मध्यप्रदेश देश में परमाणु ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बनने की ओर अग्रसर: अधिकारी

भोपाल। तापीय, जल एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का व्यापक उपयोग करने के बाद मध्यप्रदेश अब देश में परमाणु ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य में लगभग 7,000 मेगावाट क्षमता की परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं पर काम चल रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री कार्यालय एवं ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) नीरज मंडलोई ने बताया कि एनटीपीसी (नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन) और एनपीसीआईएल (न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन आॅफ इंडिया लिमिटेड) की परियोजनाओं के साथ-साथ निजी क्षेत्र की कंपनियां भी राज्य में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निवेश में रुचि दिखा रही हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘शांति अधिनियम-2025’ (सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट आॅफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) के अनुरूप निवेश को गति देने के लिए राज्य सरकार ने ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। इसमें राजस्व, जल संसाधन विभाग तथा संबंधित जिलों के कलेक्टर शामिल हैं। मंडलोई ने कहा कि यह एक अनूठी व्यवस्था है। अब तक किसी अन्य राज्य ने ऐसा नहीं किया है। सोमवार को परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस बैठक में भी नई परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को आकर्षित करने के लिए मध्यप्रदेश की सक्रिय भूमिका की सराहना की गई।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है और मध्यप्रदेश इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य में वर्तमान में लगभग 7,000 मेगावाट क्षमता की परमाणु ऊर्जा परियोजनाएं चिन्हित की गई हैं, जबकि निजी क्षेत्र की कुछ अन्य परियोजनाओं के प्रस्ताव विचाराधीन हैं। उन्होंने बताया कि प्रगति पर चल रही परियोजनाओं में नीमच जिले के बासी में एनटीपीसी की 2,800 मेगावाट (700 मेगावाट की चार इकाइयां) क्षमता की परियोजना शामिल है। बासी का चयन पांच संभावित स्थलों के मूल्यांकन के बाद किया गया और इसे गांधी सागर जलाशय से 140 एमसीएम पानी के आवंटन की सैद्धांतिक मंजूरी भी मिल चुकी है।

मंडलोई ने बताया कि दूसरी परियोजना मंडला जिले के आदिवासी क्षेत्र में स्थित एनपीसीआईएल की 1,400 मेगावाट (700 मेगावाट की दो इकाइयां) क्षमता वाली चुटका परमाणु ऊर्जा परियोजना है। इसके लिए पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (आर एंड आर) गतिविधियों को 196 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और एनपीसीआईएल को भूमि हस्तांतरण का कार्य भी प्रारंभ हो गया है।
अधिकारी ने बताया कि शिवपुरी जिले में एनपीसीआईएल की दूसरी परियोजना भीमपुर परमाणु ऊर्जा परियोजना है, जिसकी प्रस्तावित क्षमता 2,800 मेगावाट (700 मेगावाट की चार इकाइयां) है। इसके लिए 159 एमसीएम पानी के आवंटन का अनुरोध किया गया है।

उन्होंने कहा कि परियोजना के सर्वेक्षण के लिए धनराशि जारी कर दी गई है और विशेषज्ञ दल क्षेत्रीय अध्ययन कर रहे हैं। मंडलोई के अनुसार, प्रस्तावित परियोजनाओं में अदाणी समूह द्वारा कटनी और छिंदवाड़ा जिलों में, टाटा पावर द्वारा रीवा जिले में तथा बजाज समूह द्वारा मंदसौर जिले में परमाणु ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने के प्रस्ताव शामिल हैं। इन परियोजनाओं की क्षमता अभी तय नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि एनटीपीसी और एनपीसीआईएल की परियोजनाओं में स्थल चयन, जल आवंटन, सर्वेक्षण और पुनर्वास संबंधी कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

मंडलोई ने कहा कि अदाणी समूह, टाटा पावर और बजाज समूह जैसी कंपनियों की रुचि यह दर्शाती है कि मध्यप्रदेश में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी पहल से मध्यप्रदेश देश में परमाणु ऊर्जा उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

Chief Sub-editor Pioneer Hindi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *