यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड के प्रमुख एडमिरल पापारो छह दिवसीय भारत दौरे पर, रक्षा सहयोग बढ़ाने पर होगी बात

नेशनल 02
नई दिल्ली। अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे.
पापारो 3 से 8 अक्टूबर तक भारत के दौरे पर रहेंगे। भारत में अमेरिकी दूतावास के मुताबिक, उनकी इस
यात्रा का मकसद भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों और दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग को और मजबूत
करना है।
अमेरिकी दूतावास ने उनकी यात्रा की जानकारी देते हुए कहा, “अपने दौरे के दौरान एडमिरल पापारो
भारतीय अधिकारियों के साथ साझा सुरक्षा प्राथमिकताओं पर बातचीत करेंगे। इनमें डिजिटल बदलाव और
नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल, क्षेत्र में रणनीतिक स्थिरता बनाए रखना, रक्षा क्षेत्र में ऊर्जा से जुड़ी
मजबूती बढ़ाना और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा से निपटना शामिल है।”
अमेरिकी दूतावास के मुताबिक, भारत और अमेरिका मिलकर ऐसी रक्षा साझेदारी तैयार कर रहे हैं, जो
नई टेक्नोलॉजी से लेकर समुद्री सुरक्षा तक भविष्य की चुनौतियों से निपटने में सक्षम हो।
दूतावास ने कहा, “एडमिरल पापारो की यात्रा भारत-अमेरिका की मेजर डिफेंस पार्टनरशिप की मजबूती को
दिखाती है। साथ ही यह हिंद महासागर क्षेत्र में अमेरिका की लंबे समय तक मौजूदगी और उसके हितों
को भी दोहराती है।”
एडमिरल पापारो इससे पहले इसी साल 14 से 19 फरवरी तक भारत आए थे। उस यात्रा का मकसद भी
दोनों देशों के रक्षा संबंधों और रणनीतिक सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना था। उस दौरान उन्होंने नई
दिल्ली में तत्कालीन चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान और तत्कालीन नौसेना प्रमुख
एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी से मुलाकात की थी। बातचीत में क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और दोनों देशों की
सेनाओं की मिलकर ऑपरेशन करने की क्षमता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
पापारो ने भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ हरियाणा के चंडीमंदिर स्थित भारतीय सेना की
वेस्टर्न कमांड के मुख्यालय का भी दौरा किया था। वहां उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार
के साथ ऑपरेशनल ब्रीफिंग में हिस्सा लिया था।
इसके बाद एडमिरल पापारो बेंगलुरु भी गए थे। वहां उन्होंने नेशनल फ्लाइट टेस्ट सेंटर का दौरा किया
और एयरोस्पेस सेक्टर में हो रहे इनोवेशन तथा एचएएल तेजस से जुड़ी सुविधाओं को देखा। इस दौरान
उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप को और बढ़ाने पर जोर दिया था।
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग काफी व्यापक हो चुका है। इसमें लॉजिस्टिक्स से जुड़े
समझौते, संयुक्त सैन्य अभ्यास और इंडो-पैसिफिक में एडवांस मिलिट्री टेक्नोलॉजी के मिलकर उत्पादन
जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
पिछले दो दशकों में भारत और अमेरिका ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग काफी बढ़ाया है। दोनों देशों के बीच अब
ज्यादा सैन्य अभ्यास, डिफेंस टेक्नोलॉजी से जुड़े प्रोजेक्ट और सेनाओं की साथ मिलकर काम करने की
क्षमता बढ़ाने वाले समझौते देखने को मिले हैं।



