में अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। किसी को छह महीने से पेंशन का इंतजार है तो कोई करीब एक वर्ष से दफ्तर की चौखट नाप रहा है।पनियरा ब्लाक से आई बुजुर्ग महिला राजमती देवी करीब 11 बजे उमसभरी गर्मी में बेहाल हालत में कार्यालय के बाहर बैठी रहीं। उनका कहना था कि वृद्धावस्था पेंशन पिछले छह महीने से खाते में नहीं आई है। पेंशन क्यों रुकी है, इसकी जानकारी लेने के लिए उन्हें बार-बार जिला मुख्यालय आना पड़ रहा है। आने-जाने में खर्च होने वाले पैसे और धूप-गर्मी की परेशानी अलग है। बावजूद इसके समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।वहीं घुघली ब्लाक से आए सीताराम और हरिलाल भी अधिकारी से मिलने की प्रतीक्षा में खड़े दिखाई दिए। सदर ब्लाक के बासपार बैजौली से आईं नबीबुन निशा और रामवृक्ष भी अपनी पेंशन संबंधी समस्या लेकर पहुंचे थे। सभी की नजरें कार्यालय के दरवाजे पर टिकी थीं। चेहरे पर पेंशन न मिलने की चिंता और लंबे समय से दफ्तर के चक्कर लगाने की थकान साफ झलक रही थी। बुजुर्गों का कहना था कि हर बार उम्मीद लेकर आते हैं कि इस बार समस्या का समाधान हो जाएगा, लेकिन उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ता है।

इनकी सुनिए…समाज कल्याण अधिकारी विपिन कुमार यादव ने बताया कि बजट के अभाव में बुजुर्गों को वृद्धा पेंशन मिलने में दिक्कत आ रही है। उन्होंने कहा कि समस्या का जल्द समाधान होगा। बजट उपलब्ध होते ही लंबित पेंशन का भुगतान कराया जाएगा और बुजुर्गों को समय से नियमित पेंशन मिलने लगेगी।

कागजों में कल्याण, जमीन पर इंतजार ही इंतजार
समाज कल्याण विभाग का नाम सुनते ही जरूरतमंदों के कल्याण की उम्मीद जगती है, लेकिन कार्यालय की चौखट पर घंटों पसीना बहाते बुजुर्ग इस व्यवस्था की हकीकत बयां कर रहे हैं। विडंबना यह है कि जिस पेंशन को बुजुर्गों के लिए आर्थिक सहारे के तौर पर दिया जाता है, उसी के लिए उन्हें अपनी उम्र और कमजोरी को दरकिनार कर दूर-दराज के ब्लॉकों से जिला मुख्यालय तक दौड़ लगानी पड़ रही है।सरकारी योजनाओं की फाइलों में बुजुर्गों का कल्याण भले ही पूरी तरह दिखाई देता हो, लेकिन कार्यालय के बाहर तपती धूप में अपनी बारी का इंतजार करते ये चेहरे सवाल कर रहे हैं कि आखिर समाज कल्याण विभाग का कल्याण कब होगा और बुजुर्गों को इस भटकाव से कब मुक्ति मिलेगी? जरूरत है कि विभाग पेंशन रुकने के कारणों की जांच कर पात्र बुजुर्गों की पेंशन शीघ्र बहाल करे, ताकि जीवन के आखिरी पड़ाव में उन्हें सम्मान के बजाय सरकारी दफ्तरों की चौखट न नापनी पड़े।

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लेखक

Rashmi Singh

रश्मि सिंह मास कम्युनिकेशन में स्नातकोत्तर हैं और मीडिया एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ग्राउंड रिपोर्टिंग और कंटेंट लेखन से की तथा समय के साथ देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों और समाचार चैनलों में कार्य किया। राजनीति, समसामयिक घटनाक्रम, उत्तर प्रदेश की खबरों, सामाजिक मुद्दों और मनोरंजन जगत की रिपोर्टिंग एवं विश्लेषण में उन्हें विशेष अनुभव प्राप्त है। डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों क्षेत्रों में काम करते हुए उन्होंने तथ्यपरक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता को अपनी पहचान बनाया है।

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