द्रोणागिरी ट्रैक का पैदल पुल एक साल से बदहाल

भूस्खलन से क्षतिग्रस्त पुल पर मंडरा रहा हादसे का खतरा

ग्रामीणों की कई शिकायतों के बावजूद नहीं जागा लोक निर्माण विभाग

पर्यटकों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा पर संकट

सोनू। पायनियर संवाददाता। जोशीमठ

द्रोणागिरी ट्रैक को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण पैदल पुल पिछले एक वर्ष से बदहाली का शिकार है, लेकिन लोक निर्माण विभाग अब तक इसकी सुध लेने को तैयार नहीं दिख रहा। तोलमा गांव से करीब एक किलोमीटर आगे लामा गधेरे पर बना यह पुल लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण अपने बेसमेंट सहित गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुका है, जिससे यहां से गुजरने वाले लोगों की जान पर खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय निवासी मुकेश पंवार ने बताया कि इसी मार्ग से होकर हर वर्ष सैकड़ों देशी-विदेशी पर्यटक द्रोणागिरी ट्रैक के लिए आते-जाते हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय ग्रामीण और पशुपालक भी अपने पालतू पशुओं के साथ इसी पुल का उपयोग करते हैं। पुल की जर्जर स्थिति के चलते लोगों को हर दिन जोखिम उठाकर आवागमन करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पुल की हालत को लेकर शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग को कई बार लिखित एवं मौखिक रूप से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के बीच पुल का बचा हुआ आधार भी कमजोर पड़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शीघ्र मरम्मत या पुनर्निर्माण का कार्य शुरू नहीं किया गया तो तेज बारिश के दौरान पुल पूरी तरह ध्वस्त हो सकता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि विभाग की लापरवाही न केवल क्षेत्र के पर्यटन को प्रभावित कर रही है, बल्कि स्थानीय लोगों की आजीविका और सुरक्षा को भी खतरे में डाल रही है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल पुल की मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि किसी संभावित बड़े हादसे को रोका जा सके।

Chief Sub-editor Pioneer Hindi

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