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साइबर ठगों पर कसता शिकंजा, डीजीपी ने की उच्चस्तरीय बैठक
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साइबर अपराध एवं साइबर अपराधियों के विरुद्ध प्रदेशभर में सात दिवसीय विशेष अभियान ऑपरेशन साइ-वज्र चलाये जाने के निर्देश दिए
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एक अप्रैल, 2025 से 30 जून, 2026 तक की अवधि में 2,94,024 संदिग्ध मोबाइल नंबर, 1,81,405 मोबाइल उपकरण कराए ब्लॉक
पायनियर समाचार सेवा
लखनऊ। साइबर सेल ने अपराधियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई करते हुए अब तक 530 करोड़ की धनराशि साइबर अपराधियों के खाते में जाने से बचायी। इसके साथ ही अबतक करीब 2,94,024 संदिग्ध मोबाइल नंबर, 1,81,405 मोबाइल उपकरण ब्लॉक कराए। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने मंगलवार को साइबर अपराध को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की, बैठक में साइबर अपराधियों के बार में उन्हें किए गए कार्रवाई का विवरण उपलब्ध कराया गया। बैठक में पुलिस महानिदेशक, साइबर क्राइम बीके सिंह, पुलिस उपमहानिरीक्षक, साइबर क्राइम पवन कुमार, प्रदेश के समस्त कमिश्नरेट एवं जनपदों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, साइबर अपराध के नोडल अधिकारी, साइबर सेल एवं साइबर थानों में कार्यरत पुलिसकर्मी तथा साइबर अपराध मुख्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी सम्मिलित हुए। साइबर अपराध नियंत्रण तंत्र की समीक्षा करते हुए कमिश्नरेट एवं जनपद स्तर पर साइबर प्रशासन को और अधिक सुदृढ़ बनाने, वरिष्ठ अधिकारियों की सक्रिय भूमिका को सुनिश्चित करने के पुलिस महानिदेश ने निर्देश दिए।
बैठक के दौरान एक अप्रैल, 2025 से 30 जून, 2026 की अवधि में साइबर अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में प्रदेश में की गई कार्यवाही की समीक्षा भी की। इस अवधि में साइबर अपराध में प्रयुक्त 2,94,024 संदिग्ध मोबाइल नंबरों तथा 1,81,405 मोबाइल उपकरणों को ब्लॉक कराया गया। साथ ही साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में 530 करोड़ की धनराशि पर लाइन/होल्ड लगाकर उसे साइबर अपराधियों तक पहुँचने से रोका गया। पुलिस महानिदेशक ने इन उपलब्धियों की सराहना करते हुए निर्देशित किया कि साइबर अपराध की रोकथाम एवं पीड़ितों को त्वरित राहत उपलब्ध कराने के लिए इन प्रयासों को और अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाया जाए। बैठक में पुलिस महानिदेशक ने साइबर अपराध पीड़ितों की शिकायतों का त्वरित, पारदर्शी एवं प्रभावी पंजीकरण सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया। उनके द्वारा निर्देशित किया गया कि तकनीकी अथवा अन्य कारणों से लंबित अथवा अपूर्ण शिकायतों का यथाशीघ्र निस्तारण करते हुए उन्हें ऑनलाइन प्रणाली में समयबद्ध रूप से प्रेषित किया जाए।
जिससे साइबर अपराधियों तक धनराशि पहुँचने से पूर्व अधिकतम राशि को सुरक्षित किया जा सके। इस संबंध में सभी कमिश्नरेट एवं जनपदों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए आवश्यक सुधारात्मक निर्देश भी प्रदान किए गए। साइबर अपराध की प्रभावी रोकथाम के दृष्टिगत संदिग्ध मोबाइल नंबरों एवं मोबाइल उपकरणों को ब्लॉक कराने, साइबर वित्तीय अपराधों में प्रयुक्त बैंक खातों की पहचान कर उनके विरुद्ध त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने के निर्देश दिए गए। बैठक में साइबर अपराध के विरुद्ध कार्यरत पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के नियमित प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता में वृद्धि तथा नवीन साइबर अपराध प्रवृत्तियों के अनुरूप क्षमता विकास पर विशेष बल दिया गया।
साथ ही आमजन को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान संचालित करने के निर्देश भी दिए गए। पुलिस महानिदेशक ने यह भी निर्देशित किया कि वित्तीय साइबर अपराधों के अतिरिक्त महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध होने वाले साइबर अपराधों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर लिया जाए। ऐसे अपराधों से संबंधित अभिसूचना का प्रभावी संकलन कर संगठित साइबर अपराध नेटवर्क के विरुद्ध समन्वित एवं कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके आलावा बैठक के अंत में पुलिस महानिदेशक ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि साइबर अपराध के विरुद्ध प्रदेश में एक समन्वित, तकनीक-सक्षम एवं पीड़ित-केंद्रित कार्यप्रणाली विकसित करते हुए समयबद्ध, प्रभावी एवं परिणामोन्मुख कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, जिससे नागरिकों का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो तथा साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।










