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स्पर्म क्वालिटी और डीएनए पर बढ़ता खतरा, लाइफस्टाइल बन रही बड़ी वजह

आगरा। पायनियर समाचार सेवा। देश में तेजी से बढ़ रही बांझपन (इन्फर्टिलिटी) की समस्या के पीछे बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और प्रदूषित पर्यावरण को प्रमुख कारण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार अब समस्या केवल शुक्राणुओं (स्पर्म) की संख्या तक सीमित…

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स्पर्म क्वालिटी और डीएनए पर बढ़ता खतरा, लाइफस्टाइल बन रही बड़ी वजह

आगरा। पायनियर समाचार सेवा। देश में तेजी से बढ़ रही बांझपन (इन्फर्टिलिटी) की समस्या के पीछे बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और प्रदूषित पर्यावरण को प्रमुख कारण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार अब समस्या केवल शुक्राणुओं (स्पर्म) की संख्या तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनकी गुणवत्ता और डीएनए पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
ACE 2026 कार्यशाला के दौरान आयोजन समिति के सचिव डॉ. केशव मल्होत्रा ने बताया कि वर्तमान समय में युवाओं में स्पर्म काउंट में कमी के साथ-साथ उनके डीएनए डैमेज के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर न केवल गर्भधारण की संभावना पर पड़ता है, बल्कि भविष्य में जन्म लेने वाले शिशु के स्वास्थ्य पर भी प्रभाव डाल सकता है।

डॉ. मल्होत्रा ने बताया कि आईवीएफ तकनीक के माध्यम से संतान प्राप्ति संभव हो रही है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है कि जन्म लेने वाला शिशु पूरी तरह स्वस्थ हो। इसी दिशा में अब चिकित्सा क्षेत्र में एआई आधारित आधुनिक डिवाइस और मशीनें विकसित हो चुकी हैं, जो बेहतर गुणवत्ता वाले शुक्राणुओं के चयन में मदद करती हैं। इन तकनीकों से एम्ब्रियोलॉजिस्ट को उच्च गुणवत्ता के स्पर्म चुनने में आसानी होती है, जिससे स्वस्थ भ्रूण और स्वस्थ शिशु की संभावना बढ़ जाती है।

आयोजन समिति की अध्यक्ष डॉ. सुजाता रामाकृष्णनन, व डॉ. गौरव मजूमदार ने बताया कि पर्यावरण प्रदूषण, जंक फूड का बढ़ता सेवन, शारीरिक गतिविधियों की कमी और तनावपूर्ण जीवनशैली पुरुष प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रहे हैं। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नरेन्द्र मल्होत्रा ने युवाओं को जीवनशैली में सुधार लाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जल्दी सोना और जल्दी उठना, स्वस्थ दिनचर्या अपनाना और नशे से पूरी तरह दूर रहना बेहद जरूरी है। स्पष्ट किया कि खानपान में स्वाद से अधिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। अधिक स्मोकिंग, अत्यधिक चॉकलेट का सेवन और किसी भी प्रकार का नशा बांझपन की समस्या को बढ़ाने वाले प्रमुख कारक हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और सकारात्मक दिनचर्या अपनाकर वे अपनी प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाए रख सकते हैं।

8 अगस्त को केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल करेंगे उद्घाटन, वैज्ञानिक सत्रों पर रहेगा फोकस

ACE 2026 अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला के दूसरे दिन, 8 अगस्त को कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर देश-विदेश से आए एक हजार से अधिक विशेषज्ञ, चिकित्सक और शोधकर्ता मौजूद रहेंगे। उद्घाटन सत्र के साथ ही कार्यक्रम में वैज्ञानिक आदान-प्रदान की औपचारिक शुरुआत होगी।
उद्घाटन के बाद पूरे दिन विभिन्न साइंटिफिक सेशन आयोजित किए जाएंगे, जिनमें प्रजनन चिकित्सा, आईवीएफ तकनीक और एम्ब्रियोलॉजी से जुड़े नवीनतम शोध और तकनीकों पर चर्चा होगी। इन सत्रों में अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे और आधुनिक लैब तकनीकों, भ्रूण विकास, स्पर्म चयन और उपचार की नई पद्धतियों पर प्रकाश डालेंगे।
इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ. जयदीप मल्होत्रा, डॉ. निहारिका मल्होत्रा, एसीई के अध्यक्ष सुजाता रामकृष्णन, इनकमिंग प्रसीडेंट, गौरव मजूमदार, सचिव डॉ.परुषराम गोपीनाथ, डॉ. रीता वासेना डॉ. अनुपम गुप्ता, अम्बर गुप्ता, किया पाराशर, रजनी पचौरी, मीनल जैन, डॉ. सुधा बंसल, रिचा सिंह, डॉ. नीरजा सचदेव, डॉ. कृष्णा चैतन्य आदि उपस्थित थीं।