-राकेश टिकैत ने बोले, किसान की सबसे बड़ी ताकत शांतिपूर्ण आंदोलन
-23 अक्तूबर को लखनऊ में गन्ना भवन पर पंचायत का ऐलान
मुजफ्फरनगर। राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में भारतीय किसान यूनियन की पहली रात्रि महापंचायत में किसान-मजदूरों की भारी भीड़ उमड़ी। शाम ढलते ही ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से किसानों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया, जो देर रात तक जारी रहा। महापंचायत में भाकियू नेताओं ने किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए और आंदोलन को किसानों की सबसे बड़ी ताकत बताया। राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने 23 अक्तूबर को लखनऊ स्थित गन्ना भवन पर किसानों की पंचायत आयोजित करने का ऐलान किया। महापंचायत को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार किसी गलतफहमी में न रहे। किसानों की समस्याओं की अनदेखी ज्यादा समय तक नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन किसानों के हाथ में सबसे बड़ी ताकत है और देश तथा किसानों के हितों की रक्षा के लिए आंदोलन जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी संस्थाओं का इस्तेमाल कर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है। राकेश टिकैत ने सहारनपुर में मस्जिद से जुड़े प्रकरण को लेकर शासन और प्रशासन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश का हवाला देकर वर्षों पुरानी मस्जिद को गिराया गया। उन्होंने रामपुर की यूनिवर्सिटी से संबंधित कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि यदि वहां तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई तो ट्रैक्टर और जेसीबी आमने-सामने आने की स्थिति बन सकती है। उनके इस बयान के दौरान महापंचायत में किसानों ने समर्थन जताया। टिकैत ने किसानों से खेती में अनावश्यक खर्च कम करने और अपनी जमीन बचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सस्ते दूध के नाम पर पशुधन को खत्म करने की स्थिति भविष्य में किसानों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। किसानों को आने वाले समय में अपनी जमीन बचाने के साथ खेती की लागत और तौर-तरीकों पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि खेती को घाटे का सौदा मानने के बजाय खर्च और उत्पादन की व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है। महापंचायत में गन्ने के मूल्य का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। राकेश टिकैत ने गन्ने का भाव 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास किए जाने की मांग रखी। वहीं भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने नए पेराई सत्र से पहले गन्ने का मूल्य घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन अधिग्रहण के नाम पर ली जा रही है, इसलिए सरकार को अन्नदाता के हितों का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गन्ने के भाव में किसानों को राहत देने की मांग की। महापंचायत में एमएसपी कानून और सरकारी खरीद कानून की मांग को लेकर संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया गया। संगठन की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम 16 सूत्रीय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम 15 सूत्रीय मांगपत्र भेजे गए। मांगपत्रों में लंबित गन्ना भुगतान ब्याज सहित कराने, किसानों और कृषि मजदूरों की कर्जमाफी, ब्याजमुक्त कृषि ऋण तथा कृषि कार्यों के लिए मुफ्त बिजली समेत अन्य मांगें शामिल हैं। महापंचायत में उत्तराखंड के खानपुर विधायक उमेश शर्मा भी पहुंचे। उन्होंने किसान संगठनों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें किसान संगठनों को कमजोर करती रही हैं। चीनी के बढ़ते दामों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब चीनी के दाम बढ़ रहे हैं तो उसी अनुपात में किसानों को गन्ने का मूल्य भी मिलना चाहिए। रात्रि महापंचायत में देर रात तक किसान-मजदूरों की मौजूदगी बनी रही। भाकियू नेताओं ने किसानों से संगठन को मजबूत करने और अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया।