उत्तर प्रदेश में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है। इसके साथ ही प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने की प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है और जल्द चुनाव कार्यक्रम घोषित होने की संभावना जताई जा रही है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, प्रारंभिक मतदाता सूची में कुल 23 करोड़ 22 लाख 48 हजार 805 मतदाता दर्ज थे। दावे और आपत्तियों के निस्तारण के बाद सूची का व्यापक सत्यापन किया गया। इस दौरान स्थानांतरित हो चुके, दोहरी प्रविष्टि वाले और मृत मतदाताओं के बड़ी संख्या में नाम हटाए गए। वहीं, करीब 29 लाख नए मतदाताओं को सूची में शामिल किया गया है।
अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद प्रदेश में कुल 12 करोड़ 58 लाख 51 हजार 570 मतदाता पंचायत चुनाव में मतदान के पात्र होंगे। निर्वाचन आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया था।
हाईकोर्ट की निगरानी में आगे बढ़ रही प्रक्रिया
गौरतलब है कि पंचायत चुनाव समय पर न कराए जाने और ग्राम प्रधानों को छह माह के लिए प्रशासक नियुक्त किए जाने के फैसले को लेकर हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई थीं। अदालत ने इस मामले में राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब भी मांगा था। अब अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद माना जा रहा है कि चुनाव की तारीखों को लेकर जल्द महत्वपूर्ण फैसला लिया जा सकता है।
उधर, पंचायत चुनाव में आरक्षण व्यवस्था को लेकर गठित ओबीसी आयोग भी अपनी रिपोर्ट तैयार कर रहा है। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद आरक्षण की तस्वीर साफ हो सकेगी।
इन जिलों में सबसे ज्यादा ग्रामीण मतदाता
अंतिम मतदाता सूची के अनुसार जौनपुर, आजमगढ़, प्रयागराज, सीतापुर, गोरखपुर और लखीमपुर खीरी जैसे जिलों में ग्रामीण मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है।
- जौनपुर – 36.97 लाख
- आजमगढ़ – 35.76 लाख
- प्रयागराज – 34.95 लाख
- सीतापुर – 31.18 लाख
- गोरखपुर – 29.63 लाख
- लखीमपुर खीरी – 28.87 लाख
- हरदोई – 28.73 लाख
- गाजीपुर – 28.11 लाख
वहीं गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, महोबा और हमीरपुर जैसे जिलों में ग्रामीण मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम है।
चुनावी सरगर्मियां तेज
अंतिम मतदाता सूची जारी होने के साथ ही संभावित उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों ने भी पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी समीकरण बनने लगे हैं और आरक्षण तथा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंचायत चुनाव 2026 प्रदेश की ग्रामीण राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।










