काशी की पवित्रता के लिए महाअभियान
“लड़ाई अभी अधूरी है…” मदिरा मुक्त काशी के लिए जारी रहेगा आंदोलन
सुशील कुमार मिश्र/वाराणसी
सनातन संस्कृति की प्राण और देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी (वाराणसी) को उसके मूल स्वरूप और आध्यात्मिक ऊर्जा में वापस लौटाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। अन्य पवित्र तीर्थ स्थलों की तर्ज पर काशी में भी मांस और मदिरा की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है।
’आगमन संस्था’ और ‘ब्रह्म सेना’ द्वारा पिछले 5 वर्षों से चलाए जा रहे “अभियान पवित्र काशी” के पुरजोर प्रयासों का ही असर है कि वाराणसी नगर निगम ने एक साल पूर्व की कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाते हुए मांस-मछली की दुकानों को शहर की सीमा से बाहर करने का एक बार फिर दृढ़ संकल्प लिया है। इस ऐतिहासिक पहल के लिए दोनों संस्थाओं ने नगर निगम के माननीय मेयर, पार्षदों और प्रशासनिक अधिकारियों को साधुवाद देते हुए आभार व्यक्त किया है।
सनातन पर आघात के विरुद्ध 5 वर्षों का अनवरत संघर्ष:-
संस्थाओं का स्पष्ट मानना है कि काशी जैसे परम पावन धार्मिक शहर में मांस और मदिरा की खुलेआम बिक्री न केवल निंदनीय है, बल्कि यह सनातन परंपरा और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर गहरा आघात भी है। इस पावन नगरी को इस ‘पाप कर्म’ से मुक्त कराने के लिए पिछले 5 सालों में जन-जन और सरकार तक आवाज पहुंचाने के लिए अनेकों अनूठे व भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
जादूगर के माध्यम से अनूठा संदेश:-
बनारस से लेकर राजधानी लखनऊ तक जादूगर के माध्यम से कलात्मक रूप से काशी को मांस-मदिरा मुक्त करने की पुरजोर मांग उठाई गई। वैदिक बटुकों ने सड़कों पर उतरकर काशी की संप्रभुता और पवित्रता की रक्षा के लिए एक विशाल पदयात्रा निकाली। काशी के प्रतिष्ठित मंदिरों के महंतों, पूज्य संतों और आदरणीय प्रबुद्ध जनों ने ‘संत आग्रह यात्रा’ निकालकर इस मुहिम को आध्यात्मिक बल दिया। शहर के 25 प्रमुख विद्यालयों के लगभग 1000 छात्रों ने पेंटिंग प्रतियोगिता के माध्यम से अपनी कूची से काशी को मांस-मदिरा मुक्त बनाने की मार्मिक अपील की। काशी में प्रतिष्ठित देवालयों और देव विग्रहों से इस पाप कर्म को दूर करने की प्रार्थना के साथ ‘देव विग्रह यात्रा’, ‘द्वादश आदित्य यात्रा’ और ‘द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा’ सहित दर्जनों धार्मिक अनुष्ठानों का संपादन किया गया।
अभियान पवित्र काशी” की अब तक की बड़ी सफलताएँ:-
5 साल के इस लंबे और कड़े सफर में इस आंदोलन ने कई महत्वपूर्ण पड़ाव पार किए हैं और बड़ी सफलताएँ हासिल की हैं। बाबा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के 2 किलोमीटर के दायरे (क्षेत्र) में मांस और मदिरा की बिक्री पर पूर्ण रोक लगाई गई। श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था और पावनता को देखते हुए नगर निगम वाराणसी द्वारा पूरे सावन मास में मांस की दुकानों को बंद रखने का ऐतिहासिक आदेश जारी किया गया।










