15 छात्रों की मौत के बाद बड़ी कार्रवाई, बिल्डिंग मालिक पहले ही भेजा जा चुका है जेल
पायनियर समाचार सेवा
लखनऊ। राजधानी के अलीगंज स्थित कोचिंग अग्निकांड में 15 छात्रों की दर्दनाक मौत के बाद आखिरकार शनिवार को प्रशासन का बुलडोजर उस इमारत पर गरज पड़ा। जिसे इस हादसे के बाद पूरे प्रदेश में खूनी बिल्डिंग के नाम से जाना जाने लगा था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अवैध घोषित की गई इस तीन मंजिला इमारत के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुबह से देर रात तक चली कार्रवाई में इमारत का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा ध्वस्त कर दिया गया। गत 22 जून को इस इमारत में भीषण आग लगने से 15 छात्रों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे।

हादसे के बाद पूरे प्रदेश में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना अलीगढ़ दौरा बीच में छोड़कर लखनऊ पहुंचे थे और घटना स्थल के साथ अस्पताल जाकर घायलों का हालचाल लिया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी घटनास्थल और अस्पताल पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की थी। हादसे के बाद एलडीए ने इमारत की जांच कराई, जिसमें भवन निर्माण के गंभीर उल्लंघन सामने आए। जांच में इमारत पूरी तरह नियमों के विपरीत पाई गई।
इसके बाद भवन स्वामी वीरेंद्र शुक्ला को अवैध निर्माण का नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा गया। जवाब संतोषजनक न मिलने पर 10 जुलाई को ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया और 25 जुलाई तक स्वयं भवन गिराने का अंतिम अवसर दिया गया। बताया गया कि भवन स्वामी ने केवल सामने का कुछ हिस्सा हटाया, लेकिन निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बावजूद पूरी इमारत नहीं गिराई। इसके बाद 25 जुलाई की सुबह एलडीए की टीम बुलडोजरों और भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और ध्वस्तीकरण अभियान शुरू कर दिया।
आसपास की सभी सड़कों पर बैरिकेडिंग कर यातायात रोक दिया गया तथा सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के मकानों को भी खाली करा दिया गया। अधिकारियों की निगरानी में देर रात तक चली कार्रवाई के दौरान भवन का अधिकांश हिस्सा गिरा दिया गया। मौके पर कई थानों की पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी, अग्निशमन विभाग और एलडीए के इंजीनियर मौजूद रहे ताकि कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
अग्निकांड ने झकझोर दिया था पूरा प्रदेश
22 जून को दोपहर करीब दो बजे अलीगंज स्थित इस बहुमंजिला इमारत में शॉर्ट सर्किट से भीषण आग लग गई थी। बेसमेंट, ग्राउंड और प्रथम तल पर विभिन्न प्रतिष्ठान संचालित थे, जबकि ऊपरी मंजिलों पर लाइब्रेरी, एनीमेशन एवं 3डी आर्ट प्रोडक्शन सेंटर संचालित हो रहे थे। आग तेजी से फैलने के बाद कई छात्र ऊपरी मंजिलों पर फंस गए। जान बचाने के लिए कुछ छात्रों ने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया, लेकिन धुएं और आग की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई। घटना के दौरान इमारत से कूदकर जान बचाने की कोशिश करते लोगों के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इस हादसे में कुल 15 लोगों की जान गई, जिनमें 5 महिलाएं और 10 पुरुष शामिल थे। अधिकांश मृतकों की उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच थी। हादसे के बाद पुलिस ने भवन स्वामी वीरेंद्र शुक्ला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। ध्वस्तीकरण के दौरान भवन स्वामी के वकील मौके पर पहुंचे और अधिकारियों से कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्हें ध्वस्तीकरण आदेश की जानकारी नहीं दी गई थी, हालांकि प्रशासन ने निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने का दावा किया।
सुबह से देर रात तक चला ध्वस्तीकरण अभियान
शनिवार सुबह से ही एलडीए की टीम भारी मशीनों के साथ मौके पर पहुंच गई थी। आसपास के सभी रास्ते बंद कर दिए गए और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। सुरक्षा के मद्देनजर आसपास रहने वाले लोगों को पहले ही अपने मकान खाली करने के निर्देश दिए गए थे। देर रात तक चली कार्रवाई में इमारत का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा ध्वस्त कर दिया गया।

हादसे के बाद गिरफ्तार हुआ था भवन स्वामी
अग्निकांड के बाद जांच में सामने आया कि भवन रामेश्वरम ग्रुप के मालिक वीरेंद्र शुक्ला का था। नियमों के उल्लंघन और लापरवाही के आरोप में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। ध्वस्तीकरण के दौरान उनके वकील ने प्रशासन से कार्रवाई पर आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन एलडीए ने नियमानुसार कार्रवाई जारी रखी।