नरेंद्र मोदी ने 10 जून को लगातार सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने का रिकॉर्ड अपने नाम किया
सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड टूटा
मोदी ने पहली बार 26 मई 2014 को पीएम पद की ली शपथ
10 जून को उनके कार्यकाल के 4399 दिन हुए पूरे
भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में वर्ष 2014 एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में दर्ज है। इसी वर्ष नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने पूर्ण बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता प्राप्त की और देश को एक नई राजनीतिक दिशा मिली। मई 2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाकर भारतीय राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ा है। वर्ष 2026 में उनके नेतृत्व के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह आवश्यक हो जाता है कि उनके शासनकाल की उपलब्धियों, नीतियों, सुधारों, चुनौतियों और उनके व्यापक प्रभावों का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाए। पिछले 12 वर्षों में भारत ने आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी, कूटनीतिक और अवसंरचनात्मक क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन देखे हैं। सरकार ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ विकास को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया। वहीं दूसरी ओर विपक्ष और आलोचकों ने कई नीतियों पर प्रश्न भी उठाए। इसलिए मोदी सरकार के 12 वर्षों का मूल्यांकन केवल उपलब्धियों की सूची नहीं, बल्कि एक व्यापक राष्ट्रीय विमर्श का विषय है।
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के 12 वर्ष : उपलब्धियां चुनौतियां और भारत का बदलता स्वरूप
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सबसे बड़ी विशेषता उनकी निर्णायक कार्यशैली रही है। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही, समयबद्धता और परिणाम आधारित कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास किया। केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन पर लगातार निगरानी, डिजिटल तकनीक का उपयोग तथा जनभागीदारी को प्रोत्साहन देने की नीति ने शासन प्रणाली को अधिक सक्रिय बनाने का प्रयास किया। प्रधानमंत्री ने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के माध्यम से जनता से सीधा संवाद स्थापित किया।
आर्थिक सुधारों का दशक
मोदी सरकार के 12 वर्षों में अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए। इनमें वस्तु एवं सेवा कर (GST), दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC), प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT), डिजिटल भुगतान प्रणाली का विस्तार और कर सुधार प्रमुख रहे।
जीएसटी : एक राष्ट्र, एक कर
जीएसटी को स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े कर सुधारों में गिना जाता है। इसके माध्यम से विभिन्न अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत कर देश में एक समान कर व्यवस्था लागू की गई। इससे व्यापार करने की प्रक्रिया सरल हुई तथा कर प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ी।
डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने भारत में डिजिटल भुगतान की तस्वीर बदल दी। आज छोटे दुकानदार से लेकर बड़े व्यापारी तक डिजिटल भुगतान स्वीकार कर रहे हैं। इससे नकदी पर निर्भरता कम हुई और वित्तीय लेनदेन अधिक पारदर्शी बने।
मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत
सरकार ने विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ अभियान शुरू किया। बाद में कोविड-19 महामारी के दौरान ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के माध्यम से घरेलू उत्पादन, स्थानीय उद्योगों और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने पर बल दिया गया।
वित्तीय समावेशन की दिशा में क्रांति

प्रधानमंत्री जनधन योजना को मोदी सरकार की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में माना जाता है। इस योजना के तहत करोड़ों लोगों के बैंक खाते खोले गए, जिससे गरीब और वंचित वर्ग औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ सके। जनधन खाते, आधार और मोबाइल फोन को जोड़कर ‘जैम ट्रिनिटी’ का मॉडल विकसित किया गया। इसके माध्यम से सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचाई जाने लगी। इससे भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका में कमी आई।
आधारभूत संरचना का अभूतपूर्व विस्तार: मोदी सरकार ने सड़क, रेल, हवाई अड्डों, बंदरगाहों और डिजिटल नेटवर्क के विकास पर विशेष ध्यान दिया।
1. सड़क और एक्सप्रेसवे:- देश में राष्ट्रीय राजमार्गों का तेजी से विस्तार हुआ। अनेक नए एक्सप्रेसवे बनाए गए, जिनसे यात्रा का समय कम हुआ और आर्थिक गतिविधियों को गति मिली।
2. रेलवे का आधुनिकीकरण:- रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास, वंदे भारत ट्रेनों के संचालन, रेलवे विद्युतीकरण और सुरक्षा सुधारों पर विशेष बल दिया गया। इससे भारतीय रेल को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण
प्रगति हुई।
3.हवाई संपर्क:- उड़ान योजना के माध्यम से छोटे शहरों को हवाई सेवाओं से जोड़ने का प्रयास किया गया। इससे क्षेत्रीय संपर्क में वृद्धि हुई और नागरिक उड्डयन क्षेत्र का विस्तार हुआ।
4. डिजिटल इंडिया:- डिजिटल इंडिया अभियान ने शासन और नागरिक सेवाओं को तकनीक से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऑनलाइन सेवाओं, डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस और इंटरनेट कनेक्टिविटी के विस्तार से आम नागरिकों को सुविधाएं मिलीं। कोविड-19 महामारी के दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन और डिजिटल प्रशासन की उपयोगिता विशेष रूप से दिखाई दी। भारत आज दुनिया की प्रमुख डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है।
विदेश नीति में भारत की बढ़ती भूमिका
पिछले 12 वर्षों में भारत की विदेश नीति अधिक सक्रिय और प्रभावशाली दिखाई दी। प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न देशों की यात्राओं और बहुपक्षीय मंचों पर भारत की उपस्थिति को मजबूत किया। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद विरोध, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर भारत की भूमिका मजबूत हुई। अमेरिका, जापान, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और खाड़ी देशों के साथ संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया गया। वहीं पड़ोसी देशों के साथ भी सहयोग बढ़ाने के प्रयास किए गए।
कोविड-19 महामारी से मुकाबला
कोविड-19 महामारी मोदी सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक थी। महामारी के दौरान देशव्यापी लॉकडाउन, स्वास्थ्य अवसंरचना का विस्तार, वैक्सीन विकास और टीकाकरण अभियान जैसे कदम उठाए गए। भारत ने न केवल अपने नागरिकों के लिए बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया बल्कि कई देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराकर वैश्विक सहयोग का उदाहरण भी प्रस्तुत किया।










